PM मोदी ने कहा कि इंसान बन रहे हैं सिर्फ डाटा पॉइंट, जानें क्या है इसका मतलब

Feb 19, 2026 01:40 pm ISTPranesh Tiwari लाइव हिन्दुस्तान
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने AI समिट में कहा है कि AI के युग में इंसान सिर्फ डाटा पॉइंट बनकर रह सकते हैं। उन्होंने लोकतांत्रिक, ह्यूमन सेंटर्ड और सेफ AI की जरूरत पर जोर दिया।

PM मोदी ने कहा कि इंसान बन रहे हैं सिर्फ डाटा पॉइंट, जानें क्या है इसका मतलब

राजधानी नई दिल्ली में आयोजित India AI Impact Summit 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज आर्टीफिशयल इंटेलिजेंस को लोकतंत्रीकृत (democratise) करना जरूरी है, जिससे इंसान केवल ‘डाटा पॉइंट’ या कच्चा माल ना बन जाएं। उन्होंने साफ किया कि अगर AI डिवेलपमेंट सिर्फ टेक्निकल पावर या मशीन‑सेंटर्ड अप्रोच तक सीमित रहे, तो इंसानों का मानव रूप कम दिखेगा और वह केवल डाटा के एक नंबर‑बेस्ड एलिमेंट जैसा रह जाएगा।

प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में यह भी कहा कि AI को ह्यूमन‑सेंटर्ड, इनक्लूसिव और पावरफुल बनाने की दिशा में डिवेलप किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि AI का मकसद इंसान की क्षमता बढ़ाना होना चाहिए, ना कि उसे सिर्फ डाटा की तरह देखने के लिए इस्तेमाल करना। संबोधन के दौरान उन्होंने यह उदाहरण भी दिया कि AI को ‘खुला आसमान’ देना चाहिए, लेकिन आखिरी नियंत्रण हमारे हाथ में रहना चाहिए, जैसे कि GPS रास्ता दिखाता है लेकिन दिशा चुनने का फैसला इंसान का होता है।

क्या है डाटा पॉइंट बनाए जाने का मतलब?

AI मॉडल डिवेलप करने के लिए बहुत बड़ी मात्रा में डाटा की जरूरत होती है। टेक कंपनियां और रिसर्चर्स लोगों के बिहेवियर, ऐक्टिविटीज, पसंद‑नापसंद, लोकेशन और शॉपिंग वगैरह से जुड़ा डाटा इकट्ठा करते हैं जिससे मशीनों को ट्रेन किया जा सके, और प्रिडिक्शंस के अलावा डिसीजन मेकिंग में सुधार हो सके। इस डाटा को प्रोसेस करने के आधार पर AI सिस्टम बिहेवियरल पैटर्न सर्च करते हैं, जो आखिर में एक व्यक्ति को डाटा के तौर पर इस्तेमाल करते हैं। इस प्रोसेस में व्यक्ति के पर्सनल एक्सपीरियंस, इमोशंस, रिफरेंस और कंप्लीट ह्यूमैनिटी अक्सर नजरअंदाज हो जाती हैं, और वह केवल डाटा पॉइंट की तरह दिखाया जाता है।

इसलिए बढ़ जाता है डाटा सुरक्षा का महत्व

जब इंसान को AI‑सिस्टम्स के लिए डाटा पॉइंट के तौर पर पहचाना जाता है, तो डाटा सिक्योरिटी और प्राइवेसी पर खास ध्यान देना अनिवार्य हो जाता है। इसका वजह यह है कि यूजर का डाटा उसकी पर्सनल और सेंसिटिव जानकारी हो सकता है जैसे कि हेल्थ डाटा, यूजेस पैटर्न, फाइनेंशियल ऐक्टिविटीज और पर्सनल पहचान से जुड़ी इन्फॉर्मेशन। बिना पूरी सुरक्षा और कंट्रोल के यह डाटा गलत इस्तेमाल, डाटा वॉयलेशन या पहचान चोरी जैसे जोखिमों को लेकर सेंसिटिव हो सकता है।

प्रधानमंत्री मोदी ने भी AI‑जेनरेटेड कंटेंट की सच्चाई और भरोसे को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने सुझाव दिया कि AI से जेनरेटेड टेक्स्ट, इमेज और वीडियो के लिए authenticity labels (ऑथेंटिसिटी लेबल) और सोर्स आइडेंटिफिकेशन का सिस्टम होना चाहिए, जिससे यूजर्स जान सकें कि कोई कंटेंट असली है या AI जेनरेटेड है। इस तरह के सिक्योरिटी सॉल्यूशंस डिजिटल ट्रांसपैरेंसी और भरोसे को बढ़ाते हैं।

Pranesh Tiwari

लेखक के बारे में

Pranesh Tiwari

प्राणेश वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां वे पिछले चार वर्षों से टेक्नोलॉजी सेक्शन का अहम हिस्सा हैं। खुद को दिल से लेखक और पेशे से पत्रकार मानने वाले प्राणेश के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में आठ वर्षों से अधिक का अनुभव है। उन्होंने अपने पूरे करियर में साइंस और टेक्नोलॉजी की जटिलताओं को आम पाठकों के लिए सरल, सहज और रोचक भाषा में प्रस्तुत करने पर विशेष ध्यान दिया है।

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प्राणेश की विशेषज्ञता गैजेट्स, टेक इनसाइट्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे विषयों में है। वे तकनीकी बारीकियों और कठिन शब्दावली को इस तरह प्रस्तुत करते हैं कि एक सामान्य पाठक भी तेजी से बदलती डिजिटल दुनिया को आसानी से समझ सके। लेटेस्ट गैजेट्स का रिव्यू करना और नए मोबाइल ऐप्स के फीचर्स को आजमाना उनके काम का पसंदीदा हिस्सा है। उनकी लेखन शैली में स्पष्टता, रिसर्च और कहानी कहने का संतुलन देखने को मिलता है।

अब तक का सफर और उपलब्धियां
प्राणेश ने अपने प्रोफेशनल करियर की शुरुआत नवभारत टाइम्स ऑनलाइन से की। इसके बाद उन्होंने न्यूजबाइट्स (NewsBytes) में सीनियर टेक जर्नलिस्ट के रूप में काम किया, जहां उन्होंने तकनीकी रिपोर्टिंग में अपनी अलग पहचान बनाई। वे भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली के पूर्व छात्र हैं और अपनी प्रतिभा के लिए प्रतिष्ठित PTI अवॉर्ड से सम्मानित हो चुके हैं।

लेखन और व्यक्तिगत रुचियां
पत्रकारिता के साथ-साथ प्राणेश एक संवेदनशील और रचनात्मक लेखक भी हैं। लॉकडाउन के दौरान उन्होंने ‘सिर्फ दोस्त: नए जमाने की प्रेम कहानियां’ नामक लघुकथा संग्रह लिखा, जिसमें रिश्तों की बारीकियों को भावनात्मक रूप से प्रस्तुत किया गया है।

उन्हें स्मार्टफोन, कंज्यूमर टेक और डिजिटल इनोवेशन से जुड़े विषयों पर गहराई से रिसर्च करना और पढ़ना पसंद है। काम के अलावा, उन्हें यात्रा करना भी बेहद पसंद है। उनके लिए यात्राएं केवल सुकून का जरिया नहीं, बल्कि नए अनुभवों और कहानियों को खोजने का तरीका हैं।

चाहे वह किसी नए AI टूल की पड़ताल हो या किसी अनदेखी जगह की यात्रा.. प्राणेश का लक्ष्य हमेशा एक बेहतरीन कहानी बुनना ही होता है।

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