AI ने तय किए हमले के टारगेट! अमेरिका-ईरान युद्ध में सामने आई चौंकाने वाली सच्चाई

Mar 02, 2026 09:40 pm ISTPranesh Tiwari लाइव हिन्दुस्तान
share Share
Follow Us on

अमेरिकी सैन्य ऑपरेशन में ईरान के खिलाफ AI टूल का इस्तेमाल किया गया है। इसने दिखा दिया है कि आधुनिक युद्ध भी अब डाटा और एल्गोरिद्म पर निर्भर होते जा रहे हैं।

AI ने तय किए हमले के टारगेट! अमेरिका-ईरान युद्ध में सामने आई चौंकाने वाली सच्चाई

अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध की स्थिति बनी हुई है और बीते दिनों ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई अमेरिकी हमले में मारे गए। सामने आया है कि अमेरिका ने इन हमलों के लिए आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल्स की मदद भी ली, जो दिखाता है कि अब लड़ाइयां सिर्फ हथियारों, सैनिकों और मिसाइलों के दम पर नहीं लड़ी जा रही हैं, बल्कि AI आधुनिक डिफेंस स्ट्रेटजी का अहम हिस्सा बन चुका है।

हाल ही में सामने आई The Guardian की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने ईरान पर किए गए सैन्य हमले के दौरान Anthropic के AI मॉडल Claude का इस्तेमाल किया। खास बात यह रही कि यह इस्तेमाल उस समय हुआ, जब कुछ घंटे पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सरकारी एजेंसियों को इस AI टूल से सभी संबंध खत्म करने का आदेश दिया था। इस घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया कि आज AI सिर्फ कोई सुविधा नहीं है, बल्कि गंभीर फैसले लेने की प्रक्रिया में भी शामिल हो चुका है।

युद्ध में AI कर सकता है ये महत्वपूर्ण काम

रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी सैन्य कमान ने Claude AI का उपयोग तीन बड़े कामों में किया।

1. इंटेलिजेंस एनालिसिस (खुफिया जानकारी का विश्लेषण)

हजारों सैटेलाइट इमेज, ड्रोन डेटा और निगरानी रिपोर्ट्स को इंसान घंटों या दिनों में समझता। AI इन्हें मिनटों में प्रोसेस कर संभावित खतरे आसानी से और फटाफट पहचान सकता है।

2. टारगेट सेलेक्शन (हमले के लक्ष्य चुनना)

AI यह अनुमान लगाने में मदद करता है कि कौन-सा ठिकाना सैन्य रूप से महत्वपूर्ण है और किस पर हमला रणनीतिक रूप से ज्यादा प्रभावशाली होगा।

3. बैटलफील्ड सिमुलेशन

हमला करने से पहले AI हजारों संभावित परिणामों और परिस्थितियों का डिजिटल सिमुलेशन बनाता है। जैसे- जवाबी हमला, नागरिकों को पहुंचने वाला नुकसान या मिशन सफलता की संभावना, सब देखी जा सकती है।

मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण बन गया है क्योंकि AI कंपनी Anthropic ने पहले ही स्पष्ट किया था कि उसके मॉडल का इस्तेमाल हिंसक गतिविधियों या हथियार संबंधी उद्देश्यों के लिए नहीं किया जाना चाहिए। इसी मुद्दे को लेकर अमेरिकी सरकार और कंपनी के बीच विवाद बढ़ गया। बावजूद इसके, सैन्य सिस्टम से AI को तुरंत हटाना संभव नहीं था, क्योंकि यह तकनीक पहले से कई ऑपरेशनल नेटवर्क में शामिल हो चुकी थी।

यही वजह रही कि AI सेवाओं को पूरी तरह बंद करने के बजाय ट्रांजिशन पीरियड देने की बात सामने आई। इसी पीरियड के दौरान ईरान को निशाना बनाया गया है। इसके साथ ही सवाल भी उठ रहे हैं कि शक्तिशाली होती टेक्नोलॉजी पर कितना भरोसा किया जाना चाहिए और कितना नहीं।

Pranesh Tiwari

लेखक के बारे में

Pranesh Tiwari

प्राणेश तिवारी पिछले चार साल से लाइव हिन्दुस्तान में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर टेक्नोलॉजी सेक्शन का हिस्सा हैं। खुद को दिल से लेखक और पेशे से पत्रकार मानने वाले प्राणेश, आठ साल से ज्यादा वक्त से साइंस और टेक्नोलॉजी की दुनिया को शब्दों में ढाल रहे हैं। गैजेट्स इनसाइट्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) उनकी एक्सपर्टीज हैं, जहां वह मुश्किल टेक्नोलॉजी को सरल और असरदार भाषा में पाठकों तक पहुंचाते हैं। लेटेस्ट गैजेट्स रिव्यू करना और नए ऐप्स पर वक्त बिताना उन्हें जॉब का पसंदीदा हिस्सा लगता है।
करियर की शुरुआत नवभारत टाइम्स ऑनलाइन से करने वाले प्राणेश ने न्यूजबाइट्स में सीनियर टेक जर्नलिस्ट के रूप में भी भूमिका निभाई। लॉकडाउन में 'सिर्फ दोस्त: नए जमाने की प्रेम कहानियां' लघुकथा संग्रह भी लिखा। IIMC, नई दिल्ली में PTI अवॉर्ड से सम्मानित प्राणेश ने स्मार्टफोन, AI, कंज्यूमर टेक और डिजिटल इनोवेशन जैसे विषयों पर गहराई से तथ्यात्मक रिपोर्टिंग की है। काम के अलावा उन्हें लिखना और सफर करना पसंद है, दोनों ही उनके लिए दुनिया को समझने और कहानियों में बदलने का जरिया हैं।

और पढ़ें

लेटेस्ट   Hindi News ,    बॉलीवुड न्यूज,   बिजनेस न्यूज,   टेक ,   ऑटो,   करियर , और   राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।