अब बिना बिजली के AC जैसी कूलिंग, सऊदी अरब के वैज्ञानिकों ने किया कमाल

Pranesh Tiwari लाइव हिन्दुस्तान
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सऊदी अरब के वैज्ञानिकों ने NESCOD नाम की ऐसी कूलिंग तकनीक विकसित की है, जो बिना बिजली के ठंडक पैदा कर सकती है। यह सिस्टम नमक, पानी और सौर ऊर्जा की मदद से काम करता है।

अब बिना बिजली के AC जैसी कूलिंग, सऊदी अरब के वैज्ञानिकों ने किया कमाल

भीषण गर्मी, बढ़ते बिजली बिल और हर साल रिकॉर्ड तोड़ तापमान के बीच सऊदी अरब के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी टेक्नोलॉजी डिवेलप की है, जिसने दुनियाभर का ध्यान खींच लिया है। इस कूलिंग टेक का नाम है- NESCOD, यानी No Electricity and Sustainable Cooling on Demand। दावा किया जा रहा है कि यह सिस्टम बिना बिजली के ठंडक पैदा कर सकता है। सोशल मीडिया पर इसे भविष्य का AC तक कहा जा रहा है।

NESCOD को सऊदी अरब की King Abdullah University of Science and Technology (KAUST) के वैज्ञानिकों ने तैयार किया है। यह कोई ट्रेडिशनल एयर कंडीशनर नहीं है, क्योंकि इसमें कंप्रेसर, मोटर या रेफ्रिजरेंट गैस का इस्तेमाल नहीं होता। इसके बजाय यह एक केमिकल प्रोसेस के जरिए ठंडक पैदा करता है। वैज्ञानिक इसे 'पासिव कूलिंग सिस्टम' कहते हैं, यानी ऐसा सिस्टम जो लगातार बिजली लिए बिना काम कर सके।

इस तरह की जाती है कूलिंग

नई टेक्नोलॉजी के पीछे 'एंडोथर्मिक डिसॉल्यूशन' नाम का प्रोसेस काम करता है। इसमें Ammonium Nitrate नाम का नमक और पानी इस्तेमाल किया जाता है। जब यह नमक पानी में घुलता है, तो आसपास की गर्मी को सोख लेता है। इसी वजह से तापमान तेजी से नीचे आने लगता है। वैज्ञानिकों के प्रयोगों में तापमान करीब 25 डिग्री सेल्सियस से घटकर 3.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। सबसे मजेदार बात यह रही कि यह बदलाव लगभग 20 मिनट के भीतर किया गया।

NESCOD की सबसे बड़ी खासियत सिर्फ ठंडक पैदा करना नहीं, बल्कि खुद को दोबारा इस्तेमाल के लिए तैयार करना है। सामान्य भाषा में कहें तो यह एक तरह की रीचार्जेबल कूलिंग टेक्नोलॉजी है। ठंडक देने के बाद नमक और पानी का घोल बन जाता है। फिर सूरज की गर्मी का इस्तेमाल करके पानी को वाष्प में बदला जाता है, जिससे नमक दोबारा क्रिस्टल के रूप में अलग हो जाता है। इसके बाद सिस्टम फिर से कूलिंग के लिए तैयार हो जाता है। यही कारण है कि इसे सस्टेनेबल कूलिंग तकनीक कहा जा रहा है।

क्या AC की जगह लेगी नई टेक्नोलॉजी

इंटरनेट पर कई जगह यह दावा किया जा रहा है कि यह तकनीक एयर कंडीशनर को पूरी तरह खत्म कर देगी, लेकिन वैज्ञानिक रिसर्च ऐसा नहीं कहती। फिलहाल यह टेक रिसर्च और प्रोटोटाइप स्टेज में है। अभी तक इसे बड़े घरों, ऑफिसों या मॉल जैसे स्थानों में इस्तेमाल करके नहीं दिखाया गया है। लगातार कई घंटों तक बड़े स्पेस को ठंडा रखने की इसकी क्षमता पर भी अभी रिसर्च जारी है। इसलिए इसे मौजूदा AC का सीधा विकल्प कहना जल्दबाजी होगी।

इसके बावजूद एक्सपर्ट्स मानते हैं कि यह तकनीक भविष्य में बेहद उपयोगी साबित हो सकती है। खासकर उन इलाकों में जहां बिजली की भारी कमी है या लगातार पावर कट होते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों, रेगिस्तानी इलाकों, छोटे कोल्ड स्टोरेज, वैक्सीन स्टोरेज और फूड प्रिजर्वेशन जैसी जगहों पर इसका इस्तेमाल काफी फायदेमंद हो सकता है। साथ ही भारत जैसे देशों में, जहां गर्मी लगातार बढ़ रही है और बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच रही है, वहां ऐसे विकल्प बड़ी राहत बन सकते हैं।

Pranesh Tiwari

लेखक के बारे में

Pranesh Tiwari

प्राणेश वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां वे पिछले चार वर्षों से टेक्नोलॉजी सेक्शन का अहम हिस्सा हैं। खुद को दिल से लेखक और पेशे से पत्रकार मानने वाले प्राणेश के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में आठ वर्षों से अधिक का अनुभव है। उन्होंने अपने पूरे करियर में साइंस और टेक्नोलॉजी की जटिलताओं को आम पाठकों के लिए सरल, सहज और रोचक भाषा में प्रस्तुत करने पर विशेष ध्यान दिया है।

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