पैसों की तंगी से जूझ रही ChatGPT बनाने वाली OpenAI! कंपनी परेशान- आगे कैसे चलेगा काम, यूजर्स भी छोड़ रहे साथ

Apr 28, 2026 05:01 pm ISTArpit Soni लाइव हिन्दुस्तान
share

खबरें हैं कि ChatGPT बनाने वाली कंपनी OpenAI, पैसों की तंगी से गुजर रही है। कंपनी के लीडर्स में इस बात की चिंताएं बढ़ रही हैं कि क्या ओपनएआई की भारी-भरकम खर्च की योजनाएं आने वाले सालों में उसकी कमाई में होने वाली बढ़ोतरी के साथ तालमेल बिठा पाएंगी।

पैसों की तंगी से जूझ रही ChatGPT बनाने वाली OpenAI! कंपनी परेशान- आगे कैसे चलेगा काम, यूजर्स भी छोड़ रहे साथ

ChatGPT बनाने वाली कंपनी OpenAI, आज ​​AI की दुनिया के सबसे बड़े नामों में से एक है। लेकिन, जहां एक तरफ यह AI की वैश्विक दौड़ में सबसे आगे है, वहीं नई रिपोर्ट्स से पता चलता है कि कंपनी के अंदर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। पर्दे के पीछे की कहानी अलग है। खबरें हैं कि इस बात को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं कि क्या ओपनएआई की भारी-भरकम खर्च की योजनाएं आने वाले सालों में उसकी कमाई में होने वाली बढ़ोतरी के साथ तालमेल बिठा पाएंगी। 'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' की एक रिपोर्ट के अनुसार, ओपनएआई हाल ही में नए यूजर्स और कमाई, दोनों के मामले में अपने कुछ इंटरनल टारगेट्स को पूरा करने में पीछे रह गई है। बताया जा रहा है कि इस वजह से कंपनी के सीनियर लीडर्स के बीच इस बात पर चर्चा शुरू हो गई है कि क्या कंपनी अपने महंगे AI इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने के लिए लगातार फंडिंग जारी रख पाएगी।

कंप्यूटिंग कॉन्ट्रैक्ट के पेमेंट करने में आएगी दिक्क्त

इंडियो टूडे की रिपोर्ट के अनुसार, इन चिंताओं के केंद्र में चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर सारा फ्रायर हैं। रिपोर्ट का दावा है कि फ्रायर ने कंपनी के दूसरे लीडर्स से कहा है कि अगर रेवेन्यू तेजी से नहीं बढ़ा, तो ओपनएआई को भविष्य के कंप्यूटिंग कॉन्ट्रैक्ट के पेमेंट करने में मुश्किल हो सकती है। आसान शब्दों में कहें तो, कंपनी की महत्वाकांक्षाएं शायद आने वाले पैसे से ज्यादा तेजी से आगे बढ़ रही हैं।

यह इसलिए मायने रखता है, क्योंकि ओपनएआई के पैमाने पर AI सस्ता नहीं है। चैटजीपीटी जैसे एडवांस्ड मॉडल्स को ट्रेन करने और चलाने के लिए बड़े-बड़े डेटा सेंटर्स की जरूरत होती है, जो खास चिप्स, क्लाउड सर्वर्स और लगातार बिजली की खपत से भरे होते हैं। इस इंफ्रास्ट्रक्चर को बनाए रखने का खर्च अरबों डॉलर्स में आता है।

रेवेन्यू टारगेट चूके, ग्रोथ भी धीमी हुई

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि ओपनएआई इस साल की शुरुआत में अपने कई मंथली रेवेन्यू टारगेट को हासिल करने से चूक गया है। बताया जा रहा है कि कोडिंग टूल्स और एंटरप्राइज AI सर्विसेस के क्षेत्र में, जिन्हें AI कंपनियों के लिए कमाई के दो मुख्य जरियें माना जाता है, ओपनएआई ने अपने प्रतिद्वंद्वी एंथ्रोपिक के मुकाबले अपनी बढ़त कुछ हद तक खो दी है।

सब्सक्राइबर्स भी छोड़ रहे साथ

एक जबर्दस्त तेजी के बाद, अब चैटजीपीटी के यूजर ग्रोथ में भी सुस्ती आती दिख रही है। बताया जा रहा है कि ओपनएआई ने पिछले साल के आखिर तक 1 अरब वीकली एक्टिव यूजर्स तक पहुंचने का एक इंटरनल टारगेट तय किया था, लेकिन वह इस आंकड़े तक नहीं पहुंच पाई। यह भी कहा जा रहा है कि कंपनी को अपने सब्सक्राइबर्स के छोड़ने की समस्या का सामना करना पड़ रहा है, जिससे यह हिंट मिलता है कि AI मार्केट में बढ़ती प्रतिस्पर्धा अब अपना असर दिखाना शुरू कर चुकी है।

रिपोर्ट्स के बावजूद, ओपनएआई के नेतृत्व ने सार्वजनिक तौर पर अंदरूनी कलह की बात को सिरे से खारिज कर दिया है। रॉयटर्स को दिए एक बयान में, सीईओ सैम ऑल्टमैन और सारा फ्रायर ने कहा: "यह बात बेतुकी है। हम ज्यादा से ज्यादा कंप्यूट खरीदने और हर दिन मिलकर इस पर कड़ी मेहनत करने के मामले में पूरी तरह से एकमत हैं।"

ओपनएआई को शायद पैसों की दिक्कतें हो रही हैं

यह पहली बार नहीं है जब ओपनएआई के फाइनेंस से जुड़े सवाल सामने आए हैं। 'द इन्फॉर्मेशन' की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, इस बात पर कंपनी के भीतर ही मतभेद हैं कि उसे IPO के जरिए कब पब्लिक होना चाहिए।

खबरों के मुताबिक, फ्रायर सावधानी बरतने की सलाह दे रही हैं। उनका मानना ​​है कि ओपनएआई को पब्लिक मार्केट की जांच-परख के लिए तैयार होने में अभी और समय लग सकता है। IPO की तैयारी के लिए मजबूत इंटरनल सिस्टम, नियमों के पालन की तत्परता और स्टेबल फाइनेंशियल प्रोसेस की जरूरत होती है। रिपोर्ट के अनुसार, उन्हें लगता है कि इस काम का एक बड़ा हिस्सा अभी भी चल रहा है। हालांकि, कहा जा रहा है कि ऑल्टमैन लिस्टिंग की समय-सीमा को पहले करने के लिए ज्यादा तैयार हैं, संभवतः अगले साल के आखिर तक।

इसके साथ ही, ओपनएआई की खर्च करने की प्रतिबद्धताएं बहुत बड़ी बनी हुई हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी कैश-फ्लो पॉजिटिव होने से पहले $200 बिलियन से अधिक खर्च कर सकती है। यह भी बताया गया है कि कंपनी ने क्लाउड सर्वर क्षमता के लिए पांच सालों में $600 बिलियन से अधिक खर्च करने की प्रतिबद्धता जताई है।

इस तरह का खर्च दिखाता है कि AI की दौड़ कितनी तेज हो गई है। लेकिन यह एक मुश्किल सवाल भी खड़ा करता है - क्या दुनिया की सबसे चर्चित AI कंपनी भी इतनी तेजी से आगे बढ़ते रहने का खर्च उठा सकती है? खैर, इसका जवाब तो सिर्फ वक्त ही देगा।

Arpit Soni

लेखक के बारे में

Arpit Soni

अर्पित सोनी को शुरुआत से ही नए-नए गैजेट्स को एक्सप्लोर करने और उन्हें आजमाने का शौक रहा है। अब अर्पित ने अपनी इस हॉबी को ही अपना पेशा बना लिया है। भोपाल के रहने वाले अर्पित को नए-नए गैजेट्स का रिव्यू करना और उनके बारे में लिखना काफी पसंद है। टेक्नोलॉजी, रोबोट्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इनसे जुड़ी खबरें लिखना भी इन्हें काफी भाता है। लाइव हिन्दुस्तान में अर्पित पिछले चार साल से बतौर सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर काम कर रहे हैं। मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें करीब 9 साल का अनुभव है। अर्पित ने मीडिया जगत में शुरुआत एक रीजनल चैनल से की थी। इससे बाद उन्होंने नवभारत टाइम्स और दैनिक भास्कर की गैजेट्स बीट में काम किया। अर्पित की स्कूलिंग भोपाल से हुई है। उन्होंने कंप्यूटर साइंस से इंजीनियरिंग की है। मीडिया में झुकाव के चलते उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU) से पोस्ट ग्रेजुएशन करके मीडिया जगत में एंट्री की। मीडिया में इन्हें आठ साल से ज्यादा समय हो चुके हैं और सफर अभी जारी है। गैजेट्स के अलावा, इन्हें नई-नई जगहों पर घूमना और उनके बारे में जानने का भी बहुत शौक है।

और पढ़ें

लेटेस्ट   Hindi News ,    बॉलीवुड न्यूज,   बिजनेस न्यूज,   टेक ,   ऑटो,   करियर , और   राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।