कोई सलीम सुरेश बनकर जीवन बर्बाद करेगा तो...; लिव-इन पर गुजरात डिप्टी CM हर्ष संघवी भड़के

Gaurav Kala लाइव हिन्दुस्तान
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गुजरात के डिप्टी सीएम हर्ष संघवी ने यूसीसी को देश की जरूरत बताया। उन्होंने लिव -इन में रजिट्रेशन को बेटी की सलामती के लिए अहम बताया। कहा कि कोई सलीम सुरेश बनकर मेरे राज्य की बेटी का जीवन बर्बाद नहीं कर सकता।

कोई सलीम सुरेश बनकर जीवन बर्बाद करेगा तो...; लिव-इन पर गुजरात डिप्टी CM हर्ष संघवी भड़के

हाल ही में गुजरात की भाजपा सरकार ने यूसीसी कानून पास करा दिया है। ऐसा करने वाला गुजरात देश का दूसरा राज्य बन गया है। इससे पहले उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने यूसीसी को प्रदेशभर में लागू किया है। एक पॉडकास्ट इंटरव्यू के दौरान गुजरात के डिप्टी सीएम हर्ष संघवी ने यूसीसी को देश की जरूरत बताया। उन्होंने कहा कि लिव इन रिलेशनशिप में रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है। कोई भी सलीम सुरेश बनकर मेरे राज्य की बेटी का जीवन बर्बाद करेगा तो उसे नहीं छोड़ा जाएगा।

बेटियों की सलामी के लिए लिव-इन में रजिस्ट्रेशन

गुजरात के डिप्टी सीएम हर्ष संघवी ने कहा कि बेटियों की सलामती के लिए लिव-इन रिलेशनशिप में रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया गया है, ताकि उनके साथ बुरा न हो। कई शादी-शुदा लड़के अपने को कुंवारा कहकर ऐसी बेटियों को फंसाते हैं। कई लोग अपने नाम बदलकर, कई लोग अपनी पूरी पहचान को बदलकर भी ऐसी बेटियों को फंसाते हैं। उस बेटी को सही तौर पर जिसके साथ जीवन भर का विश्वास रखे, जिसके साथ लाइफ गुजार रही है... वह सही तौर पर क्या यह जानने का हक नहीं रखती कि वह कौन है? उसकी पहचान क्या है?

उन्होंने आगे कहा, कोई सलीम सुरेश बनकर या सुरेश सलीम बनकर मेरे राज्य की बेटी का जीवन बर्बाद करेगा तो उसे नहीं छोड़ा जाएगा। कोई सलीम सलीम रहे और राधिका राधिका रहे... दोनों साथ रहते हैं और उनको लग रहा है कि दोनों सही कर रहे हैं... तो उसमें मुझे बोलने का कोई हक नहीं है।

गुजरात में समान नागरिक संहिता को लेकर बड़ा कदम उठाया गया है। इंडिया टुडे के साथ पॉडकास्ट में राज्य के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने इस कानून को “जेंडर जस्टिस” यानी लैंगिक न्याय की दिशा में अहम पहल बताया। उत्तराखंड के बाद अब गुजरात UCC बिल पारित करने वाला दूसरा राज्य बन गया है, जिसका उद्देश्य सभी समुदायों के लिए विवाह, तलाक और उत्तराधिकार से जुड़े मामलों में समान कानूनी व्यवस्था लागू करना है।

20 लाख से अधिक लोगों की राय ली

हर्ष संघवी ने बताया कि इस कानून को तैयार करने से पहले जस्टिस रंजना देसाई समिति ने 20 लाख से अधिक लोगों की राय और सुझावों का अध्ययन किया। इसके आधार पर तैयार की गई इस संहिता में कई महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल किए गए हैं, जिनका मकसद खासतौर पर महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करना है।

यूसीसी से धोखाधड़ी वाले रिश्तों में रोक

यूसीसी के तहत विवाह और लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण अनिवार्य किया गया है। सरकार का मानना है कि इससे धोखाधड़ी वाले रिश्तों पर रोक लगेगी और महिलाओं को कानूनी सुरक्षा मिलेगी। इसके अलावा, लिव-इन संबंधों से जन्मे बच्चों को वैध दर्जा दिया जाएगा, जिससे उनके अधिकार सुरक्षित रहेंगे। वहीं, यदि किसी महिला को छोड़ दिया जाता है, तो वह भरण-पोषण (मेंटेनेंस) का दावा भी कर सकेगी।

संघवी ने स्पष्ट किया कि विवाह पंजीकरण के लिए माता-पिता को सूचना देना जरूरी होगा, लेकिन उनकी सहमति अनिवार्य नहीं होगी। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि इस कानून के दायरे से जनजातीय समुदायों को बाहर रखा गया है, जिसे लेकर उन्होंने सरकार के फैसले का बचाव किया।

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गौरव काला: वरिष्ठ पत्रकार और स्टेट टीम सदस्य

संक्षिप्त विवरण: गौरव काला पिछले 15 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान में स्टेट टीम का हिस्सा हैं। वह विशेष रूप से हिमालयी राज्य उत्तराखंड के अलावा, दिल्ली-एनसीआर, मध्यप्रदेश, झारखंड समेत कई हिंदी बेल्ट के राज्यों की खबरें कवर कर रहे हैं।


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