'जो हुआ उसे बदल'… अहमदाबाद विमान हादसे में जिंदा बचे एकमात्र यात्री का छलका दर्द

By Mohit
लाइव हिन्दुस्तान, अहमदाबाद
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अहमदाबाद विमान हादसे में 242 यात्री में से एक शख्स जिंदा बच निकला था। हादसे के एक साल बाद भी शख्स की जिंदगी पर इसका असर है और वह उस मंजर को भूल नहीं पा रहे। एयर इंडिया टाटा की ओर से मुआवजा भी मिला मगर वे हादसे को लेकर आज भी कुछ सवालों के जवाब चाहते हैं।

'जो हुआ उसे बदल'… अहमदाबाद विमान हादसे में जिंदा बचे एकमात्र यात्री का छलका दर्द

बीते साल 12 जून को अहमदाबाद में एयर इंडिया का एक विमान (बोइंग 787 ड्रीमलाइनर प्लेन) टेक ऑफ के महज कुछ ही सेकेंड के बाद एक इमारत पर जा गिरा था जिसमें 260 लोगों की मौत हो गई थी। इस विमान में 53 ब्रिटिश, 7 पुर्तगाली और एक कनाडाई नागरिक समेत कुल 242 यात्री सवार थे। इमरात से टकराते ही विमान आग के गोले में तब्दील हो गया था। यह किसी चमत्कार से कम नहीं कि एक शख्स इस भयावह हादसे में जिंदा बच गया। जिंदा बचे शख्स का नाम विश्वास कुमार रमेश है जो कि एक ब्रिटिश नागरिक हैं।

उस हादसे को याद कर विश्वास आज भी रो पड़ते हैं और इसे किसी चमत्कार से कम नहीं मानते कि वे जिंदा बच निकले। इस हादसे में विश्वास ने अपने भाई को खो दिया और वे आज भी इस हादसे के पीछे क्या वजह थी इसका जवाब मांग रहे हैं। गार्डियन में प्रकाशित प्रेस एसोसिएशन की बातचीत में रमेश ने कहा, 'यह सब कैसे और क्यों हुआ आज भी लगातार अनसुलझे सवालों के साथ जी रहा हूं। मैं गहरे मानसिक घाव और अपने भाई को खोने के दुख से भी लगातार जूझ रहा हूं।'

क्या चाहते हैं विश्वास?

उन्होंने आगे बताया कि ‘मैं जानता हूं कि ये सावाल सिर्फ मेरे मन के भीतर ही नहीं बल्कि हर किसी पीड़ित परिवार के मन में भी हैं। लोगों को इस हादसे को लेकर ईमानदारी, पारदर्शिता और जवाबों की जरूरत है। जो हुआ उसे तो कोई नहीं बदल सकता लेकिन पीड़ित परिवारों को स्पष्ट जानकारी और सच्चाई पता लगनी चाहिए।’

फिशिंग बिजनेस भी प्रभावित

वहीं रमेश के प्रतिनिधि संजीव पटेल के मुताबिक, विश्वास का परिवार 1000 पाउंड (करीब 1 लाख रुपये) में गुजारा करने पर मजबूर है। एयर इंडिया टाटा की तरफ से उन्हें मुआवाज मिला था मगर ब्रिटिश सरकार की ओर से कोई खास मदद नहीं मिली। भाई की मौत के बाद से ही उनका फिशिंग बिजनेस भी प्रभावित हुआ है। विश्वास खुद शारीरिक परेशानियों का सामना कर रहे हैं और कार ड्राइव भी नहीं कर पा रहे हैं।'

प्लेन की 11A पर बैठे थे

आपको बता दें कि विश्वास प्लेन की 11A पर बैठे थे जबकि उनके भाई बगल वाली सीट पर बैठे थे। विमान से सुरक्षित बाहर निकलने के बाद उनके चेहरे पर जख्म थे और वे लंगड़ाते हुए चल रहे थे। उन्होंने इसके बाद बताया था कि टेकऑफ के महज 30 सेकेंड बाद ही विमान जबरदस्त आवाज के साथ क्रैश हो गया था। मुझे जब होश आया तो मेरे अगल-बगल में लाशें थी। चारों और विमान का मलबा बिखरा पड़ा था।

पीएम और गृह मंत्री ने की थी मुलाकात

विश्वास कुमार रमेश को इसके बाद अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। गृह मंत्री अमित शाह विश्वास से मिलने अस्पताल पहुंचे थे। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी विमान हादसे के एकमात्र जिंदा यात्री से मिलने पहुंचे थे।

आपको बता दें कि प्लेन जिस इमारत से टकराया, वहां बीजे मेडिकल कॉलेज एंड सिविल हॉस्पिटल के डॉक्टर्स रहते थे। विमान में सवार में 241 लोगों की मौत हुई थी जबकि बाकी मृतक इमारत और आस-पास मौजूद लोगों थे।

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