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भारत में जल्द होगी Starlink की एंट्री! मस्क की कंपनी को मिलने वाला है लाइसेंस

Elon Musk की Starlinkको देश में स्पेस से वॉयस और डेटा कम्युनिकेशन सर्विसेस की पेशकश के लिए हरी झंडी मिलने वाली है क्योंकि सरकार डेटा स्टोरेज और ट्रांसफर नॉर्म्स पर अपनी प्रतिक्रियाओं से संतुष्ट है।

भारत में जल्द होगी Starlink की एंट्री! मस्क की कंपनी को मिलने वाला है लाइसेंस
Arpit Soniलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीWed, 08 Nov 2023 02:00 PM
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Elon Musk की Starlink सर्विस की एंट्री भारत में जल्द हो सकती है। एक रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों ने कहा कि एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक को देश में स्पेस से वॉयस और डेटा कम्युनिकेशन सर्विसेस की पेशकश के लिए हरी झंडी मिलने वाली है क्योंकि सरकार डेटा स्टोरेज और ट्रांसफर नॉर्म्स पर अपनी प्रतिक्रियाओं से संतुष्ट है। एक सरकारी अधिकारी ने ईटी को बताया, "हमारे सवालों के स्टारलिंक द्वारा दिए गए जवाब संतोषजनक लगते हैं... सुरक्षा जांच पूरी होने के बाद, कंपनी को सर्विसेस देने के लिए ग्लोबल मोबाइल पर्सनल कम्युनिकेशन बाय सैटेलाइट सर्विसेज (जीएमपीसीएस) लाइसेंस दिया जाएगा।"

लाइसेंस मिलने के बाद स्पेसएक्स की सहायक कंपनी स्टारलिंक को ऑर्गेनाइजेशन के साथ-साथ इंडिविजुअल्स को सैटेलाइट ब्रॉडबैंड, वॉयस और मैसेजिंग सर्विसेस प्रदान कर सकेगी।

देश में ही डेटा स्टोर करेगी स्टारलिंक
ईटी ने पहले रिपोर्ट की थी कि कैसे स्टारलिंक को डेटा स्टोरेज और ट्रांसफर से संबंधित प्रश्नों के निश्चित उत्तर देने के लिए कहा गया था क्योंकि इसके पहले के सबमिशन सरकार को संतुष्ट करने में विफल रहे थे। स्टारलिंक ने पहले सरकार से कहा था कि चूंकि इसका ग्रुप वैश्विक है, इसलिए यह डेटा स्टोरेज और ट्रांसफर के लिए अंतरराष्ट्रीय मानदंडों का पालन करेगा। इस स्थिति को भारत सरकार ने अस्वीकार कर दिया था, जो चाहती थी कि स्टारलिंक डेटा स्टोरेज के लिए भारतीय नियमों का पालन करे। एक दूसरे अधिकारी ने ईटी को बताया "डेटा को भारत में स्टोर किया जाना चाहिए क्योंकि कंपनी यहां लाइसेंस धारक होगी। कंपनी अब ऐसा करने के लिए सहमत हो गई है।"

भारत सरकार को अपनी बात प्रस्तुत करने के संबंध में स्टारलिंक को भेजा गया एक प्रश्न खबर लिखे जाने तक अनुत्तरित रहा। अगर इसे मंजूरी मिल जाती है, तो भारती समर्थित वनवेब और रिलायंस जियो की सैटकॉम शाखा के बाद स्टारलिंक जीएमपीसीएस लाइसेंस पाने वाली तीसरी कंपनी होगी। जेफ बेजोस के नेतृत्व वाली अमेजन ने भी दूरसंचार विभाग (डीओटी) से लाइसेंस के लिए आवेदन किया है, लेकिन इसके आवेदन पर सरकार द्वारा अभी तक चर्चा नहीं की गई है।

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सैटकॉम देता है स्पेस एक्टिविटी के लिए लाइसेंस
सैटकॉम सर्विस प्रोवाइडर को ऑटोनोमस स्पीड रेगुलेटर इंडियन नेशनल स्पेस प्रमोशन और ऑथराइजेशन सेंटर (IN-SPACe) से भी अप्रूवल की जरूरत होती है। भारत की नई स्पेस पॉलिसी 2023 ने IN-SPACe को सरकारी और निजी दोनों सैटकॉम खिलाड़ियों द्वारा स्पेस एक्टिविटी के दायरे को अथॉराइज करने के लिए सिंगल-विंडो एजेंसी के रूप में काम करने का अधिकार दिया है। इसके बाद कंपनियों को DoT द्वारा स्पेक्ट्रम आवंटन का इंतजार करना होगा।

सरकार देश में सैटेलाइट सर्विस के लिए स्पेक्ट्रम, या रेडियो फ्रीक्वेंसी आवंटित करने के तरीके पर भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) की सिफारिशों का इंतजार कर रही है। एक अधिकारी ने कहा, लेकिन जब तक ट्राई को नया चेयरमैन नहीं मिल जाता तब तक सिफारिशें होने की संभावना नहीं है।

पिछले साल वापस करना पड़ा था पैसा
भारतीय सैटकॉम बाजार में पैर जमाने के लिए स्पेसएक्स का यह दूसरा प्रयास है। पिछले साल, इसे देश में आवेदकों को प्री-बुकिंग का पैसा वापस करने के लिए मजबूर होना पड़ा था, क्योंकि DoT ने इसे पहले नियामक मंजूरी लेने के लिए कहा था।

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वनवेब (जिसका हाल ही में फ्रांस के यूटेलसैट में विलय हुआ है) और जियो हाई ग्रोश पोटेंशियल वाले भारत के सैटकॉम बाजार में स्टारलिंक, अमेजन और टाटा जैसी कंपनियों पर पहली बढ़त हासिल करने के लिए तेजी से सर्विसेस शुरू करने की कोशिश कर रहे हैं। EY-ISpA रिपोर्ट के अनुसार, भारत की स्पेस इकोनॉमी 2025 तक 6% की सीएजीआर से बढ़कर 13 बिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगी।
 

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