AI ले लेगा CEO की जगह? मार्क जुकरबर्ग का ‘डिजिटल क्लोन’ बना रही है उनकी कंपनी Meta

Pranesh Tiwari लाइव हिन्दुस्तान
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Meta एक ऐसा AI अवतार तैयार कर रहा है जो Mark Zuckerberg की तरह बात कर सके और कर्मचारियों से कम्युनिकेट कर सके। हालांकि, इसे लेकर कई सवाल भी उठ रहे हैं। 

AI ले लेगा CEO की जगह? मार्क जुकरबर्ग का ‘डिजिटल क्लोन’ बना रही है उनकी कंपनी Meta

संभव है कि आने वाले दिनों में इंसानों की जगह उनके अवतार ले लें क्योंकि कई कंपनियां इसकी शुरुआत कर चुकी हैं। बीते दिनों सामने आए एक मामले में चीन की कंपनी ने अपनी पूर्व कर्मचारी का AI अवतार बना दिया, जो उसके इस्तीफे के बाद भी काम कर रहा है। अब पता चला है कि सबसे बड़ी सोशल मीडिया कंपनी Meta अपने CEO मार्क जुकरबर्ग का डिजिटल वर्जन बना सकती है। इस एक्सपेरिमेंटल प्रोजेक्ट को अनऑफीशियली Zuckerberg 2.0 कहा जा रहा है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, Meta एक ऐसा AI अवतार बना रही है जो Zuckerberg की तरह बात कर सके, सवालों के जवाब दे सके और कंपनी के कर्मचारियों के साथ कम्युनिकेट कर सके। यह सिस्टम कंपनी के अंदर मीटिंग्स, Q&A सेशन्स और इंटरनल कम्युनिकेशन में यूज किया जा सकता है। इसका सीधा मकसद यह है कि CEO हर जगह फिजिकली मौजूद ना होते हुए भी डिजिटली अवेलेबल रह सकें।

इस तरह तैयार किया जा रहा है अवतार

AI सिस्टम डिजिटल वर्जन को तैयार करने के लिए Zuckerberg के पब्लिक इंटरव्यू, स्पीच, कम्युनिकेशन स्टाइल और फैसले लेने के पैटर्न जैसे डाटा का इस्तेमाल किया जा रहा है। टेक्नोलॉजी के लेवल पर यह सिर्फ एक सिंपल चैटबॉट नहीं होगा, बल्कि एक Photorealistic AI अवतार होगा, जो रियल-टाइम कम्युनिकेशंस करने की क्षमता ऑफर करेगा। यानी कर्मचारियों को ऐसा एक्सपीरियंस मिल सकता है जैसे वे सीधे CEO से बात कर रहे हों।

Meta ने यह कदम अचानक नहीं उठाया है, बल्कि उसकी बड़ी AI स्ट्रेटजी का हिस्सा है। कंपनी पिछले कुछ वक्त से AI, वर्चुअल अवतार और ‘पर्सनल सुपरइंटेलिजेंस’ जैसे कॉन्सेप्ट्स पर तेजी से काम कर रही है। Zuckerberg खुद भी AI डेवलपमेंट में गहरा इंटरेस्ट ले रहे हैं और रिपोर्ट्स के मुताबिक वे इन प्रोजेक्ट्स में ऐक्टिवली शामिल हैं।

प्रोजेक्ट को लेकर उठ रहे हैं कुछ सवाल

हालांकि, इस प्रोजेक्ट को लेकर कई सवाल भी उठ रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या भविष्य में AI किसी इंसान की जगह ले सकता है? फिलहाल सामने आए फैक्ट्स से यह साफ है कि Meta का यह प्रोजेक्ट CEO को रिप्लेस करने के लिए नहीं, बल्कि उनकी डिजिटल प्रेजेंस को बढ़ाने के लिए है। यह अभी शुरुआती और एक्सपेरिमेंटल फेज में है।

इसके साथ ही, इस टेक्नोलॉजी से जुड़े जोखिम को भी अनदेखा नहीं किया जा सकता। अगर AI किसी इंसान की तरह बातें करने लगे, तो असली और नकली के बीच फर्क करना मुश्किल हो सकता है। इसके अलावा, अगर AI गलत जानकारी या फैसला देता है, तो उसके परिणाम गंभीर हो सकते हैं। साथ ही पर भी यह सवाल उठता है कि क्या किसी व्यक्ति की डिजिटल कॉपी बनाना सही है और इसका समाज पर क्या असर पड़ेगा।

Pranesh Tiwari

लेखक के बारे में

Pranesh Tiwari

प्राणेश वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां वे पिछले चार वर्षों से टेक्नोलॉजी सेक्शन का अहम हिस्सा हैं। खुद को दिल से लेखक और पेशे से पत्रकार मानने वाले प्राणेश के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में आठ वर्षों से अधिक का अनुभव है। उन्होंने अपने पूरे करियर में साइंस और टेक्नोलॉजी की जटिलताओं को आम पाठकों के लिए सरल, सहज और रोचक भाषा में प्रस्तुत करने पर विशेष ध्यान दिया है।

विशेषज्ञता और कार्यशैली
प्राणेश की विशेषज्ञता गैजेट्स, टेक इनसाइट्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे विषयों में है। वे तकनीकी बारीकियों और कठिन शब्दावली को इस तरह प्रस्तुत करते हैं कि एक सामान्य पाठक भी तेजी से बदलती डिजिटल दुनिया को आसानी से समझ सके। लेटेस्ट गैजेट्स का रिव्यू करना और नए मोबाइल ऐप्स के फीचर्स को आजमाना उनके काम का पसंदीदा हिस्सा है। उनकी लेखन शैली में स्पष्टता, रिसर्च और कहानी कहने का संतुलन देखने को मिलता है।

अब तक का सफर और उपलब्धियां
प्राणेश ने अपने प्रोफेशनल करियर की शुरुआत नवभारत टाइम्स ऑनलाइन से की। इसके बाद उन्होंने न्यूजबाइट्स (NewsBytes) में सीनियर टेक जर्नलिस्ट के रूप में काम किया, जहां उन्होंने तकनीकी रिपोर्टिंग में अपनी अलग पहचान बनाई। वे भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली के पूर्व छात्र हैं और अपनी प्रतिभा के लिए प्रतिष्ठित PTI अवॉर्ड से सम्मानित हो चुके हैं।

लेखन और व्यक्तिगत रुचियां
पत्रकारिता के साथ-साथ प्राणेश एक संवेदनशील और रचनात्मक लेखक भी हैं। लॉकडाउन के दौरान उन्होंने ‘सिर्फ दोस्त: नए जमाने की प्रेम कहानियां’ नामक लघुकथा संग्रह लिखा, जिसमें रिश्तों की बारीकियों को भावनात्मक रूप से प्रस्तुत किया गया है।

उन्हें स्मार्टफोन, कंज्यूमर टेक और डिजिटल इनोवेशन से जुड़े विषयों पर गहराई से रिसर्च करना और पढ़ना पसंद है। काम के अलावा, उन्हें यात्रा करना भी बेहद पसंद है। उनके लिए यात्राएं केवल सुकून का जरिया नहीं, बल्कि नए अनुभवों और कहानियों को खोजने का तरीका हैं।

चाहे वह किसी नए AI टूल की पड़ताल हो या किसी अनदेखी जगह की यात्रा.. प्राणेश का लक्ष्य हमेशा एक बेहतरीन कहानी बुनना ही होता है।

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