AI कभी नहीं कर सकता ये जॉब्स! ये नौकरियों करने वालों को डरने की कोई जरूरत नहीं
आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल अलग-अलग क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रहा है। इसकी वजह से हजारों नौकरियां गई हैं और आगे भी इनके जाने की उम्मीद है। हालांकि, कुछ ऐसे काम हैं जो AI कभी नहीं कर सकता।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने दुनिया भर में काम करने के तरीके को बदल दिया है। कंटेंट राइटिंग से लेकर डाटा एनालिसिस और कस्टमर सपोर्ट तक, कई सेक्टर तेजी से ऑटोमेशन की ओर बढ़ रहे हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या AI हमारी नौकरियां छीन लेगा? जवाब सीधा नहीं है। सच यह है कि कुछ जॉब्स पर AI का असर जरूर पड़ेगा, लेकिन कुछ काम ऐसे हैं जिन्हें AI पूरी तरह कभी नहीं कर सकता।
इंसानी देखभाल से जुड़े काम
नर्स, शिक्षक, केयरगिवर और साइकोलॉजिस्ट्स जैसी जॉब्स में टेक्नोलॉजी मददगार तो हो सकती है, लेकिन पूरी तरह इंसानों की जगह नहीं ले सकती। उदाहरण के लिए, मरीज को सिर्फ दवा नहीं भरोसा भी चाहिए होता है। एक छोटे बच्चे को सिर्फ कोर्स नहीं, गाइडेंस और इमोशनल सपोर्ट भी चाहिए होता है। यहां AI सलाह दे सकता है लेकिन सपोर्ट का असली एक्सपीरियंस इंसान ही दे सकता है।
फील्ड और स्किल पर आधारित काम
प्लंबर, इलेक्ट्रिशियन, मैकेनिक और कंस्ट्रक्शन वर्क से जुड़े कुशल वर्कर्स का काम हर दिन नई परिस्थितियों में होता है। असली दुनिया कंट्रोल्ड लैब जैसी नहीं होती। मुश्किल जगहें, अचानक आई खराबी और मौके पर फैसले लेना, ये सब एक्सपीरियंस और व्यावहारिक समझ मांगते हैं। रोबोटिक्स में प्रगति हो रही है, लेकिन इतने अलग और मौजूदा माहौल में AI का पूरी तरह से ऐसे काम संभाल लेना अभी बहुत दूर की बात है।
लीडरशिप और जिम्मेदारी वाले पद
CEO, इंडस्ट्रियलिस्ट, पॉलिटिकल लीडर या क्राइसिस मैनेजमेंट ऑफिसल जैसे रोल सिर्फ डाटा पर आधारित नहीं होते। यहां फैसले जोखिम, नैतिकता और जवाबदेही से जुड़े होते हैं। AI एनालिसिस तो कर सकता है, लेकिन आखिरी जिम्मेदारी इंसान की होती है। गलती होने पर जवाबदेही भी इंसान की ही तय की जा सकती है।
मुश्किल फैसलों और भरोसे पर आधारित काम
कोर्टरूम में वकील की दलील, अंतरराष्ट्रीय मंच पर डिप्लोमैट की बातचीत या पारिवारिक विवाद सुलझाने वाला काउंसलर, इन सभी भूमिकाओं में भावनाओं, मनोविज्ञान और स्थिति की नाजुक समझ की जरूरत होती है। AI डाटा तो पढ़ सकता है लेकिन सामने बैठे व्यक्ति की झिझक, गुस्से या डर को उसी गहराई से समझना अभी उसके बस की बात नहीं है। यही वजह है कि ऐसी जॉब्स एकदम सुरक्षित हैं।
कुल मिलाकर, AI रूटीन और बार-बार दोहराए जाने वाले काम तेजी से अपने हाथ में ले रहा है। डाटा एंट्री, बेसिक एनालिसिस, ऑटोमेटेड कस्टमर सपोर्ट जैसे क्षेत्रों में यह बदलाव साफ दिख रहा है, लेकिन जिन नौकरियों में क्रिएटिव सोच, मुश्किल फैसलों, नैतिक जिम्मेदारी और मानवीय जुड़ाव शामिल हैं, वे अभी एकदम सेफ हैं।
लेखक के बारे में
Pranesh Tiwariप्राणेश तिवारी पिछले चार साल से लाइव हिन्दुस्तान में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर टेक्नोलॉजी सेक्शन का हिस्सा हैं। खुद को दिल से लेखक और पेशे से पत्रकार मानने वाले प्राणेश, आठ साल से ज्यादा वक्त से साइंस और टेक्नोलॉजी की दुनिया को शब्दों में ढाल रहे हैं। गैजेट्स इनसाइट्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) उनकी एक्सपर्टीज हैं, जहां वह मुश्किल टेक्नोलॉजी को सरल और असरदार भाषा में पाठकों तक पहुंचाते हैं। लेटेस्ट गैजेट्स रिव्यू करना और नए ऐप्स पर वक्त बिताना उन्हें जॉब का पसंदीदा हिस्सा लगता है।
करियर की शुरुआत नवभारत टाइम्स ऑनलाइन से करने वाले प्राणेश ने न्यूजबाइट्स में सीनियर टेक जर्नलिस्ट के रूप में भी भूमिका निभाई। लॉकडाउन में 'सिर्फ दोस्त: नए जमाने की प्रेम कहानियां' लघुकथा संग्रह भी लिखा। IIMC, नई दिल्ली में PTI अवॉर्ड से सम्मानित प्राणेश ने स्मार्टफोन, AI, कंज्यूमर टेक और डिजिटल इनोवेशन जैसे विषयों पर गहराई से तथ्यात्मक रिपोर्टिंग की है। काम के अलावा उन्हें लिखना और सफर करना पसंद है, दोनों ही उनके लिए दुनिया को समझने और कहानियों में बदलने का जरिया हैं।
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