
WhatsApp के गलत इस्तेमाल को लेकर सरकार परेशान; बैन ना हो जाए आपका अकाउंट?
WhatsApp हर महीने करीब 1 करोड़ भारतीय अकाउंट बैन कर रहा है, लेकिन सरकार को पूरी जानकारी शेयर ना किए जाने पर चिंता है। सरकार चाहती है कि बैन किए गए नंबरों की लिस्ट मिले, जिससे अन्य प्लेटफॉर्म्स पर हो रहे स्कैम्स पर भी लगाम लगाई जा सके।
भारत में WhatsApp अकाउंट्स के बढ़ते गलत इस्तेमाल को लेकर केंद्र सरकार की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। Meta की ओनरशिप वाला यह मेसेजिंग प्लेटफॉर्म हर महीने करीब 98 लाख से 1 करोड़ भारतीय अकाउंट्स को बैन कर रहा है। इन बैन का मकसद ऑनलाइन फ्रॉड, स्पैम और बाकी अवैध गतिविधियों पर रोक लगाना है, लेकिन सरकार का कहना है कि ट्रांसपैरेंसी और सहयोग की कमी इस पूरी प्रक्रिया को कमजोर कर रही है।
इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर तक WhatsApp हर महीने औसतन 98 लाख भारतीय अकाउंट्स को ब्लॉक कर चुका है। ये अकाउंट्स कंपनी की टर्म्स ऑफ सर्विस का उल्लंघन करने, स्कैम और स्पैम ऐक्टिविटीज में शामिल पाए गए थे।
हालांकि, सरकारी अधिकारियों का कहना है कि WhatsApp से बैन होने के बाद भी यही नंबर Telegram जैसे दूसरे ऐप्स पर ऐक्टिव हो जाते हैं और वहीं से फ्रॉड का सिलसिला जारी रहता है। खास बात यह है कि भारतीय मोबाइल नंबर्स का इस्तेमाल देश के अंदर और बाहर, दोनों जगह इन फ्रॉड ऐक्टिविटीज में हो रहा है।
जानकारी की कमी सबसे बड़ी चुनौती
सरकार के सामने सबसे बड़ी दिक्कत WhatsApp की जानकारी शेयर ना करने की पॉलिसी है। WhatsApp हर महीने एक ट्रांसपेरेंसी रिपोर्ट रिलीज करता है, जिसमें केवल यह बताया जाता है कि कितने अकाउंट्स बैन किए गए, लेकिन किन नंबरों को बैन किया गया, इसकी कोई जानकारी नहीं दी जाती।
अधिकारी साफ कर चुके हैं कि वे पर्सनल डाटा या चैट कंटेंट नहीं मांग रहे, बल्कि सिर्फ बैन किए गए मोबाइल नंबर्स की जरूरत है ताकि उन्हें अन्य फ्रॉड केस और प्लेटफॉर्म्स से जोड़ा जा सके।
स्कैम, फ्रॉड और OTT ऐप्स का मिसयूज
रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 90 प्रतिशत डिजिटल इम्पर्सोनेशन फ्रॉड WhatsApp के जरिए किए जाते हैं। स्कैमर्स इन प्लेटफॉर्म्स का फायदा इसलिए उठाते हैं क्योंकि एक बार अकाउंट रजिस्टर हो जाने के बाद ऐक्टिव SIM कार्ड की जरूरत नहीं होती। सरकार का मानना है कि अगर SIM इशू करने की प्रक्रिया, KYC डीटेल्स और अकाउंट क्रिएशन पैटर्न को बेहतर ढंग से ट्रैक किया जाए, तो इन अपराधों पर काफी हद तक लगाम लगाई जा सकती है।
बता दें, सरकार ने WhatsApp और अन्य OTT प्लेटफॉर्म्स से अपील की है कि वे बैन किए गए अकाउंट्स का डीटेल्ड ब्रेक-अप साझा करें, जिससे उन पर आगे की कानूनी कार्रवाई हो सके। इसके अलावा, नवंबर तक सरकार के कहने पर 29 लाख WhatsApp प्रोफाइल और ग्रुप्स को अवैध गतिविधियों से जुड़े होने के चलते हटाया भी गया है।

लेखक के बारे में
Pranesh Tiwariप्राणेश तिवारी पिछले चार साल से लाइव हिन्दुस्तान में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर टेक्नोलॉजी सेक्शन का हिस्सा हैं। खुद को दिल से लेखक और पेशे से पत्रकार मानने वाले प्राणेश, आठ साल से ज्यादा वक्त से साइंस और टेक्नोलॉजी की दुनिया को शब्दों में ढाल रहे हैं। गैजेट्स इनसाइट्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) उनकी एक्सपर्टीज हैं, जहां वह मुश्किल टेक्नोलॉजी को सरल और असरदार भाषा में पाठकों तक पहुंचाते हैं। लेटेस्ट गैजेट्स रिव्यू करना और नए ऐप्स पर वक्त बिताना उन्हें जॉब का पसंदीदा हिस्सा लगता है।
करियर की शुरुआत नवभारत टाइम्स ऑनलाइन से करने वाले प्राणेश ने न्यूजबाइट्स में सीनियर टेक जर्नलिस्ट के रूप में भी भूमिका निभाई। लॉकडाउन में 'सिर्फ दोस्त: नए जमाने की प्रेम कहानियां' लघुकथा संग्रह भी लिखा। IIMC, नई दिल्ली में PTI अवॉर्ड से सम्मानित प्राणेश ने स्मार्टफोन, AI, कंज्यूमर टेक और डिजिटल इनोवेशन जैसे विषयों पर गहराई से तथ्यात्मक रिपोर्टिंग की है। काम के अलावा उन्हें लिखना और सफर करना पसंद है, दोनों ही उनके लिए दुनिया को समझने और कहानियों में बदलने का जरिया हैं।
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