चार्जर से पावर बैंक तक: UNIX भारत में बना रही है अपने ढेरों प्रोडक्ट; को-फाउंडर से खास चर्चा
कभी चीन से मोबाइल एक्सेसरीज इंपोर्ट करने वाली UNIX आज भारत में चार्जर, डाटा केबल, पावर बैंक और मोबाइल कवर जैसे कई प्रोडक्ट्स खुद मैन्युफैक्चर कर रही है। हमने कंपनी को-फाउंडर इमरान कागलवाला से इस बारे में विस्तार से बात की।

भारत में मोबाइल एक्सेसरीज का मार्केट लंबे समय तक चीनी कंपनियों और सस्ते इंपोर्टेड प्रोडक्ट्स के भरोसे चलता रहा है। ऐसे माहौल में किसी भारतीय ब्रैंड का ना सिर्फ टिकना, बल्कि अपने दम पर एक मजबूत पहचान बनाना आसान नहीं होता। लोकप्रिय एक्सेसरीज ब्रैंड UNIX की कहानी इसी चुनौती को अवसर में बदलने की मिसाल पेश करती है। एक छोटी सी दुकान से शुरू हुआ यह सफर आज 700 से अधिक कर्मचारियों वाली मैन्युफैक्चरिंग कंपनी तक पहुंच चुका है। मार्केट में आए बदलावों और कंपनी के सफर को समझने के लिए लाइव हिन्दुस्तान ने UNIX के को-फाउंडर और CEO इमरान कागलवाला से बात की।
कागलवाला बताते हैं कि कंपनी की शुरुआत साल 2006 में बेहद सिंपल तरीके से हुई थी। उस समय वे एक छोटी सी दुकान से चीन से इंपोर्टेड अनब्रांडेड मोबाइल एक्सेसरीज बेचते थे क्योंकि मार्केट में उन्हीं की डिमांड ज्यादा थी। शुरुआती छह से आठ महीनों के अनुभव के बाद उन्हें महसूस हुआ कि केवल दूसरे ब्रैंड्स के प्रोडक्ट्स बेचने के बजाय खुद का ब्रैंड खड़ा करना ज्यादा बेहतर होगा। इसी सोच के साथ UNIX ब्रांड की नींव रखी गई और सबसे पहले चार्जर्स के साथ इसकी शुरुआत हुई।
गुजरात में शुरू की गई मैन्युफैक्चरिंग
कंपनी ने शुरुआती वर्षों में इंपोर्ट पर निर्भर रहते हुए कारोबार आगे बढ़ाया, लेकिन साल 2013 में एक बड़ा फैसला लिया गया। गुजरात के उमरगाम में कंपनी ने अपनी पहली फैक्ट्री बनाई और चार्जर्स का प्रोडक्शन शुरू किया। इमरान के मुताबिक, उस समय बदलते सरकारी नियमों और इंपोर्ट से जुड़ी चुनौतियों ने उन्हें भारत में लोकल मैन्युफैक्चरिंग की दिशा में कदम बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। यही फैसला आगे चलकर कंपनी की सबसे बड़ी ताकतों में से एक बन गया।
इमरान ने बताया कि कंपनी के मौजूदा प्रोडक्ट पोर्टफोलियो में से पावर बैंक और चार्जिंग सॉल्यूशंस अब पूरी तरह भारत में बनाए जा रहे हैं। आज करीब 70 प्रतिशत प्रोडक्ट्स की देश में ही मैन्युफैक्चरिंग की जा रही है और जल्द ही इस आंकड़े को और बढ़ाया जाएगा।
बड़ा है कंपनी का प्रोडक्ट पोर्टफोलियो
आज UNIX चार्जर्स, डाटा केबल, पावर बैंक, नेकबैंड, ईयरफोन, मोबाइल कवर और अन्य मोबाइल एक्सेसरीज ऑफर कर रही है। इमरान का कहना है कि उसके चार्जर्स, डाटा केबल, पावर बैंक और मोबाइल कवर पूरी तरह भारत में बनाए जाते हैं। इतना ही नहीं, कंपनी अपने कई उत्पादों के लिए डिजाइन, मोल्डिंग, PCB निर्माण, असेंबली और क्वॉलिटी कंट्रोल तक का काम खुद करती है। इससे ना सिर्फ क्वॉलिटी पर पूरा कंट्रोल मिलता है, बल्कि मार्केट की डिमांड के हिसाब से तेजी से नए प्रोडक्ट्स भी तैयार किए जा सकते हैं।
इस स्ट्रेटजी पर रहा कंपनी का फोकस
UNIX की सफलता की एक बड़ी वजह उसकी क्लियर मार्केट स्ट्रेटजी भी है। जहां कई कंपनियां प्रीमियम ग्राहकों को टारगेट करती हैं, वहीं UNIX ने टियर-2 और टियर-3 सिटीज पर फोकस किया। कंपनी का मानना है कि भारत का बड़ा कस्टमर-बेस ऐसे प्रोडक्ट्स चाहता है जो अफॉर्डेबल होने के साथ-साथ भरोसेमंद भी हों। इसी वजह से कंपनी ने खुद को Apple या Samsung जैसे प्रीमियम ब्रैंड्स का कॉम्पिटीशन बनाने की कोशिश नहीं की, बल्कि ‘अफोर्डेबिलिटी और क्वॉलिटी वैल्यू’ के मॉडल पर काम किया। साथ ही कस्टमर्स को बेहतर आफ्टर-सेल एक्सपीरियंस देने पर भी ब्रैंड का शुरू से ही फोकस रहा है।
खास बात यह है कि कंपनी ने शुरुआत में एडवर्टाइजमेंट और पब्लिसिटी पर भारी रकम खर्च करने के बजाय क्वॉलिटी प्रोडक्ट्स और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क को प्राथमिकता दी। इमरान कागलवाला का कहना है कि मार्केटिंग पर ढेर सारा पैसा खर्च करने के बजाय उन्होंने प्रोडक्ट्स को बेहतर बनाने और ग्राहकों का भरोसा जीतने पर ध्यान दिया। यही वजह है कि UNIX आज भी पूरी तरह बूटस्ट्रैप्ड कंपनी है और उसने बाहरी इन्वेस्टमेंट लिए बिना अपना विस्तार किया है।
कंपनी के सामने अब भी कुछ चुनौतियां
हालांकि, कंपनी के सामने चुनौतियां भी कम नहीं हैं। इमरान मानते हैं कि सस्ते चाइनीद इंपोर्ट आज भी भारतीय मैन्युफैक्चरर्स के लिए सबसे बड़ी चुनौती बने हुए हैं। खासकर मोबाइल कवर जैसे सेगमेंट में कम कीमत वाले इंपोर्टेड प्रोडक्ट्स लोकल मैन्युफैक्चरर्स पर दबाव बढ़ा रहे हैं। उनका मानना है कि अगर देश में मैन्युफैक्चरिंग को और पॉलिसीज से जुड़ा सपोर्ट मिले तो भारतीय कंपनियां इस क्षेत्र में कहीं तेजी से आगे बढ़ सकती हैं।
लेखक के बारे में
Pranesh Tiwariप्राणेश वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां वे पिछले चार वर्षों से
टेक्नोलॉजी सेक्शन का अहम हिस्सा हैं। खुद को दिल से लेखक और पेशे से पत्रकार मानने वाले प्राणेश के पास पत्रकारिता के
क्षेत्र में आठ वर्षों से अधिक का अनुभव है। उन्होंने अपने पूरे करियर में साइंस और टेक्नोलॉजी की जटिलताओं को आम पाठकों के
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चाहे वह किसी नए AI टूल की पड़ताल हो या किसी अनदेखी जगह की यात्रा.. प्राणेश का लक्ष्य हमेशा एक बेहतरीन कहानी बुनना ही
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