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हिंदी न्यूज़ गैजेट्सगूगल प्ले स्टोर पर ही मौजूद था बड़ा खतरा! अपने फोन से फौरन डिलीट करें ये 4 मोबाइल ऐप्स

गूगल प्ले स्टोर पर ही मौजूद था बड़ा खतरा! अपने फोन से फौरन डिलीट करें ये 4 मोबाइल ऐप्स

Google Play Store पर चार ऐसी ऐप्स सामने आई हैं, जिनकी मदद से यूजर्स का डाटा चोरी किया जा रहा था और उन्हें नुकसान पहुंचाया जा रहा था। इन ऐप्स को फौरन फोन से डिलीट करने की सलाह दी गई है।

गूगल प्ले स्टोर पर ही मौजूद था बड़ा खतरा! अपने फोन से फौरन डिलीट करें ये 4 मोबाइल ऐप्स
Pranesh Tiwariलाइव हिंदुस्तान,नई दिल्लीFri, 04 Nov 2022 08:13 PM

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एंड्रॉयड स्मार्टफोन इस्तेमाल करने वालों के लिए ऐप्स डाउनलोड करने का सबसे सुरक्षित तरीका गूगल प्ले स्टोर की मदद लेना है। चिंता की बात यह है कि गूगल प्ले स्टोर पूरी तरह सुरक्षित नहीं है और इसपर मौजूद कई ऐप्स भी मालवेयर जैसे खतरों के साथ आती हैं। अब यूजर्स को चार खतरनाक ऐप्स फौरन डिलीट करने को कहा गया है।

कई सुरक्षा स्तरों के बावजूद अटैकर्स और स्पैमर्स मालिशियस ऐप्स को प्ले स्टोर पर लिस्ट करने में कामयाब रहते हैं, जिसका नुकसान यूजर्स को उठाना पड़ता है। ऐसी ही कुछ ऐप्स की जानकारी सामने आई है, जो यूजर्स का सेंसिटिव डाटा चोरी कर रही हैं और सुरक्षा रिसर्चर्स ने इन्हें फौरन डिलीट करने की सलाह दी है। 

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मालवेयर वाली ऐप्स में मौजूद है एंड्रॉयड ट्रोजन
Malwarebytes Labs के सुरक्षा रिसर्चर्स ने चार ऐसी एंड्रॉयड ऐप्स की जानकारी दी है, जो गूगल प्ले स्टोर पर मौजूद थीं और इनकी मदद से एंड्रॉयड ट्रोजन डिवाइसेज में पहुंचाया जा रहा था। ‘Android/Trojan.HiddenAds.BTGTHB' ट्रोजन वाली इन ऐप्स को लाखों बार डाउनलोड किया गया है और इन सभी को एक ही ऐप डिवेलपर Mobile Apps Group ने तैयार किया है।

लिस्ट में मौजून इन ऐप्स को फौरन करें डिलीट
अगर आपके स्मार्टफोन्स में इनमें से कोई भी ऐप मौजूद या इंस्टॉल है तो उसे फौरन डिलीट कर दें, 
- Bluetooth Auto Connect that has amassed over 10 lakh downloads.
- Driver: Bluetooth, Wi-Fi, USB
- Bluetooth App Sender
- Mobile Transfer: Smart Switch  

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फिशिंग साइट्स की मदद से पहुंचा रही थीं नुकसान
रिसर्चर ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि ये ऐप्स इंस्टॉल किए जाने के करीब दो सप्ताह बाद मालिशियस बिहेवियर शुरू करती थीं और गूगल क्रोम या मोबाइल ब्राउजर्स में फिशिंग साइट्स ओपेन करने लगती थीं। यूजर्स को पता भी नहीं चलता था और ये साइट्स पे-पर-क्लिक आधार पर कमाई कर रही थीं। डिवाइस लॉक होने पर भी क्रोम टैब्स बैकग्राउंड में ओपेन रहते थे और यूजर को ऐप आइकन टच करते ही दिखाए जाते थे।

यानी कि मालवेयर वाली ऐप्स चोरी-छुपे विज्ञापन दिखा रही थीं और यूजर्स से उनपर टैप करवा लेती थीं। ये विज्ञापन दिखाने के लिए यूजर्स डाटा की मदद ली जाती थी और यह डाटा उनसे पहले ली गईं परमिशंस की मदद से जुटाया जाता था। यही वजह है कि प्ले स्टोर से ऐप्स डाउनलोड करते वक्त आपका रिव्यू और रेटिंग्स चेक करना बेहद जरूरी है।