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हिंदी न्यूज़ गैजेट्सवीडियो बनाने के लिए जान दे रहे हैं बच्चे, जानें क्या है नया 'ब्लैकआउट चैलेंज'

वीडियो बनाने के लिए जान दे रहे हैं बच्चे, जानें क्या है नया 'ब्लैकआउट चैलेंज'

सोशल मीडिया और शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म्स पर बढ़ते अजीबोगरीब ट्रेंड्स के चलते अब कई बच्चों की मौत का मामला सामने आया है। बच्चे ब्लैकआउट चैलेंज का हिस्सा बन रहे हैं और वीडियो बना रहे हैं।

वीडियो बनाने के लिए जान दे रहे हैं बच्चे, जानें क्या है नया 'ब्लैकआउट चैलेंज'
Pranesh Tiwariलाइव हिंदुस्तान,नई दिल्लीFri, 02 Dec 2022 04:43 PM

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सोशल मीडिया पर वायरल होने के लिए क्रिएटर्स अलग-अलग तरीके आजमाते हैं और शॉर्ट वीडियोज में कुछ अनोखा करके दिखाना चाहते हैं। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर एक के बाद एक अजीबोगरीब चैलेंज आते रहते हैं। ऐसा ही एक चैलेंज करीब 20 बच्चों की मौत की वजह बना है। 

नए TikTok शॉर्ट वीडियो चैलेंज का नाम 'Blackout Challenge' रखा गया है और बीते 18 महीनों में इसकी वजह से 14 साल और इससे कम उम्र के लगभग 20 बच्चों की जान गई है। इस चैलेंज को खतरनाक माना जा रहा है, इसके बावजूद ज्यादा लाइक्स और फॉलोअर्स के लालच में बच्चे इसका हिस्सा बन रहे हैं।

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आखिर क्या है ब्लैकआउट चैलेंज?
ब्लैकआउट चैलेंज का हिस्सा कम उम्र के इंटरनेट यूजर्स और बच्चे बन रहे हैं, जो 'कूल' दिखना चाहते हैं। इस चैलेंज में यूजर्स तब तक खुद का दम घोटते हैं या सांस रोकते हैं, जब तक वे बेहोश ना हो जाएं। इसके बाद वे दोबारा होश में आने का वीडियो भी शेयर करते हैं। परेशानी यह है कि ऐसी स्थिति में कई बार दम घुटने से मौत हो सकती है।

पहले भी सामने आए हैं ऐसे चैलेंज
अमेरिकी सरकार के डाटा के मुताबिक करीब दो दशक पहले से इस चैलेंज के अलग-अलग वर्जन देखने को मिलते रहे हैं और इन्हें सोशल मीडिया के चलते बढ़ावा मिला है। पिछले डेढ़ साल में ही 12 साल या इससे कम उम्र वाले 15 बच्चों की मौत ब्लैकआउट चैलेंज के चलते हुई है। वहीं, इस दौरान 13-14 साल की उम्र वाले पांच बच्चों की जान गई है।

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बच्चों को सोशल मीडिया से रखें दूर
बेहद जरूरी है कि बच्चों को सोशल मीडिया और शॉर्ट वीडियो ऐप्स से दूर रखना इसलिए जरूरी है क्योंकि वे स्क्रीन पर दिखने वाले चैलेंज को कॉपी करने की कोशिश करते हैं। ऐसे में सांस रोकने या दम घोटने जैसे चैलेंज जरा सी गलती से जानलेवा हो सकते हैं। आपको याद होगा, भारत में भी ब्लू व्हेल चैलेंज के चलते ढेरों बच्चों और किशोरों ने आत्महत्या की थी।