अजब-गजब: काम करने में फेल हुआ AI, तो यूजर को मिलेंगे 95 करोड़ रुपये, स्टार्टअप का वादा
AI टूल को इस्तेमाल करने के लिए आप जितना खर्च कर रहे हैं, अगर आपको उसके मुताबिक फायदा नहीं होता है, तो कंपनी यूजर को करीब 95 करोड़ रुपये चुकाएगी। स्टार्टअप कंपनी Cognition ने अपने AI एजेंट Devin को लेकर ग्राहकों से यह वादा किया है। चलिए डिटेल में बताते हैं सबकुछ...

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का दखल हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में बढ़ता जा रहा है। आज स्कूल को प्रोजेक्ट तैयार करना हो, किसी मुश्किल विषय को सरल भाषा में समझना हो या ऑफिस का काम निपटाना हो, यह सारे काम एआई चुटकियों में कर देता है। इसलिए कई कंपनियां अलग-अलग एआई टूल्स लेकर बाजार में आ गई हैं। कंपनियां अपने एआई टूल्स की क्षमता को लेकर अलग-अलग तरह के दावे भी कर रही हैं।
लेकिन अगर आपने हाल ही में AI से जुड़ी खबरें देखी हों, तो आपने इस बात पर गौर किया होगा कि कंपनियों अब AI पर होने वाली खर्चों को गंभीरता से ले रही हैं। कंपनियां अब AI के इस्तेमाल को लेकर सावधान हो रही हैं, और इसका कारण है बढ़ती लागत। कुछ कंपनियों को चिंता है कि AI पर लाखों डॉलर खर्च करना शायद फायदेमंद न हो, इसलिए वे अपने कर्मचारियों द्वारा AI के इस्तेमाल पर सीमाएं तय कर रही हैं - जैसे कि Uber और Walmart। लेकिन इस चिंता को दूर करने के लिए, AI स्टार्टअप Cognition एक नया आइडिया लेकर आया है - AI प्रोडक्टिविटी गारंटी। स्टार्टअप का दावा है कि अगर उनका AI एजेंट 'Devin' आपको पर्याप्त वैल्यू देने में फेल हो जाता है, तो ग्राहकों को $10 मिलियन (लगभग 95.7 करोड़ रुपये) तक मिलेंगे। जाहिर सी बात है यह सुनने के बाद आप भी चौंक गए होंगे। चलिए डिटेल में बताते हैं कंपनी के इस ऑफर के बारे में सबकुछ...
स्टार्टअप ने किया यह वादा
कॉग्निशन ने एक्स पर एक पोस्ट के जरिए "एआई प्रोडक्टिविटी गारंटी" घोषणा की है। कंपनी ने लिखा, "एआई को अपनी हिस्सेदारी अर्जित करनी चाहिए।" इसमें कहा गया है, "अगर डेविन (Devin) आपकी पेमेंट के हिसाब से कम इंजीनियरिंग वैल्यू देता है, तो कॉग्निशन (Cognition) आपके इस्तेमाल का खर्च तब तक उठाएगा जब तक वह सही वैल्यू न देने लगे; यह खर्च $10 मिलियन तक हो सकता है।"
डेविन, स्टार्टअप का एआई-पावर्ड सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग एजेंट है जिसे इंसानों की कम से कम भागीदारी के साथ कोडिंग टास्क को संभालने के लिए डिजाइन किया गया है। यूजर इसे प्रोजेक्ट असाउन कर सकते हैं, बग फिक्स या डेवलपमेंट का काम सौंप सकते हैं और एआई बैकग्राउंड में खुद से ही उन पर काम करता है। यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब व्यवसाय एआई खर्च को लेकर अधिक सतर्क हो रहे हैं और निवेश पर स्पष्ट रिटर्न की मांग कर रहे हैं।
गारंटी कैसे काम करती है?
कॉग्निशन का कहना है कि AI के इस्तेमाल को टोकन या प्रॉम्प्ट से मापने के बजाय, उसने एक ऐसा सिस्टम बनाया है जो इंजीनियरिंग के घंटों की बचत के आधार पर प्रोडक्टिविटी का आकलन करता है। कॉग्निशन के सीईओ स्कॉट वू के एक ब्लॉग पोस्ट के अनुसार, कंपनी का इंटरनल एस्टिमेटर पूरे हो चुके डेविन सेशन की समीक्षा करता है और दो सवालों के जवाब देने की कोशिश करता है: क्या कोई ह्यूमन इंजीनियर इस काम को उपयोगी मानता, और उसी काम को पूरा करने में उन्हें कितना समय लगता?
इसके बाद, अनुमानित घंटों को एक स्टैंडर्ड इंजीनियरिंग रेट का इस्तेमाल करके मॉनेटरी वैल्यू में बदला जाता है। कस्टमर के सालाना कॉन्ट्रैक्ट के खत्म होने के करीब, कॉग्निशन उस वैल्यू की तुलना कस्टमर के असल खर्च से करता है। अगर AI से बनी वैल्यू कम पड़ती है, तो कंपनी का कहना है कि वह कस्टमर्स को $10 मिलियन तक के क्रेडिट देकर इसकी भरपाई करेगी।
इस ऑफर में एक ट्विस्ट है
यह गारंटी सुनने में तो बहुत अच्छी लगती है, लेकिन इसमें एक टिव्स्ट है। मुआवजा कैश में नहीं दिया जाता है। इसके बजाय, ग्राहकों को क्रेडिट मिलते हैं जिनका इस्तेमाल भविष्य में Cognition की सर्विस इस्तेमाल करने के लिए किया जा सकता है। एक और ध्यान देने वाली बात यह है कि Cognition खुद ही अपने AI सिस्टम की प्रोडक्टिविटी का मूल्यांकन करती है, यानी कंपनी असल में अपनी ही परफॉर्मेंस को माप रही है।
लेखक के बारे में
Arpit Soniअर्पित सोनी को शुरुआत से ही नए-नए गैजेट्स को एक्सप्लोर करने और उन्हें आजमाने का शौक रहा है। अब अर्पित ने अपनी इस हॉबी को ही अपना पेशा बना लिया है। भोपाल के रहने वाले अर्पित को नए-नए गैजेट्स का रिव्यू करना और उनके बारे में लिखना काफी पसंद है। टेक्नोलॉजी, रोबोट्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इनसे जुड़ी खबरें लिखना भी इन्हें काफी भाता है। लाइव हिन्दुस्तान में अर्पित पिछले चार साल से बतौर सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर काम कर रहे हैं। मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें करीब 9 साल का अनुभव है। अर्पित ने मीडिया जगत में शुरुआत एक रीजनल चैनल से की थी। इससे बाद उन्होंने नवभारत टाइम्स और दैनिक भास्कर की गैजेट्स बीट में काम किया। अर्पित की स्कूलिंग भोपाल से हुई है। उन्होंने कंप्यूटर साइंस से इंजीनियरिंग की है। मीडिया में झुकाव के चलते उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU) से पोस्ट ग्रेजुएशन करके मीडिया जगत में एंट्री की। मीडिया में इन्हें आठ साल से ज्यादा समय हो चुके हैं और सफर अभी जारी है। गैजेट्स के अलावा, इन्हें नई-नई जगहों पर घूमना और उनके बारे में जानने का भी बहुत शौक है।
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