
भाजपा नेता हार्दिक पटेल की मुश्किलें बढ़ीं, पाटीदार आंदोलन केस में अदालत ने तय किए आरोप
भाजपा विधायक और पाटीदार नेता हार्दिक पटेल की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। विरामगाम से विधायक हार्दिक पटेल के खिलाफ अहमदाबाद की एक स्थानीय अदालत ने आरोप तय कर दिए हैं।
भाजपा विधायक और पाटीदार नेता हार्दिक पटेल की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। विरामगाम से विधायक हार्दिक पटेल के खिलाफ अहमदाबाद की एक स्थानीय अदालत ने आरोप तय कर दिए हैं। 2018 में पाटीदार अनामत आंदोलन समिति (PASS) के छह नेताओं के खिलाफ निकोल में एफआईआर दर्ज की गई है।
एडिशनल सिविल जज और अहमदाबाद रूरल कोर्ट के जेएमएफसी जीबी सियाग ने पटेल के खिलाफ गैर कानूनी तरीके से एकत्रित होने, दंगे, आपराधिक साजिश और पुलिस को उसके काम से रोकने जैसे आरोप तय किए हैं। पटेल समेत अन्य पाटीदार नेताओं के खिलाफ 19 अगस्त 2018 को मुकदमा दर्ज कराया गया था। आरोप है कि इन नेताओं ने पुलिस की अनुमति के बिना प्रदर्शन किया और अव्यवस्था फैलाई।
इसी अदालत ने दो महीने पहले पटेल के खिलाफ अरेस्ट वॉरंट जारी किया था, क्योंकि वह अदालत की कार्यवाही में शामिल नहीं हो रहे थे। गैर जमानती वारंट को रद्द करवाने के लिए हार्दिक पटेल ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अदालत ने इस शर्त पर इसे रद्द किया कि वह अब अनुपस्थित नहीं रहेंगे।
आरोप तय किए जाते वक्त हार्दिक पटेल अदालत में मौजूद रहे। नवरंगपुरा स्थित अदालत में हार्दिक पटेल काले रंग का मास्क पहने हुए पहुंचे। इससे पहले मेहसाणा जिले में एक सत्र अदालत ने हार्दिक पटेल को दो साल की सजा सुनाई थी। 2015 में एक मंत्री के घर पर तोड़फोड़ करने के मामले में उन्हें यह सजा सुनाई गई। इसकी वजह से वह 2029 का लोकसभा चुनाव नहीं लड़ सके। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने उनकी दोषसिद्धि को सस्पेंड कर दिया। हार्दिक कांग्रेस छोड़ भाजपा में आ गए और 2022 में विधायक बने।

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