
गूगल को कड़ी टक्कर देने की तैयारी में मेटा, जल्द लाएगा नए इमेज और वीडियो एआई मॉडल
मेटा (Meta) गूगल को कड़ी टक्कर देने की तैयारी कर रहा है। कंपनी अपने एआई प्रोग्राम को बड़ा रीसेट देने के मूड में है। इसके तहत मेटा साल 2026 के फर्स्ट हाफ में इमेज, वीडियो और टेक्स्ट के लिए नए मॉडल्स लाएगा। इसकी टक्कर
मेटा (Meta) गूगल को कड़ी टक्कर देने की तैयारी कर रहा है। कंपनी अपने एआई प्रोग्राम को बड़ा रीसेट देने के मूड में है। इसके तहत मेटा साल 2026 के फर्स्ट हाफ में इमेज, वीडियो और टेक्स्ट के लिए नए मॉडल्स लाएगा। इस प्रयास का नेतृत्व कंपनी की सुपरइंटेलिजेंस लैब कर रही है, जो रीस्ट्रक्चरिंग, लीडरशिप चेंज और बदलती प्राथमिकताओं से भरे एक उथल-पुथल भरे साल के बाद मेटा की सबसे महत्वपूर्ण इंटरनल एआई यूनिट के रूप में उभरी है।
मैंगो और एवोकाडो पर हो रहा काम
मेटा मैंगो नाम एक इमेज और वीडियो मॉडल पर काम कर रहा है। साथ ही वह एवोकाडो नाम एक अलग टेक्स्ट-बेस्ड सिस्टम को भी डिवेलप कर रहा है। हाल ही में एक कंपनी के एक इंटरनल सेशन के दौरान इन दोनों प्रोजेक्ट्स की रूपरेखा प्रस्तुत की गई, जहां सीनियर लीडरशिप ने मेटा की एआई महत्वाकांक्षाओं के लिए एक रिवाइज्ड रोडमैप शेयर किया। इन मॉडलों के जरिए कंपनी अपने प्रतिस्पर्धियों को कड़ी टक्कर देने का सोच रही है।
परफॉर्मेंस में सुधार करना आवश्यक
मेटा अपने प्रतिद्वंद्वियों से प्रतिस्पर्धा करने में पिछड़ रहा है। ऐसे में टेक्स्ट-बेस्ड मॉडल को कोडिंग से संबंधित कार्यों में एक महत्वपूर्ण सुधार के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। कोडिंग कैपेबिलिटी खासतौर से डिवेलपर्स और इंडस्ट्रीज के बीच बड़े लैंग्वेज मॉडल्स की प्रैक्टिकल यूज के मूल्यांकन का एक बेंचमार्क बन गया है। मेटा की लीडरशिप का मानना है कि यदि वह अपने एआई टूल्स को अपने खुद के इकोसिस्टम से बाहर गंभीरता से स्वीकार करवाना चाहती है, तो परफॉर्मेंस में सुधार करना आवश्यक है।
वर्ल्ड मॉडल पर भी कंपनी का फोकस
टेक्स्ट के अलावा मेटा तथाकथित वर्ल्ड मॉडल पर भी जोर दे रहा है। ये सिस्टम विजुअल इन्फर्मेशन को अधिक बेहतर ढंग से प्रोसेस करने और समझने के लिए डिजाइन किए गए हैं। हर संभव सिनेरियो पर पूरी तरह से ट्रेन होने की बजाय इनका लक्ष्य डाइनैमिक वातावरण में रीजनिंग, प्लानिंग और ऐक्ट करना है। यह बदलाव मेटा के भीतर इस व्यापक विश्वास को दर्शाता है कि भविष्य के एआई सिस्टम को पैटर्न की भविष्यवाणी से आगे बढ़कर प्रासंगिक समझ की ओर बढ़ना चाहिए जो अधिक ऑटोनोमस बिहेवियर का समर्थन कर सके।

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Kumar Prashant Singhलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




