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टेक्नोलॉजी का कमाल, मौत के 200 साल बाद मिली एक दिन की जिंदगी

लाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीPublished By: Vishal Kumar
Thu, 18 Feb 2021 02:12 PM
टेक्नोलॉजी का कमाल, मौत के 200 साल बाद मिली एक दिन की जिंदगी

टेक्नोलॉजी की दुनिया में वो हर चीज संभव है जो आप सपने में भी नहीं सोच सकते। इसका एक उदाहरण हैं दिवंगत कवि जॉन कीट्स। दरअसल जॉन को अपनी मौत के 200 साल बाद एक बार फिर से एक दिन की जिदंगी मिलने जा रही है। वैज्ञानिकों की एक टीम उन्हें वर्चुअली रिक्रिएट करने की कोशिश कर रहे हैं। उनके वर्चुअल अवतार में उन्हीं की आवाज, चेहरे और कपड़ों को देखा जा सकेगा। बता दें कि रोमांटिक कवि जॉन कीट्स का निधन 23 फरवरी 1821 को टीबी के कारण रोम में हुआ था। उस समय वह 25 वर्ष के थे। 

एक्सपर्ट की टीम कर रही काम
डेलीमेल की रिपोर्ट के मुताबिक, उनकी 200वीं पुण्यतिथि पर कवि को फिर से वर्चुअली 'जीवित' किया जा रहा है। यह काम इंस्टिट्यूट ऑफ डिजिटल आर्कियोलॉजी के विशेषज्ञों की एक टीम कर रही हैं। इस टीम में एनिमेटर, भाषाओं के जानकार, कपड़ों के विशेषज्ञ और इतिहासकार शामिल हैं। रोम में उन्होंने अपनी एक मशहूर कविता ब्राइट स्टार (Bright Star) लिखी थी। खास बात है कि जहां उनका निधन हुआ था, वहीं कीट्स का वर्चुअल अवतार 200वीं पुण्यतिथि पर दर्शकों को ब्राइट स्टार कविता पढ़कर सुनाएगा। 

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तैयार हो रहे कपड़े और आवाज 
रिपोर्ट के मुताबिक, एनिमेटर्स उनके रंग-रूप को तैयार कर रहे हैं, जबकि उनकी आवाज और बोलने के ढंग पर वोकल स्पेशलिस्ट काम कर रहे हैं। उनके कपड़ों को एक्सपर्ट की एक टीम ने सावधानीपूर्वक बनाया है, हालांकि फाइनल रूप पर फिलहाल पूरी तरह सहमत नहीं बनी है। मॉर्डन टेक्नोलॉजी के जरिए जितना संभव हो सके वर्चुअल अवतार को वास्तविकता के करीब रखने की कोशिश की जा रही है। 

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चेहरे के लिए बनाया 3डी मॉडल
इंस्टिट्यूट ऑफ डिजिटल आर्कियोलॉजी (IDA) ने बेहद सटीक 3डी मॉडल तैयार करने के लिए कवि के ढेरों पोर्ट्रेट और डेथ मास्क को स्कैन किया, साथ ही अन्य जानकारियों का इस्तेमाल किया है। कीट्स ने अपने छोटे जीवनकाल में दर्जनों कविताएँ प्रकाशित कीं, जिसमें odes to melancholy, a nightingale और a Grecian urn शामिल हैं। 

कवि की तस्वीरों पर शोध करने वाले IDA के कार्यकारी निदेशक रोजर मिशेल ने कहा कि उनके रंग-रूप को तैयार करना उतना भी मुश्किल नहीं था, जितना पहले लग रहा था। मिशेल के मुताबिक, हमारे पास काफी हाई-क्वालिटी स्रोत थे, जिनमें मिनीअचर भी शामिल थे। सबसे मुश्किल काम उनके लिए सही कपड़ों का चुनाव करना है। 

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