युवाओं का अजब-गजब ट्रेंड, बना रहे अपने Ex का AI क्लोन, ब्रेकअप से उबरने का नया तरीका

May 02, 2026 11:43 am ISTArpit Soni लाइव हिन्दुस्तान
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चीन में एक अलग ही ट्रेंड चल रहा है। यहां के युवा ब्रेकअप से उबरने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करके अपने पुराने पार्टनर्स (Ex) का डिजिटल वर्जन बना रहे हैं। हालांकि, इससे प्राइवेसी को लेकर चिंताएं एक बार फिर बढ़ गई हैं।

युवाओं का अजब-गजब ट्रेंड, बना रहे अपने Ex का AI क्लोन, ब्रेकअप से उबरने का नया तरीका

AI ने दुनिया के सोचने और काम करने के तरीके को बदल के रख दिया है। AI मुश्किल कामों को चुटकियों में निपटा सकता है और कोड लिख सकता है और पूरी कंपनी तक संभाल सकता है। हाल ही में एक खबर आई थी कि एक कंपनी ने अपने कर्मचारी का AI Clone बना लिया है, ताकि उसके इस्तीफा देने के बाद भी कंपनी का काम चलता रहे। एआई चैटबॉट्स से लोग अपने मन की बातें कर रहे हैं और सलाह ले रहे हैं, लेकिन अब चीन में एक अलग ही ट्रेंड चल पड़ा है। यहां के युवा ब्रेकअप से उबरने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करके अपने पुराने पार्टनर का डिजिटल वर्जन बना रहे हैं। ये AI "एक्स" (पुराने पार्टनर) बोलने के तरीके, पसंदीदा जुमलों और भावनात्मक लहजे की नकल करने के लिए डिजाइन किए गए हैं, जिससे यूजर्स एक वर्चुअल माहौल में अपने पुराने रिश्तों को फिर से जी पाते हैं।

दिल टूटने से निपटने का एक नया तरीका

हालांकि कई लोग इसे दिल टूटने से निपटने का एक नया तरीका मानते हैं, लेकिन इस ट्रेंड ने प्राइवेसी, भावनात्मक निर्भरता और रिश्तों में टेक्नोलॉजी की सीमाओं को लेकर चिंताएं खड़ी कर दी हैं। यूजर्स 'Ex-partner.skill' नाम के एक AI टूल पर चैट, सोशल मीडिया पोस्ट और फोटो अपलोड करके ये डिजिटल वर्जन बनाते हैं। फिर वे इसमें यात्राओं, आदतों और झगड़ों जैसी निजी यादें जोड़ते हैं, ताकि यह रेप्लिका ज्यादा असली लगे।

कैसे काम करती है टेक्नोलॉजी

यह AI एक जाने-पहचाने अंदाज में बातचीत कर सकता है, और कुछ यूजर्स ने तो इसे वीचैट जैसे ऐप्स से भी जोड़ दिया है। एक यूजर, @Bingtangcheng ने बताया कि उसने पूरी रात इस सिस्टम को ट्रेन करने में बिताई और यह देखकर हैरान रह गया कि उसकी एक्स-गर्लफ्रेंड वर्चुअल रूप में उसके सामने आ गई।

यह आइडिया 'Colleague.skill' से आया, जो शंघाई में Zhou Tianyi द्वारा बनाया गया एक ओपन-सोर्स प्रोजेक्ट था। इसका मूल उद्देश्य काम की जगह होने वाले बातचीत को दोबारा इस्तेमाल किए जा सकने वाले ज्ञान के साधनों में बदलना था, लेकिन बाद में इसे निजी इस्तेमाल के लिए अपना लिया गया। कुछ यूजर्स ने एलन मस्क और स्टीव्स जॉब्स जैसी जानी-मानी हस्तियों के AI वर्जन बनाकर भी प्रयोग किए।

भावनात्मक राहत या भावनात्मक जोखिम

समर्थकों का कहना है कि 'डिजिटल एक्स' (digital exes) लोगों को उन भावनाओं को व्यक्त करने में मदद करते हैं जिन्हें वे पहले शेयर नहीं कर पाते थे, और इससे उन्हें भावनात्मक रूप से मन की शांति मिलती है। हालांकि, आलोचकों ने चेतावनी दी है कि इससे भावनात्मक निर्भरता बढ़ सकती है, या यहां तक कि नए रिश्तों पर भी इसका बुरा असर पड़ सकता है। गुआंगडोंग की एक विवाह सलाहकार, वानकिउ ने कहा कि अपने पूर्व साथी को याद करना एक स्वाभाविक बात है, लेकिन ऐसे साधनों का अत्यधिक उपयोग वास्तविक रिश्तों को नुकसान पहुंचा सकता है।

प्राइवेसी से जुड़ी चिंताए बढ़ रही हैं

प्राइवेसी एक और अहम चिंता का विषय है। गुआंगडोंग के एक वकील, झोंग ने चेतावनी दी कि किसी पूर्व साथी के डेटा का इस्तेमाल उसकी सहमति के बिना करना, निजी जानकारी से जुड़े कानूनों का उल्लंघन हो सकता है।

लोगों का रिएक्शन

यह ट्रेंड दिखाता है कि टेक्नोलॉजी किस तरह हमारी भावनात्मक अनुभवों को नया रूप दे रही है। जैसे-जैसे AI आगे ​​बढ़ रहा है, यह डिजिटल युग में लोगों के नुकसान, यादों और रिश्तों को समझने के तरीके को भी बदल रहा है। एक यूजर ने लिखा, "इस दौर में, हमें टेक्नोलॉजी की तरक्की से पैदा हुई नैतिक चुनौतियों का सामना करना ही पड़ता है। लेकिन इंसान की अहमियत उसकी उपयोगिता में नहीं है; बल्कि यह तो खुद उसके विकास की प्रक्रिया में निहित है।" एक अन्य व्यक्ति ने कहा, "जिंदगी में हम जो निराशा, उलझन, खुशी और गुस्सा महसूस करते हैं, उसे डिजिटाइज नहीं किया जा सकता। यही इंसानियत का वह अनमोल सार है, जिसकी जगह कोई और नहीं ले सकता।"

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लेखक के बारे में

Arpit Soni

अर्पित सोनी को शुरुआत से ही नए-नए गैजेट्स को एक्सप्लोर करने और उन्हें आजमाने का शौक रहा है। अब अर्पित ने अपनी इस हॉबी को ही अपना पेशा बना लिया है। भोपाल के रहने वाले अर्पित को नए-नए गैजेट्स का रिव्यू करना और उनके बारे में लिखना काफी पसंद है। टेक्नोलॉजी, रोबोट्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इनसे जुड़ी खबरें लिखना भी इन्हें काफी भाता है। लाइव हिन्दुस्तान में अर्पित पिछले चार साल से बतौर सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर काम कर रहे हैं। मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें करीब 9 साल का अनुभव है। अर्पित ने मीडिया जगत में शुरुआत एक रीजनल चैनल से की थी। इससे बाद उन्होंने नवभारत टाइम्स और दैनिक भास्कर की गैजेट्स बीट में काम किया। अर्पित की स्कूलिंग भोपाल से हुई है। उन्होंने कंप्यूटर साइंस से इंजीनियरिंग की है। मीडिया में झुकाव के चलते उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU) से पोस्ट ग्रेजुएशन करके मीडिया जगत में एंट्री की। मीडिया में इन्हें आठ साल से ज्यादा समय हो चुके हैं और सफर अभी जारी है। गैजेट्स के अलावा, इन्हें नई-नई जगहों पर घूमना और उनके बारे में जानने का भी बहुत शौक है।

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