आम आदमी की मौज, इस देश में AI सभी के लिए 'FREE'; सरकार उठाएगी पूरा खर्च

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सरकार के इस कदम का मुख्य उद्देश्य लोगों को मुफ्त में ऐसे एआई चैटबॉट और एजेंट उपलब्ध कराना है जो रोजमर्रा के काम संभाल सकें। रिपोर्ट के अनुसार, 2027 से पूरे देश की सर्विसेस का खर्च भी उठाएगी। यह एक सरकारी पहल है जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को जरूरी सार्वजनिक सुविधा की तरह देखा जा रहा है।

free ai for everyone
साउथ कोरिया कथित तौर पर अपनी पूरी आबादी को जेनेरिक AI सर्विसेज तक मुफ्त एक्सेस देने की योजना बना रहा है।

कैसा हो अगर जिन AI टूल्स को इस्तेमाल करने के लिए आपको महंगा सब्सक्रिप्शन खरीदना पड़ रहा है, वो सब FREE हो जाएं? सुनने में यह किसी सपने जैसा लग सकता है कि लेकिन एक देश अपने सभी नागरिकों को यह शानदार तोहफा देने जा रहा है। दरअसल, South Korea अपने नागरिकों को एक शानदार सरप्राइज देने की तैयारी में है। खबर है कि

टाइम्सनाउ की रिपोर्ट के अनुसार, साउथ कोरिया कथित तौर पर अपनी पूरी आबादी को जेनेरिक AI सर्विसेज तक मुफ्त एक्सेस देने की योजना बना रहा है। यह एक सरकारी पहल है जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को जरूरी सार्वजनिक सुविधा की तरह देखा जा रहा है। सरकार के इस कदम का मुख्य उद्देश्य लोगों को मुफ्त में ऐसे एआई चैटबॉट और एजेंट उपलब्ध कराना है जो रोजमर्रा के काम संभाल सकें। हाल ही में, साइंस और आईसीटी मंत्रालय ने अपनी 'AI फॉर एनरीवन' प्रोजेक्ट के लिए छह बोलीदाताओं में से तीन सिंडिकेट को चुना है, जिसका उद्देश्य इसे पूरे देश में लागू करना है।

सरकार इसका पूरा खर्च भी उठाएगी

सरकार तीन ग्रुपों को मिलाकर 512 NVIDIA B200 ग्राफिक्स कार्ड देगी और 2027 से पूरे देश की सर्विसेस का खर्च भी उठाएगी। यह प्रोजेक्ट सामान्य चैटबॉट से बहुत आगे है, क्योंकि इसमें एजेंटिक AI होगा जो खुद पब्लिक सर्विस चला सकेगा, जिसमें फाइनेंस, हेल्थकेयर, हाउसिंग और एजुकेशन जैसे क्षेत्रों को लाभ मिलेगा। SK Telecom एक ऐसा ऑटोनॉमस एजेंट बना रहा है जो यूजर का रिक्वेस्ट लेगा और खुद प्लानिंग से लेकर पूरा काम कर देगा।

उसी सर्विसेज को वेब, फोन कॉल और टेक्स्ट मैसेज के जरिए डिजिटल रूप से भी एक्सेस किया जा सकता है। एआई-पावर्ड कॉल उन संगठनों तक पहुंचने में मदद करेंगी जो अभी भी सिर्फ एनालॉग सिस्टम इस्तेमाल करते हैं और जिनके पास कोई डिजिटल इंटरफेस नहीं है। यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यूजर्स को एक ही बातचीत में तुलना करने से लेकर कामों का आकलन करने तक गाइड करने के लिए बनाई गई है। इसके अलावा, मंत्रालय सितंबर में तीन ग्रुप्स के साथ डील फाइनल करने की योजना बना रहा है, फिर बीटा सर्विसेज लॉन्च करेगा और साल के अंत तक पूरा डेवलपमेंट होने की उम्मीद है।

दक्षिण कोरिया के इस कदम का सबसे बड़ा फायदा किफायती होना होगा। बहुत से लोग चैटजीपीटी, जेमिनी या क्लॉड जैसे प्रीमियम एआई टूल्स का खर्च नहीं उठा सकते, इसलिए सरकार द्वारा समर्थित मुफ्त विकल्प, जिसमें उपयोग की कोई सीमा नहीं होगी, उनकी मदद करेगा। अधिकारियों के अनुसार लगभग एक-तिहाई आबादी अभी भी एआई का इस्तेमाल नहीं कर पाती, और यह पहल उस खाई को पाटने का प्रयास है। इससे देश को अपने खुद के एआई मॉडल विकसित करने में भी मदद मिलेगी, बजाय इसके कि वह चीनी या अमेरिकी कंपनियों पर ज्यादा निर्भर रहे।

Arpit Soni

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Arpit Soni

अर्पित सोनी को शुरुआत से ही नए-नए गैजेट्स को एक्सप्लोर करने और उन्हें आजमाने का शौक रहा है। अब अर्पित ने अपनी इस हॉबी को ही अपना पेशा बना लिया है। भोपाल के रहने वाले अर्पित को नए-नए गैजेट्स का रिव्यू करना और उनके बारे में लिखना काफी पसंद है। टेक्नोलॉजी, रोबोट्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इनसे जुड़ी खबरें लिखना भी इन्हें काफी भाता है। लाइव हिन्दुस्तान में अर्पित पिछले चार साल से बतौर सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर काम कर रहे हैं। मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें करीब 9 साल का अनुभव है। अर्पित ने मीडिया जगत में शुरुआत एक रीजनल चैनल से की थी। इससे बाद उन्होंने नवभारत टाइम्स और दैनिक भास्कर की गैजेट्स बीट में काम किया। अर्पित की स्कूलिंग भोपाल से हुई है। उन्होंने कंप्यूटर साइंस से इंजीनियरिंग की है। मीडिया में झुकाव के चलते उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU) से पोस्ट ग्रेजुएशन करके मीडिया जगत में एंट्री की। मीडिया में इन्हें आठ साल से ज्यादा समय हो चुके हैं और सफर अभी जारी है। गैजेट्स के अलावा, इन्हें नई-नई जगहों पर घूमना और उनके बारे में जानने का भी बहुत शौक है।

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