वैलेंटाइंस डे पर बढ़ते ऑनलाइन स्कैम: प्यार के नाम पर जेब खाली करने की ट्रिक; हो जाओ अलर्ट
वैलेंटाइंस डे पर रोमांस स्कैम, फेक गिफ्ट लिंक और फेक शॉपिंग ऑफर के साथ साइबर अटैकर्स लोगों को निशाना बना रहे हैं। अलर्ट रहकर, अनजान लिंक और OTP से बचकर ही आप प्यार के इस दिन को सुरक्षित बना सकते हैं।

वैलेंटाइंस डे प्यार और जश्न का दिन माना जाता है लेकिन पिछले कुछ सालों में यह साइबर अटैकर्स के लिए भी बड़े ‘मौके का दिन’ बन गया है। वैलेंटाइंस वीक में कई लोग गिफ्ट, डेटिंग ऐप्स और ऑनलाइन शॉपिंग का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं, यही वजह है कि स्कैमर्स भी नए-नए तरीके निकाल रहे हैं। ऐसे में कई बार लोग झूठे प्यार के भरोसे में और लापरवाही के चलते अपनी मेहनत की कमाई से हाथ धो बैठते हैं।
सबसे ज्यादा होते हैं रोमांस स्कैम
सबसे आम फ्रॉड रोमांस स्कैम के नाम से किए जाते हैं। इसमें अटैकर्स सोशल मीडिया या डेटिंग ऐप्स पर फेक प्रोफाइल बनाते हैं। वे पहले दोस्ती करते हैं, फिर इमोशनल कनेक्ट बढ़ाते हैं और कुछ ही दिनों में प्यार का इजहार करने लगते हैं। जब भरोसा हो जाता है तो वे अचानक किसी इमरजेंसी, गिफ्ट, टिकट या मेडिकल नीड का हवाला देकर पैसे मांगते हैं। ऐसे स्कैम्स के साथ कई मामलों में लोग लाखों रुपये तक गंवा चुके हैं।
फेक गिफ्ट डिलिवरी स्कैम्स भी
वैलेंटाइंस वीक में फेक गिफ्ट और डिलीवरी स्कैम भी तेजी से बढ़ते हैं। लोगों को मेसेज या ई-मेल मिलता है कि ‘आपके लिए एक सरप्राइज गिफ्ट आया है’ या ‘डिलीवरी चार्ज पेंडिंग है’। लिंक पर क्लिक करते ही विक्टिम से बैंक डीटेल्स, कार्ड नंबर या OTP मांगा जाता है। जैसे ही जानकारी दी जाती है, अकाउंट से पैसे गायब हो जाते हैं क्योंकि असल में ऐसा कोई गिफ्ट होता ही नहीं।
फर्जी डिस्काउंट ऑफर्स से बचें
फेक शॉपिंग वेबसाइट्स और भारी डिस्काउंट ऑफर भी वैलेंटाइंस डे में बड़ा जाल हैं। सोशल मीडिया पर अट्रैक्टिव ऐड दिखते हैं, जैसे कोई महंगे गिफ्ट्स आधी कीमत पर मिल रहे हैं। लोग जल्दी में ऑर्डर कर देते हैं लेकिन या तो सामान कभी पहुंचता नहीं या बेहद घटिया क्वॉलिटी का मिलता है। कई बार ये फेक वेबसाइट कुछ दिनों बाद गायब हो जाती है।
ई-कार्ड्स और फिशिंग ईमेल्स
फिशिंग ई-मेल और ई-कार्ड स्कैम भी आम हैं। ‘Someone sent you a Valentine card’ जैसे सबजेक्ट वाले ईमेल लोगों को फंसाते हैं। लिंक पर क्लिक करने से मोबाइल या लैपटॉप में मालवेयर इंस्टॉल हो सकता है या फिर नकली वेबसाइट पर लॉगिन डीटेल्स चोरी हो सकते हैं। ऐसे में केवल एक क्लिक आपकी पर्सनल जानकारी खतरे में डाल सकता है।
AI और डीपफेक से जुड़े स्कैम
अब स्कैमर्स AI और डीपफेक टेक्नोलॉजी का भी इस्तेमाल कर रहे हैं। वे प्रोफाइल फोटो और वीडियो कॉल्स को इतना असली बना देते हैं कि पहचानना मुश्किल हो जाता है। सामने वाला यूजर असली लगता है लेकिन असल में वह AI के जरिए बनाया गया नकली चेहरा हो सकता है। इस तरह भरोसा और जल्दी बनता है और धोखा भी उतना ही बड़ा होता है।
इन बातों का ध्यान रखना है जरूरी
वैलेंटाइंस स्कैम्स से बचने के लिए अलर्ट रहना जरूरी है। किसी अंजान व्यक्ति को कभी पैसे ना भेजें, चाहे वह कितना ही क्लोज क्यों ना आ गया हो। अनजान लिंक पर क्लिक ना करें और किसी भी कीमत पर अपना OTP शेयर ना करें। ऑनलाइन शॉपिंग हमेशा भरोसेमंद और आधिकारिक वेबसाइट से ही करें। अगर किसी ऑफर पर शक हो, तो पहले उसकी जांच जरूर करें।

लेखक के बारे में
Pranesh Tiwariप्राणेश तिवारी पिछले चार साल से लाइव हिन्दुस्तान में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर टेक्नोलॉजी सेक्शन का हिस्सा हैं। खुद को दिल से लेखक और पेशे से पत्रकार मानने वाले प्राणेश, आठ साल से ज्यादा वक्त से साइंस और टेक्नोलॉजी की दुनिया को शब्दों में ढाल रहे हैं। गैजेट्स इनसाइट्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) उनकी एक्सपर्टीज हैं, जहां वह मुश्किल टेक्नोलॉजी को सरल और असरदार भाषा में पाठकों तक पहुंचाते हैं। लेटेस्ट गैजेट्स रिव्यू करना और नए ऐप्स पर वक्त बिताना उन्हें जॉब का पसंदीदा हिस्सा लगता है।
करियर की शुरुआत नवभारत टाइम्स ऑनलाइन से करने वाले प्राणेश ने न्यूजबाइट्स में सीनियर टेक जर्नलिस्ट के रूप में भी भूमिका निभाई। लॉकडाउन में 'सिर्फ दोस्त: नए जमाने की प्रेम कहानियां' लघुकथा संग्रह भी लिखा। IIMC, नई दिल्ली में PTI अवॉर्ड से सम्मानित प्राणेश ने स्मार्टफोन, AI, कंज्यूमर टेक और डिजिटल इनोवेशन जैसे विषयों पर गहराई से तथ्यात्मक रिपोर्टिंग की है। काम के अलावा उन्हें लिखना और सफर करना पसंद है, दोनों ही उनके लिए दुनिया को समझने और कहानियों में बदलने का जरिया हैं।
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