गुजरात में भीषण हादसा, डंपर से टकराई कार; AAP नेता सहित 5 लोगों की मौत
गुजरात में एक भीषण सड़क दुर्घटना में 5 लोगों की मौत हो गई और दो अन्य घायल हो गए। बताया जा रहा है कि एक डंपर ट्रक सड़क पार कर रहा था। उसी दौरान एक कार उससे टकरा गई। तीन लोगों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। मरने वालों में आम आदमी पार्टी के तालुका पंचायत सदस्य भी शामिल हैं।

गुजरात के मोरबी जिले में एक भीषण सड़क दुर्घटना घटी। राजमार्ग पर एक कार की डंपर ट्रक से टक्कर हो जाने से पांच लोगों की मौत हो गई और दो अन्य घायल हो गए। पुलिस ने शनिवार को घटना की जानकारी देते हुए बताया कि यह दुर्घटना शुक्रवार रात 9:30 बजे मोरबी-हलवाद राजमार्ग पर चरदवा गांव के पास हुई। एक डंपर ट्रक सड़क पार कर रहा था। इसी दौरान एक तेज रफ्तार की कार उससे टकरा गई। दुर्घटना में क्षतिग्रस्त कार से घायलों को निकालने के लिए भारी खुदाई मशीन का इस्तेमाल किया गया।
हलवाद थाने के एक अधिकारी ने बताया कि कार में सात लोग सवार थे। इनमें से तीन की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो अन्य ने राजकोट के एक अस्पताल में इलाज के दौरान देर रात दम तोड़ दिया। उन्होंने बताया कि दो लोगों को गंभीर हालत में राजकोट अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
मृतकों में परेश धधेया (24) भी शामिल थे, जो पहले एक बाइक दुर्घटना में घायल हो गए थे। उन्हें भलवाद तालुका के रणछोरगढ़ से अस्पताल ले जाया जा रहा था। अन्य मृतकों की पहचान प्रेमजी धधेया (आम आदमी पार्टी के तालुका पंचायत सदस्य), सुरेश सिरोया (47), विराम धधेया (28) और भरत धधेया (39) के रूप में हुई है।
लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
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