'मेरे भाई को ढूंढ लाओ, मैं इंतजार कर रहा हूं'; अहमदाबाद हादसे के 'इकलौते खुशनसीब' इंसान की दर्दभरी पुकार
Air India Plane Crash Anniversary: अहमदाबाद विमान हादसे में जिस तरह विश्वास कुमार रमेश जिंदा बच निकले, वह किसी चमत्कार से कम नहीं है। पूरी दुनिया उन्हें सबसे खुशनसीब इंसान मान रही है लेकिन इसके पीछ उनका दर्द और गहरा सन्नाटा एक अलग कहानी बयां कर रहा है।

Air India Plane Crash Anniversary: 12 जून। साल 2025 का वह काला दिन जिसे लोग याद कर आज भी सिहर जाते हैं। अहमदाबाद से दोपहर एक बजकर 33 मिनट पर उड़ान भरने वाला एयर इंडिया का विमान कुछ ही सेकेंड में मलबे के ढेर में तब्दील हो गया और 241 लोग इसमें दर्दनाक मौत हो गई। विमान अहमदाबाद एयरपोर्ट से उड़ान भरते ही मेघाणीनगर स्थित एक मेडिकल कॉलेज में क्रैश हो गया जिस वक्त ये हादसा हुआ, उस दौरान कॉलेज के कुछ छात्र कैंटीन में बैठकर दोपहर का खाना खा रहे थे। विमान में सवार लोगों के अलावा कई अन्य लोग भी इस हादसे की चपेट में आगए।
हादसा इतना भीषण था कई किलोमीटर दूर तक इसकी आवाज सुनाई दी। इलाका आग की लपटों और काले धुएं से भर गया। हालांकि इस हादसे के बीच पूरी दुनिया ने एक ऐसा नजारा भी देखा जो किसी चमत्कार से कम नहीं था। आग की लपटें, खौफनाक तबाही और चीखपुकार के बीच सिर्फ इकलौता शख्स ऐसा था जो इस हादसे में जिंदा बच गया। उनकी पहचान 40 साल के विश्वास कुमार रमेश के रूप में हुई है। वह केंद्र शासित प्रदेश के दीव के रहने वाले हैं और पिछले 20 सालों से लंदन में रह रहे हैं। हादसे के वक्त वह विमान में सीट नंबर 11A पर बैठे थे।
इतने खौकनाक हादेसे में कैसे जिंदा बचे विश्वास?
दर्दनाक हादसे को याद करते हुए उन्होंने बताया कि टेकऑफ के 30 सेकेंड बाद ही उन्हें एक जोरदार आवाज सुनाई दी और इसके बाद जब उनकी आंख खुली तो विमान से बाहर पड़े हुए थे। आसपास मलबा और लाशें देख वह डर गए और एक दम से खड़े हो गए और तब तक भागते रहे जब तक किसी ने उन्हें पकड़ नहीं लिया। बाद में पुलिस ने भी इस बात की पु्ष्टि की कि सीट नंबर 11A पर बैठा शख्स, इस हादसे में जिंदा बचा इकलौता शख्स था।
हादसे के दौरान रमेश के साथ उनके भाई भी विमान में मौजूद थे। वह खुद तो इस हादसे में जिंदा बच गए लेकिन अस्पताल के बेड पर लेटे हुए उनकी आंखे सिर्फ और सिर्फ अपने भाई को ढूंढ रही थीं। मन में सिर्फ एक ही उम्मीद थी कि जैसा चमत्कार उनके साथ हुआ था, वैसा ही कोई करिश्मा उनके भाई के साथ भी हुआ हो और वह सही सलामत हों। लेकिन जल्द ही उनकी ये उम्मीद टूट गई और रह गया तो बस जिंदगी भर का दर्द और गहरा सन्नाटा। हादसे में रमेश की आंख, छाती और पैरों पर चोट आई थी।
'मेरे भाई को ढूंढ दो, मैं यहीं इंतजार कर रहा हूं'
हिन्दुस्तान टाइम्स के एक रिपोर्टर उनसे मिलने गए तो अस्पताल के बेड पर बिना शर्ट सिर्फ शॉट्स पहने विश्वास आंखे बंद किए लेटे दिखाई दिए। थोड़ी बात करने के बाद जब रिपोर्टर ने दूसरे में कमरों में जाने की बात कही तो विश्वास एकदम से बोले, क्या आप मेरे भाई अजय कुमार रमेश का पता लगाएंगे। वो मेरे साथ ही थे। हम वापस यूके जा रहे थे। मुझे नहीं पता अब वो कहा है। प्लीज उन्हें ढूंढ दीजिए, मैं यहीं इंतजार कर रहा हूं। उनके मुंह से सिर्फ यही शब्द निकलते रहे कि मेरे भाई को ढूंढ दीजिए, मैं यही हूं। लेकिन जैसे ही पुलिस कमिश्नर ने इस बात की पुष्टि की कि विश्वास हादसे में जिंदा बचे इकलौते शख्स हैं, कोई उन्हें ये बात बताने की हिम्मत नहीं जुटा पाया।
लेखक के बारे में
Aditi Sharmaअदिति शर्मा
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