AI इस्तेमाल करने वालों के लिए चेतावनी! AI आपके दिमाग को कर रहा कमजोर, सोचने की ताकत हो रही कम, नई स्टडी में बड़ा दावा
AI से जुड़ी एक नई स्टडी में दावा किया गया है कि सिर्फ 10 से 15 मिनट तक AI चैटबॉट इस्तेमाल करने से लोगों की सोचने-समझने और समस्या सुलझाने की क्षमता कमजोर हो सकती है। AI को सिर्फ मदद के लिए इस्तेमाल किया जाए और खुद सोचने की आदत बरकरार रखी जाए।

आज Artificial Intelligence (AI) लोगों की जिंदगी का बड़ा हिस्सा बन चुका है। स्कूल का होमवर्क हो, ऑफिस का काम हो या किसी सवाल का जवाब ढूंढना हो, लोग तेजी से ChatGPT, Gemini, Grok और कई दूसरे AI टूल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। लेकिन अब AI को लेकर एक नई रिसर्च ने चिंता बढ़ा दी है। एक नई स्टडी में दावा किया गया है कि अगर लोग सिर्फ 10 से 15 मिनट तक भी AI चैटबॉट्स का इस्तेमाल करते हैं, तो उनकी खुद से सोचने और समस्या हल करने की क्षमता कमजोर पड़ सकती है। यह रिसर्च MIT, Carnegie Mellon, Oxford और UCLA जैसे बड़े संस्थानों के रिसर्चर्स ने मिलकर की है। रिसर्च के मुताबिक AI तुरंत जवाब देकर लोगों का काम आसान जरूर बनाता है, लेकिन धीरे-धीरे इंसान का दिमाग कम मेहनत करने लगता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि जब लोग हर छोटी-बड़ी चीज के लिए AI पर निर्भर होने लगते हैं, तो उनका दिमाग खुद से सोचने और नई चीजें सीखने में कम सक्रिय हो जाता है। यही वजह है कि अब एक्सपर्ट्स AI के संतुलित इस्तेमाल की सलाह दे रहे हैं।
AI कैसे बना रहा इंसान को ‘मेंटली लेजी’
एक्सपर्ट्स के मुताबिक जब इंसान खुद सोचने की बजाय हर जवाब AI से लेने लगता है, तो उसका दिमाग धीरे-धीरे कम मेहनत करने लगता है। जैसे लंबे समय तक एक्सरसाइज न करने से शरीर कमजोर पड़ जाता है, वैसे ही दिमाग का इस्तेमाल कम होने पर सोचने और समझने की क्षमता भी प्रभावित हो सकती है। रिपोर्ट में Cognitive Laziness और Cognitive Debt जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया है। इसका मतलब है कि AI पर जरूरत से ज्यादा निर्भरता इंसान की मानसिक क्षमता को धीरे-धीरे कमजोर कर सकती है।
रिसर्चर्स का मानना है कि अगर AI सिर्फ जवाब देने की बजाय लोगों को सोचने और सीखने के लिए प्रेरित करे, तो इसका नुकसान कम हो सकता है। रिसर्चर्स ने यह भी कहा कि छात्रों और युवाओं में AI पर बढ़ती निर्भरता भविष्य में उनकी समस्या सुलझाने की क्षमता को प्रभावित कर सकती है। अगर छात्र हर सवाल का जवाब AI से लेने लगेंगे, तो उनकी खुद से सोचने और सीखने की आदत कमजोर हो सकती है। इससे क्रिएटिविटी और लॉजिक बनाने की क्षमता भी प्रभावित हो सकती है। ऐसे में AI का सबसे ज्यादा असर बच्चों और छात्रों पर पड़ सकता है।
AI टूल्स क्यों हो रहे पॉपुलर
आज AI टूल्स लोगों को असाइनमेंट बनाने, ईमेल लिखने और रिपोर्ट तैयार करने में मदद कर रहे हैं। इसके अलावा AI टूल्स कुछ सेकंड में जवाब दे देते हैं, जिससे लोगों को मेहनत कम करनी पड़ती है। यही कारण है कि दुनिया भर में AI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। हालांकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि AI को मदद के तौर पर इस्तेमाल करना ठीक है, लेकिन पूरी तरह उसी पर निर्भर हो जाना खतरनाक हो सकता है।
हर सवाल का जवाब सीधे AI से लेने की बजाय पहले खुद सोचने की कोशिश करें। पढ़ाई और ऑफिस के काम में AI को सिर्फ मदद के लिए इस्तेमाल करें। इसके अलावा नई चीजें सीखने, किताबें पढ़ने और खुद रिसर्च करने की आदत बनाए रखें। इससे दिमाग एक्टिव रहेगा और सोचने की क्षमता मजबूत बनी रहेगी।
लेखक के बारे में
Himani Guptaहिमानी गुप्ता लाइव हिन्दुस्तान में गैजेट्स सेक्शन से जुड़ी हुई हैं और 2020 से इस संस्थान का हिस्सा हैं। मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें करीब 12 साल का अनुभव है। इससे पहले वह नेटवर्क 18 में गैजेट्स और बिजनेस सेक्शन देखती रही हैं, जहां बेहतरीन प्रदर्शन के लिए उन्हें दो बार बेस्ट परफॉर्मर ऑफ द मंथ अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। नेटवर्क 18 से पहले भी हिमानी ने कई अन्य मीडिया संस्थानों में काम किया है। हिमानी स्मार्टफोन, कंज्यूमर गैजेट्स और AI से जुड़ी खबरों और फीचर्स पर लिखती हैं। लेटेस्ट गैजेट्स को एक्सप्लोर करना, उनकी टेस्टिंग करना और नए ऐप्स पर काम करना उनके काम का अहम हिस्सा है।
शिक्षा के क्षेत्र में हिमानी ने आईपी यूनिवर्सिटी से एमजेएमसी (MJMC) की पढ़ाई की है। इसके अलावा उन्होंने डिजिटल विद्या (Digital Vidya) से सोशल मीडिया मार्केटिंग का कोर्स भी किया है। एडिटोरियल के अलावा, हिमानी को गूगल एनालिटिक्स और सोशल मीडिया की भी काफी जानकारी है और बतौर सोशल मीडिया मैनेजर भी काम कर चुकी हैं। काम के अलावा उन्हें टेक ट्रेंड्स को समझना और उन्हें कहानियों में ढालना पसंद है, ताकि पाठक बदलती डिजिटल दुनिया से हमेशा अपडेट रह सकें।
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