आखिरी कॉल और अब सिर्फ तस्वीरें; अहमदाबाद प्लेन क्रैश के पीड़ित आज भी मंजर याद कर रोते हैं
अहमदाबाद प्लेन क्रैश की घटना को 1 साल पूरा हो गया है। पीड़ित परिवार आज भी वो घटना नहीं भूल पाए। किसी को अपने प्रियजन की आखिरी कॉल और अधूरी बातें सताती है तो कोई तस्वीर देख रोता है।

Ahmedabad plane crash Victims: अहमदाबाद में एयर इंडिया प्लेन क्रैश की घटना को आज एक साल हो गया। 12 जून को लंदन के लिए उड़ा AI-171 विमान टेकऑफ के कुछ ही मिनटों बाद क्रैश हो गया था। इस विमान हादसे में पायलट और क्रू मेंबर सहित 260 लोगों की जान चली गई थी। मरने वालों में 240 लोग उस प्लेन में सवार थे, बाकी 20 लोग वे थे, जिन्होंने जमीन पर अपनी जान गंवाई। विमान बीजे मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल परिसर में गिरा था। विमान हादसे में सिर्फ एक ही शख्स जिंदा बचा था- विश्वास कुमार रमेश। गुजरात मूल और ब्रिटिश नागिरक हो चुके विश्वास चमत्कारिक रूप से हादसे में बच गए थे। हालांकि विश्वास की तरह प्लेन में सवार बाकी लोग उनकी तरह किस्मत वाले नहीं थे। कई लोगों की लाश तक नहीं मिली। डीएनए जांच के बाद कई यात्रियों की मौत की पुष्टि हो पाई।
अहमदाबाद प्लेन क्रैश में मारे गए लोगों के परिवारजन आज किस हाल में हैं और उस दिन के बारे में क्या सोचते हैं? पीटीआई से बातचीत में पीड़ित परिवारों ने बताया कि वे आज भी उस भयावह घटना को भूल नहीं पाए हैं। हर किसी की अपनी अलग कहानी जरूर है, लेकिन एक चीज सेम। आज उनके प्रियजन साथ नहीं हैं।
6 मिनट बाद मौत की सूचना मिली
लंदन से आकाश बताते हैं कि दोपहर 1.33 को मेरी अपनी बीवी से बात हुई थी। उसने कहा था कि प्लेन टेक ऑफ होने वाला है। मेरा फोन नहीं लगेगा, चिंता मत करना, मैं आ जाऊंगी। मैंने कहा शांति से आना। मैं तुम्हारा इंतजार करूंगा। 1.39 मेरी बहन का कॉल आया। बताया कि प्लेन क्रैश हो गया है और उनकी डेथ हो गई है। ये पूरी घटना अभी भी पूरी दिमाग में घूमती रहती है। वो आखिरी बातचीत मैं आज भी भूल नहीं पाता। आकाश एक हफ्ते तक अस्पतालों के चक्कर काटते रहे और आखिरकार कंफर्म हुआ कि उनकी पत्नी अब नहीं रही।
पीड़ित परिवारों की कहानी, उनकी जुबानी
हर्षित और पूजा पटेल की कहानी भी जुदा नहीं है। पीटीआई से बातचीत में हर्षित के पिता अनिल कुमार कहते हैं कि बहू पूजा को काम था और थोड़ा लेट जाना था। इसलिए उन्होंने पहली फ्लाइट कैंसल कराई और अगली फ्लाइट बुक की। ऐसा दर्द किसी को न दे... जो मैंने देखा है।
सुरेश भाई और सीता बेन अपने 14 साल के बेटे आकाश को नहीं बचा पाने के लिए आज भी दुखी हैं। विमान बेकाबू होने के बाद मेघानी नगर स्थित हॉस्टल पर क्रैश हो गया था, जिसकी चपेट में आने से आकाश की मौत हो गई थी। सीता बेन चाय की दुकान चलाती है। वहीं, सुरेश भाई ऑटो ड्राइवर हैं। अहमदाबाद विमान हादसे में उन्होंने अपने बेटे को हमेशा के लिए खो दिया। सुरेश भाई कहते हैं कि एक साल हमने कैसे निकाला हम ही जानते हैं। हमें नींद नहीं आती, सबकुछ बेकार हो गया है। दोनों अपने काम पर तो लौट आए हैं, लेकिन बेटे की यादें आज भी उन्हें तड़पाती हैं। आज सिर्फ उनके बेटे की तस्वीर उनके जीवन का आखिरी सहारा है। वे घंटों उसकी तस्वीर के आगे रोते हैं और बेबस दिखते हैं।
अहमदाबाद क्रैश में जान गंवाने वाला महेश
एयर इंडिया का प्लेन क्रैश के बाद मेघानी नगर स्थित जिस हॉस्टल के ऊपर गिरा, वहां उसकी चपेट में आने से महेश की भी जान चली गई थी। हालांकि परिवारवालों को काफी समय बाद और 500 डीएनए जांच के बाद पुष्टि हो पाई कि मरने वालों में उनका बेटा महेश भी था। महेश जिरावाला के पिता गिरधर भाई बताते हैं कि प्लेन क्रैश के बाद हम अपने बेटे को ढूंढते रहे, लेकिन कुछ पता नहीं चल पाया। फिर अस्पताल से फोन आया कि मेरा डीएनए चाहिए...। मैंने कहा मैं कैसे दे दूं क्योंकि मेरा तो वहां था नहीं। मैंने बोला कि ले जाओ। मैंने प्रूफ मांगा तो पता लगा कि वह वही था।
वो दृश्य आज भी भूल नहीं पाते
स्टेशन ऑफिसर और अग्निशमन अधिकारी विष्णु भाई देसाई भी अहमदाबाद प्लेन क्रैश की घटना को याद कर भावुक हो जाते हैं। पीटीआई से बातचीत में उन्होंने कहा कि वो दृश्य कभी नहीं भूला जा सकता। हर तरफ धुआं और आग फैली हुई थी। हीट के कारण पास जाना भी मुश्किल हो रहा था। आस-पास के लोग मदद कर रहे थे और परेशान भी थे कि कोई बचा होगा या नहीं।
इसी तरह घटना के प्रत्यक्षदर्शी मयूर सोलंकी कहते हैं कि आज भी रोना आ जाता है, जब हम ही उस नजारे को नहीं देख पाए तो उस घटना में मारे गए लोगों के घरवालों का क्या हाल हुआ होगा? हमने अपना पूरा काम किया। मुझे आज भी याद है कि वहां तीन-चार साल का बच्चा था। उसे गोद में उठाया था मैंने... वो मंजर मैं आज भी भूल नहीं पाता।
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