'एरोप्लेन बॉय' को आज भी एयर इंडिया हादसे का डर, कहा- उसके बाद किसी प्लेन का VIDEO नहीं बनाया
एक साल पहले हुए अहमदाबाद विमान हादसे का डर आज भी आर्यन को सता रहा है। हादसे से ठीक पहले विमान का आखिरी वीडियो बनाने वाले इस लड़के ने उस दिन से आज तक किसी भी विमान का वीडियो नहीं बनाया है। हादसे के बाद से वह 'एरोप्लेन बॉय' के नाम से मशहूर हो गया है।

गुजरात के अरावली जिले के एक दूरदराज गांव का स्कूली छात्र 18 साल के आर्यन असारी ने एक साल पहले तक कभी इतने पास से कोई हवाई जहाज नहीं देखा था। आज यह लड़का अपने गांव और आसपास के इलाकों में 'एरोप्लेन बॉय' के नाम से जाना जाता है। ऐसा एक वीडियो की वजह से हुआ। उसने उस एयर इंडिया फ्लाइट के आखिरी पल को अपने मोबाइल फोन से रिकॉर्ड किया था, जो पिछले साल 12 जून को अहमदाबाद में क्रैश हो गई थी। इस हादसे में 260 लोगों की मौत हो गई थी।
पहली बार अहमदाबाद गया था
इस हादसे का खौफ आज भी आर्यन के दिल-दिमाग से नहीं निकला है। उसका कहना है कि उस दिन के बाद से उसने किसी भी हवाई जहाज का वीडियो नहीं बनाया है और वह खुद भी हवाई जहाज में बैठने के लिए तैयार नहीं है। इस हादसे की पहली बरसी से पहले पीटीआई से बातचीत में आर्यन ने याद करते हुए कहा कि मैं पहली बार अहमदाबाद गया था और इतनी पास से एक प्लेन देखा। मैंने अपना मोबाइल फोन निकाला और रिकॉर्डिंग शुरू कर दी क्योंकि मैं इसे गांव में अपने दोस्तों को दिखाना चाहता था।
मैं बहुत डर गया था
अहमदाबाद के मेघानीनगर में एयरपोर्ट के पास अपने पिता के किराए के घर की छत पर खड़े आर्यन को कम ऊंचाई पर उड़ता हुआ प्लेन देखकर बहुत हैरानी हुई। उसने जो वीडियो बस यूं ही बनाई थी, वह जल्द ही उस हादसे की सबसे ज्यादा शेयर की जाने वाली वीडियो में से एक बन गया। आर्यन ने कहा कि अचानक प्लेन नीचे आने लगा और फिर क्रैश होने के बाद एक बड़े आग के गोले में बदल गया। मैं बहुत डर गया था। मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि मेरी आंखों के सामने ऐसा कुछ हो सकता है।
चश्मदीद गवाह बन गया
आर्यन क्रैश वाले दिन सुबह ही अहमदाबाद पहुंचा था। वह अपने पिता मगन असारी के साथ कुछ समय बिताना चाहता था। उसके पिता सेना से रिटायर होने के बाद मेट्रो स्टेशन पर सिक्योरिटी गार्ड का काम कर रहे थे। अहमदाबाद आने का उसका मकसद 12वीं क्लास में एडमिशन के बाद किताबें खरीदना भी था। लेकिन शहर पहुंचने के कुछ ही घंटों के अंदर वह भारत के सबसे भयानक हवाई हादसों में से एक का चश्मदीद गवाह बन गया। यह वीडियो सोशल मीडिया और टीवी चैनलों पर तेजी से फैल गया।
हमेशा के लिए बदल गई पहचान
वीडियो वायरल होने के बाद मीडिया वाले उसके पिता के किराए के घर पर पहुंचने लगे और आर्यन लगभग सभी टीवी चैनलों पर इंटरव्यू देता नजर आया। कुछ दिनों बाद वह अरावली जिले के मेघराज तालुका में अपने गांव लौट आया और अपनी पढ़ाई फिर से शुरू कर दी। बाद में उसने 12वीं क्लास की बोर्ड परीक्षा पास की और अब वह कॉलेज में एडमिशन लेने की कोशिश कर रहा है। हालांकि उसकी जिंदगी काफी हद तक सामान्य हो गई है, लेकिन उस इलाके में उसकी पहचान हमेशा के लिए बदल गई है। उन्होंने कहा कि जब मैं अपने गांव लौटा तो हर कोई वह वीडियो देखना चाहता था। मेरे दोस्तों ने मुझसे कहा कि मैं मशहूर हो गया हूं।
हवाई जहाज के अंदर बैठने की हिम्मत नहीं
आर्यन ने कहा कि हाल ही में मैं एक शादी में गया था। वहां कई लोग मेरे पास आकर पूछने लगे कि क्या तुम वही हवाई जहाज वाले लड़के हो? उस हादसे ने आर्यन के मन में कुछ डर भी बिठा दिया है। उसने कहा कि उस घटना के बाद मैंने अपने मोबाइल फोन से हवाई जहाजों की फिल्मिंग करना बंद कर दिया। अब मुझे डर लगता है कि अगर मैं किसी प्लेन का वीडियो रिकॉर्ड करूंगा तो वह भी क्रैश हो सकता है। गुजरात के ग्रामीण इलाकों के कई युवाओं की तरह आर्यन ने भी भविष्य में विदेश यात्रा करने का सपना देखा है, लेकिन हवाई जहाज में सफर करने का ख्याल ही उसे डरा देता है। उसने कहा कि मैं भविष्य में विदेश जाना चाहता हूं, लेकिन अभी मुझमें हवाई जहाज के अंदर बैठने की हिम्मत नहीं है।
लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
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