सूरत में भारी बारिश से हाहाकार, अबतक 17 लोगों की मौत; 8 हजार लोगों को निकाला गया, CM ने की 500 करोड़ देने की घोषणा
राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र के अनुसार, जिले के उमरपाड़ा तालुका में 24 घंटों में 16 मिमी बारिश हुई, जबकि चोरासी और मांडवी में 8-8 मिमी बारिश दर्ज की गई। अधिकारियों ने गुरुवार को बताया कि अब तक 3,648 लोगों को बचाया जा चुका है और 4,313 लोगों को शहर के निचले इलाकों से दूसरी जगहों पर भेजा गया है।
गुजरात के सूरत में बीते दिनों हुई भारी बारिश ने शहर में हाहाकार मचाकर रख दिया है। पानी आसमान से आफत की तरह बरसा और शहर के ज्यादातर इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बन गए। क्या रहवासी इलाके, क्या शॉपिंग कॉम्प्लेक्स सभी बारिश के कहर का शिकार बने और जलमग्न हो गए। इस दौरान भारी वर्षा की वजह से हुए हादसों में मरने वाले लोगों का आंकड़ा बढ़कर 17 तक पहुंच चुका है। इनमें से छह शव आज बरामद किए गए, जिसके बाद उनकी पहचान करने की कोशिश की जा रही है। इसके अलावा 3600 से ज्यादा लोगों को बचाया जा चुका है, साथ ही निचले इलाकों में रहने वाले 4,300 से ज्यादा लोगों को निकालकर सुरक्षित जगहों पर भेज दिया गया है। उधर शहर में लगातार बिगड़ रहे हालात के बीच मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने गुरुवार को स्थिति का जायजा लेने के लिए एक उच्चस्तरीय बैठक की और बाढ़ की समस्या से निपटने के लिए शहर को 500 करोड़ रुपए देने का ऐलान किया।
शहर में ये हालात मंगलवार-बुधवार के बीच हुई भारी बारिश के बाद देखने को मिले, जब 24 घंटे के अंदर 358 मिमी बारिश दर्ज की गई थी। भयानक बारिश के कारण कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बन गए और सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ था। जिसके बाद मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने आज शहर के बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया और अधिकारियों को क्रीक (संकरी खाड़ियों) के कारण शहर में बार-बार आने वाली बाढ़ की समस्या का स्थायी समाधान निकालने के निर्देश देते हुए इसके लिए 500 करोड़ रुपए देने का ऐलान किया।
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर दी जानकारी
इस बारे में जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री ने 'X' पर शेयर की एक पोस्ट में लिखा, 'सूरत में बार-बार आने वाली बाढ़ की स्थिति को रोकने के लिए, राज्य सरकार लंबी अवधि की योजना और क्रीक (छोटी जलधारा) के विकास के जरिए इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए 500 करोड़ रुपए आवंटित करेगी।' साथ ही उन्होंने बताया कि, 'अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वे यह सुनिश्चित करें कि प्रशासन के सभी विभाग अपने कर्तव्यों को प्रभावी ढंग से निभाने के लिए आपस में तालमेल बिठाएं और भविष्य की योजना के तहत क्रीक में बाढ़ को रोकने के लिए एक ठोस योजना तैयार करें।'
गुरुवार से उतरने लगा निचले इलाकों में भरा पानी
उधर गुरुवार को एक राहत भरी खबर यह आई कि बारिश रुकने के साथ ही निचले इलाकों में भरा बाढ़ का पानी भी धीरे-धीरे कम होने लगा है, जिससे हालात धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं। हालांकि पानी उतरने के साथ ही उसके द्वारा मचाई गई तबाही के निशान भी दिखाई देने लगे हैं। बाढ़ से हुए भारी नुकसान की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गई हैं। जैसे-जैसे बाढ़ का पानी कम होने लगा, लोगों को अपने घरों और कमरों से कीचड़ और गंदा पानी साफ करते देखा गया।
दुकानों में पानी घुसने से खराब हो गया वहां रखा सामान
शहर के वराछा इलाके में पोद्दार आर्केड की ग्राउंड-फ्लोर पर बनी दुकानें बाढ़ के पानी के घुसने से सबसे अधिक प्रभावित हुईं हैं और दुकानों में रखा सामान बुरी तरह खराब हो गया। वहां कई मोबाइल फोन व्यापारियों को बाढ़ के पानी से खराब हुए इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और एक्सेसरीज़ को फेंकते हुए देखा गया।
गुरुवार को मिले छह शव, पहचान की कोशिश जारी
भारी बारिश से हुए हादसों में मारे गए लोगों की जानकारी देते हुए सूरत के आपदा प्रबंधन विभाग के डिप्टी मामलतदार साजिद मेरुजय ने कहा, 'ग्यारह लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जिनमें से तीन ग्रामीण इलाकों में और आठ सूरत शहर में मारे गए। इसके अलावा, आज शहर से छह और शव बरामद किए गए हैं और उनकी पहचान तथा पोस्टमार्टम की प्रक्रिया चल रही है।'
कार समेत बहे दो भाइयों में से एक की बची जान, दूसरा लापता
उधर सूरत जोन-1 के DCP आलोक कुमार ने बारिश की वजह से हुई एक दुखद घटना की जानकारी देते हुए कहा कि, दो भाई अपनी कार समेत बह गए थे। उनमें से एक तो सुरक्षित है, लेकिन दूसरा लापता है। घटना में बहने वाले व्यक्ति की पहचान संदीप चोवटिया (27) के तौर पर हुई है।' अधिकारी ने बताया कि यह घटना 7 जुलाई को रात करीब 8 बजे लस्काना इलाके में हुई थी, जब वे बाढ़ के पानी के बीच से अपनी सेडान कार ले जाने की कोशिश कर रहे थे। इसी दौरान तेज बहाव में उनकी गाड़ी बह गई, हालांकि वे दोनों कार से बाहर निकल आए और उनमें से एक व्यक्ति पेड़ से चिपककर बच गया, जबकि दूसरा लापता हो गया।
क्रीक की वजह से हर साल बिगड़ते हैं सूरत के हालात
इससे पहले बुधवार सुबह खत्म हुए 24 घंटों के दौरान सूरत में 358 मिमी बारिश हुई, जिससे शहर के क्रीक (संकरी खाड़ियों) वाले इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बन गए थे। क्रीक नेटवर्क आपस में जुड़े हुए संकरे प्राकृतिक जलमार्ग या नाले होते हैं, जो अक्सर खारे दलदली क्षेत्रों और तटीय आर्द्रभूमियों में पाए जाते हैं। ये ज्वार-भाटे के कारण पानी से भरते और खाली होते रहते हैं। हालांकि, अब बारिश से कुछ राहत मिली है और गुरुवार सुबह तक शहर में सिर्फ 1 मिमी बारिश दर्ज की गई है।


