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₹20,000 से कम में फास्ट लैपटॉप: Primebook कैसे बदल रहा है भारत का बजट कंप्यूटिंग मार्केट?

₹20,000 से कम में फास्ट लैपटॉप: Primebook कैसे बदल रहा है भारत का बजट कंप्यूटिंग मार्केट?

संक्षेप:

Primebook ने 20,000 रुपये से कम कीमत में PrimeOS बेस्ड लैपटॉप लाकर भारतीय बजट कंप्यूटिंग सेगमेंट में नया ऑप्शन दिया है। ARM आर्किटेक्चर, दमदार बैटरी और क्लीन सॉफ्टवेयर के साथ ये लैपटॉप दमदार परफॉर्मेंस ऑफर करते हैं।

Dec 15, 2025 10:23 pm ISTPranesh Tiwari लाइव हिन्दुस्तान
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भारत में टेक्नोलॉजी अपग्रेड के समय कीमत सबसे बड़ा फैक्टर रही है। स्मार्टफोन सेगमेंट में यह बैलेंस काफी हद तक बन चुका है, लेकिन लैपटॉप मार्केट और खासतौर से 20,000 रुपये से कम की रेंज, लंबे समय तक समझौतों का नाम रहा। स्लो प्रोसेसिंग स्पीड, पुराना सॉफ्टवेयर और कमजोर बैटरी से यूजर्स को समझौता करना पड़ता था। इसी खाली जगह को भरने के इरादे से Primebook की शुरुआत हुई और यह कंपनी अब एक से बढ़कर एक लैपटॉप मॉडल्स ऑफर कर रही है।

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लाइव हिन्दुस्तान ने कंपनी को-फाउंडर और CEO चित्रांशु महंत से लंबी चर्चा की और कंपनी का विजन समझने की कोशिश की। चित्रांशु ने बताया कि किस तरह Primebook की शुरुआत हुई और यह कंपनी वैल्यू लैपटॉप रेंज में अपनी पहचान बना रही है। आइए आपको Primebook की कहानी सुनाते हैं।

ऐसे हुई Primebook की शुरुआत

Primebook को-फाउंडर के मुताबिक, यह आइडिया किसी बोर्डरूम प्रेजेंटेशन से नहीं, बल्कि एक आम भारतीय यूजर की परेशानी से निकला। उन्होंने बताया, 2018 के आसपास यह साफ दिखने लगा था कि बजट लैपटॉप सेगमेंट में सही मायनों में कोई यूजर-फ्रेंडली ऑप्शन मौजूद नहीं है।

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स्टार्टअप इकोसिस्टम में काम करते हुए Primebook के फाउंडर्स ने महसूस किया कि 20,000 रुपये से कम में मिलने वाले ज्यादातर लैपटॉप ना तो आज के ऐप्स के लिए बने हैं और ना ही युवाओं की जरूरतों के लिए। भारत जैसे देश में, जहां पहली बार लैपटॉप खरीदने वालों की संख्या बहुत बड़ी है, यह एक सीरियस गैप था।

परेशानी का हल खोजने के लिए Intel और Windows बेस्ड सिस्टम की जगह उनकी टीम ने ARM आर्किटेक्चर और Android ऑपरेटिंग सिस्टम पर दांव लगाया। वजह साफ थी कि Android लाइट है, फास्ट है और पहले से करोड़ों भारतीय यूजर्स इसे इस्तेमाल कर रहे हैं।

सॉफ्टवेयर डिवेलपमेंट ने रखी नींव

चित्रांशु की मानें तो Primebook की असली नींव हार्डवेयर से पहले सॉफ्टवेयर ने रखी। 2018 में PrimeOS नाम से एक खास Android-based ऑपरेटिंग सिस्टम लॉन्च किया गया, जिसे पूरी तरह लैपटॉप यूज के लिए तैयार किया गया था। इसमें मल्टी-विंडो सपोर्ट, डेस्कटॉप जैसा इंटरफेस और बेहतर कीबोर्ड-माउस कंट्रोल दिया गया।

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उन्होंने बताया कि PrimeOS को शुरुआत में फ्री में रिलीज किया गया और एक साल के भीतर इसे 10 लाख से ज्यादा ऑर्गेनिक डाउनलोड मिले। पुराने लैपटॉप्स में भी यह सिस्टम नई जान डाल रहा था और यूजर्स बिना हैवी हार्डवेयर के स्मूद परफॉर्मेंस पा रहे थे। यही बड़ा टर्निंग पॉइंट था, जहां Primebook टीम को इस क्षेत्र में आगे बढ़ने के संकेत मिले।

खुद डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग भी

सॉफ्टवेयर के बाद हार्डवेयर की बारी आई। साल 2019 और 2020 के दौरान कई भारतीय OEMs से कंपनी की बातचीत हुई, लेकिन कम कीमत वाले Android लैपटॉप को लेकर कोई भी बड़ा पार्टनर रिस्क लेने को तैयार नहीं था। आखिरकार Primebook ने खुद हार्डवेयर डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग की जिम्मेदारी उठाने का फैसला किया।

primebook

करीब एक साल की तैयारी के बाद, दिसंबर 2022 में Primebook के पहले 1,000 लैपटॉप मार्केट में उतारे गए। जनवरी, 2023 में Shark Tank India पर कंपनी की मौजूदगी ने ब्रैंड को देश भर में पहचान दिलाई और इसके बाद सेल में तेज बढ़त देखने को मिली। 2022-23 में जहां 18,000 यूनिट्स बिकीं, वहीं 2023-24 में यह आंकड़ा 45,000 तक पहुंच गया।

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देश के युवा हैं कंपनी का टार्गेट यूजर

CEO के मुताबिक, Primebook का टार्गेट यूजर वह युवा है जो पहली बार लैपटॉप खरीद रहा है। 15 से 25 साल की उम्र का यह वर्ग पहले से Android ऐप्स, गेम्स और डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म्स से जुड़ा हुआ है। ऐसे में Android-based लैपटॉप उनके लिए सीखने और इस्तेमाल में आसान बन जाता है।

कंपनी का दावा है कि Primebook Pro जैसे मॉडल 18,000 रुपये जितनी कीमत में 8GB RAM, 128GB स्टोरेज और लगभग 14 घंटे का बैटरी बैकअप देते हैं। इस प्राइस रेंज में इतनी बैटरी लाइफ और स्मूद परफॉर्मेंस आमतौर पर देखने को नहीं मिलती।

मिलते हैं ऐप्स के ऑफलाइन वर्जन

सॉफ्टवेयर लेवल पर यूजर्स को Word, Excel और PowerPoint जैसे ऐप्स के Android वर्जन ऑफलाइन मिलते हैं। इसके अलावा ऐप स्टोर के साथ लगभग हर जरूरी ऐप और गेम डाउनलोड किए जा सकते हैं। अगर यूजर्स को Windows या Linux के प्रोफेशनल टूल्स की जरूरत होती है, उनके लिए Cloud PC का विकल्प भी दिया गया है, जो pay-as-you-go मॉडल पर काम करता है।

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Chromebook से तुलना करें तो Primebook भारतीय यूजर्स की जरूरतों के ज्यादा करीब नजर आता है। जहां Chromebook पूरी तरह ऑनलाइन इकोसिस्टम पर निर्भर करता है, वहीं Primebook ऑफलाइन काम करने का ऑप्शन भी देता है।

क्या है कंपनी का फ्यूचर प्लान?

आगे की स्ट्रेटजी की बात करें तो Primebook अब AI और Cloud-based सर्विसेज पर फोकस कर रहा है। कंपनी Companion Mode और Operator Mode जैसे AI फीचर्स पर काम कर रही है, जिनका मकसद सिर्फ जवाब देना नहीं, बल्कि यूजर की ओर से काम करना भी होगा। Primebook टीम यह भी साफ कर चुकी है कि उनके डिवाइसेज में विज्ञापन या ब्लोटवेयर कभी शामिल नहीं होगा। उनका लक्ष्य एक स्मूद, कंट्रोल्ड और भरोसेमंद यूजर एक्सपीरियंस देना है।

Pranesh Tiwari

लेखक के बारे में

Pranesh Tiwari
खुद को दिल से लेखक और पेशे से पत्रकार बताने वाले प्राणेश 7 साल से ज्यादा वक्त से विज्ञान और तकनीक के बारे में लिख रहे हैं। IIMC, नई दिल्ली में PTI अवॉर्ड पाने वाले प्राणेश ने करियर की शुरुआत नवभारत टाइम्स ऑनलाइन से की और न्यूजबाइट्स में सीनियर टेक जर्नलिस्ट के तौर पर भी काम किया। लाइव हिन्दुस्तान में वह चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर लेटेस्ट टेक ट्रेंड्स और गैजेट्स की जानकारी देते हैं। उन्हें लिखना और सफर करना अच्छा लगता है। और पढ़ें

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