'लत' के चक्कर में फंसा Meta, अब देगा 1.59 लाख करोड़; इन यूजर्स को मिलेगा पैसा

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Meta social media addiction case: मेटा पर आरोप था कि उसने अपनी सर्विसेस इस तरह से डिजाइन की है कि बच्चों को उसकी लत लग जाएगा। मामाला कोर्ट पहुंच गया। अब कंपनी अमेरिका के कई राज्यों के साथ इस मामले को सुलझाने के लिए (लगभग 1.59 लाख करोड़ रुपये) तक का भुगतान करने पर सहमत हो गई है।

meta social media addiction case
Meta social media addiction case: मेटा पर आरोप था कि उसने प्लेटफॉर्म्स को इस तरह से डिजाइन किया कि बच्चे इनकी लत लग जाए। कंपनी ने बच्चों का निजी डेटा गलत तरीके से इकट्ठा किया।

Meta social media addiction case: फेसबुक और इंस्टाग्राम की पैरेंट कंपनी Meta का एक बड़ा झटका लगा है। बुधवार को कोर्ट में दाखिल दस्तावेजों के अनुसार, मेटा प्लेटफॉर्म्स इंक. अमेरिका के कई राज्यों के साथ सोशल मीडिया से जुड़े एक अहम मामले को सुलझाने के लिए (लगभग 1.59 लाख करोड़ रुपये) तक का भुगतान करने पर सहमत हो गई है। इस समझौते के तहत कंपनी को Facebook और Instagram जैसे अपने प्लेटफॉर्म्स पर नए सुरक्षा उपाय लागू करने होंगे। इनमें युवाओं के स्क्रॉलिंग के समय को सीमित करना और माता-पिता की सहमति के बिना कुछ खास सुरक्षा सेटिंग्स को बंद करने से उन्हें रोकना शामिल है। इस समझौते पर जज की मंजूरी जरूरी है। हालांकि, फिलहाल मेटा ने इस पर कोई जवाब नहीं दिया है।

यह समझौता कैलिफोर्निया के ओकलैंड में फेडरल कोर्ट में चल रहे जूरी ट्रायल के दूसरे हफ्ते में हुआ है, जो मेटा के लिए बहुत बड़ा जोखिम पैदा कर रहा था। 29 राज्यों के शीर्ष कानूनी अधिकारी जनता की ओर से न केवल भारी वित्तीय जुर्माना लगवाना चाहते थे, बल्कि ऐसे अदालती आदेश भी चाहते थे जो कंपनी को अपने प्लेटफॉर्म चलाने के तरीके को बदलने के लिए मजबूर कर सकें। ब्लूमबर्ग ने मंगलवार देर रात रिपोर्ट दी कि पक्षों ने ट्रायल के बीच में ही संभावित समझौते पर चर्चा की थी।

क्या था मामला

यह समझौता अमेरिका के कई राज्यों द्वारा लगाए गए उन आरोपों को सुलझाने के लिए किया गया है, जिनमें कहा गया था कि कंपनी ने इन प्लेटफॉर्म्स को इस तरह से डिजाइन किया कि बच्चे इनकी लत का शिकार हो जाएं, साथ ही कंपनी ने यूजर्स को उनकी सुरक्षा के बारे में गुमराह किया और बच्चों का निजी डेटा गलत तरीके से इकट्ठा किया। इस समझौते से अमेरिका के 29 राज्यों द्वारा उठाए गए मामले सुलझ जाएंगे और लंबे समय से चल रहे उस फेडरल ट्रायल का भी अंत हो जाएगा, जो सोशल मीडिया कंपनियों द्वारा युवा यूजर्स को नुकसान पहुंचाने के आरोपों की अब तक की सबसे चर्चित जांचों में से एक था।

अब बच्चों के लिए रोजाना इस्तेमाल की लिमिट तक करेगी कंपनी

मेटा, अब फेसबुक और इंस्टाग्राम इस्तेमाल करने वाले बच्चों के लिए रोजाना इस्तेमाल की लिमिट तय करेगी और रात के समय उनके इस्तेमाल पर रोक लगाएगी। साथ ही, कंपनी बच्चों को उम्र-लिमिट वाले कंटेंट तक पहुंचने से रोकने के उपाय भी मजबूत करेगी। कैलिफोर्निया के मेनलो पार्क में स्थित इस कंपनी ने समझौता करने के दौरान किसी भी तरह की गड़बड़ी से इनकार किया।

टीओआई की रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार को हुए समझौते से कैलिफोर्निया, इलिनोइस, न्यू मैक्सिको और वॉशिंगटन, D.C. द्वारा कैम्ब्रिज एनालिटिका स्कैंडल से जुड़े प्राइवेसी दावों पर किए गए मुकदमों का भी निपटारा हो गया है। इस स्कैंडल में कंसल्टिंग फर्म ने लाखों फेसबुक यूजर्स का पर्सनल डेटा इकट्ठा किया था। इन मुकदमों को सुलझाने के लिए उन राज्यों को 459.3 मिलियन डॉलर मिलेंगे। शुरुआती ट्रेडिंग में मेटा के शेयरों में 2.3% की बढ़त हुई। ये दावे उन मुकदमों का हिस्सा थे जो राज्यों, स्थानीय सरकारों, स्कूल डिस्ट्रिक्ट्स और लोगों द्वारा किए गए थे। इन मुकदमों में आरोप लगाया गया था कि मेटा और अन्य सोशल मीडिया कंपनियों ने देश भर में युवाओं की मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या को बढ़ावा दिया।

मेटा ने इकट्ठा किया बच्चों का पर्सनल डेटा

कंपनी पर यह भी आरोप था कि उसने माता-पिता को बताए बिना या उनकी सहमति के बिना उन यूजर्स से पर्सनल डेटा इकट्ठा किया, जिनके बारे में उसे पता था कि वे बच्चे हैं, और उस डेटा का उपयोग मशीन लर्निंग और जनरेटिव एआई मॉडल को प्रशिक्षित करने के लिए किया।

मेटा का लंबे समय से यह तर्क रहा है कि उसने लोगों को इस बात पर गुमराह नहीं किया कि उसकी सर्विसेस लत लगाने वाली हैं या नहीं, क्योंकि "सोशल मीडिया की लत" कोई मान्यता प्राप्त मानसिक बीमारी नहीं है। 18 अगस्त को सुनवाई शुरू होने से पहले, मेटा ने कहा था कि कैलिफोर्निया, कोलोराडो, केंटकी और न्यू जर्सी 1.4 ट्रिलियन डॉलर तक का जुर्माना मांग रहे थे। राज्यों ने कहा कि यह आंकड़ा 200 बिलियन डॉलर के करीब होगा।

मानसिक स्वास्थ्य का संकट

मेटा, स्नैपचैट और उसकी पैरेंट कंपनी स्नैप, यूट्यूब और उसकी पैरेंट कंपनी अल्फाबेट, और टिकटॉक और उसकी पैरेंट कंपनी बाइटडांस को अभी भी फेडरल और राज्य की अदालतों में हजारों मुकदमों का सामना करना पड़ रहा है। इन मुकदमों में आरोप है कि उन्होंने जानबूझकर अपने प्लेटफॉर्म पर ऐसे फीचर बनाए जिनसे बच्चे और टीनएजर्स उनकी लत का शिकार हो जाते हैं, जिससे मानसिक स्वास्थ्य का संकट पैदा हो रहा है। टेनेसी की ओर से मेटा के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर नैशविल में पिछले महीने सुनवाई शुरू हुई।

ओकलैंड में U.S. डिस्ट्रिक्ट जज यवोन गोंजालेज रोजर्स के सामने कई फेडरल केस एक साथ मिला दिए गए। इनमें आम लोगों, स्कूल डिस्ट्रिक्ट और राज्य सरकारों द्वारा दायर किए गए मुकदमे शामिल हैं। इस साल की शुरुआत में, न्यू मैक्सिको द्वारा दायर एक अहम मुकदमे के दोनों चरणों में मेटा को हार का सामना करना पड़ा। मार्च में एक जूरी ने मेटा को $375 मिलियन का भुगतान करने का आदेश दिया, क्योंकि यह पाया गया कि उसने अपने प्लेटफॉर्म की सुरक्षा के बारे में यूजर्स को गुमराह किया था। 6 अगस्त को, एक जज ने पाया कि मेटा ने 'पब्लिक न्यूसेंस' (जनता के लिए परेशानी) पैदा की थी और उसे अतिरिक्त $567 मिलियन का भुगतान करने और युवाओं की सुरक्षा के उपाय लागू करने का आदेश दिया। मार्च में ही, मेटा और गूगल के खिलाफ एक व्यक्ति के दावों पर पहला मुकदमा वादी के पक्ष में फैसले के साथ समाप्त हुआ। लॉस एंजिल्स की एक जूरी ने कंपनियों को वादी केली G.M. के डिप्रेशन और एंग्जायटी के लिए जिम्मेदार पाया और उन्हें कुल $6 मिलियन का हर्जाना देने का आदेश दिया।

Arpit Soni

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अर्पित सोनी को शुरुआत से ही नए-नए गैजेट्स को एक्सप्लोर करने और उन्हें आजमाने का शौक रहा है। अब अर्पित ने अपनी इस हॉबी को ही अपना पेशा बना लिया है। भोपाल के रहने वाले अर्पित को नए-नए गैजेट्स का रिव्यू करना और उनके बारे में लिखना काफी पसंद है। टेक्नोलॉजी, रोबोट्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इनसे जुड़ी खबरें लिखना भी इन्हें काफी भाता है। लाइव हिन्दुस्तान में अर्पित पिछले चार साल से बतौर सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर काम कर रहे हैं। मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें करीब 9 साल का अनुभव है। अर्पित ने मीडिया जगत में शुरुआत एक रीजनल चैनल से की थी। इससे बाद उन्होंने नवभारत टाइम्स और दैनिक भास्कर की गैजेट्स बीट में काम किया। अर्पित की स्कूलिंग भोपाल से हुई है। उन्होंने कंप्यूटर साइंस से इंजीनियरिंग की है। मीडिया में झुकाव के चलते उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU) से पोस्ट ग्रेजुएशन करके मीडिया जगत में एंट्री की। मीडिया में इन्हें आठ साल से ज्यादा समय हो चुके हैं और सफर अभी जारी है। गैजेट्स के अलावा, इन्हें नई-नई जगहों पर घूमना और उनके बारे में जानने का भी बहुत शौक है।

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