अभी नहीं खरीदा TV तो पछताओगे? SPPL के CEO अवनीत सिंह मारवाह के साथ खास बातचीत
भारतीय TV इंडस्ट्री इस समय बढ़ती लागत, ग्लोबल तनाव और डिमांड स्लोडाउन के दबाव में है। वहीं, बड़े स्क्रीन और स्मार्ट TV की मांग तेजी से बढ़ रही है, जिससे बाजार का फोकस 55 और 65 इंच कैटेगरी की तरफ शिफ्ट हो रहा है।

भारतीय कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री, खासकर टेलीविजन मार्केट इस समय एक बेहद चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रहा है। इस बदलाव और इसके असर को समझने के लिए लाइव हिन्दुस्तान ने SPPL के CEO अवनीत सिंह मारवाह के साथ बात की। उन्होंने कहा कि पिछले 6 से 8 महीनों में इंडस्ट्री पर इतना दबाव बना है कि इसे ‘सर्वाइवल फेज’ कहना गलत नहीं होगा। कच्चे माल की कीमतों में तेज उछाल, ग्लोबल टेंशन और डिमांड में अनिश्चितता, तीनों ने मिलकर इंडस्ट्री के लिए हालात मुश्किल कर दिए हैं।
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अवनीत ने बताया कि फिलहाल सबसे बड़ी चिंता कच्चे माल की लागत को लेकर है। प्लास्टिक पाउडर जैसे बेसिक इनपुट की कीमतों में भारी उछाल आया है और कुछ मामलों में यह बढ़ोतरी कई गुना तक पहुंच गई है। इसका सीधा असर प्रोडक्ट की लागत और कंपनियों के मार्जिन पर पड़ा है। कंपनियां अपनी वर्किंग कैपिटल का बड़ा हिस्सा उत्पादन में लगा चुकी हैं, जिससे फाइनेंशियल प्रेशर बढ़ गया है। हालांकि, कई कंपनियां इस स्थिति को खुलकर सामने नहीं ला रहीं, क्योंकि इससे मार्केट में घबराहट और निवेशकों का भरोसा डगमगा सकता है।
मिडिल ईस्ट का तनाव भी जिम्मेदार
SPPL CEO ने बताया कि पूरे मौजूदा संकट में वैश्विक परिस्थितियों की भी बड़ी भूमिका है। उन्होंने बताया कि मिडिल ईस्ट में तनाव और अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन में आईं रुकावटों का असर भारत जैसे देशों पर सीधे पड़ता है, जो अभी भी इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स के लिए इंपोर्ट पर निर्भर हैं। ऐसे में लागत बढ़ना और सप्लाई से जुड़ी अनिश्चित होना कंपनियों के लिए दोहरी चुनौती बन गया है।
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मारवाह के मुताबिक, जब मार्केट में तनाव होता है तो लोग खरीदारी टाल देते हैं और सिर्फ जरूरत पड़ने पर ही खर्च करते हैं। लेकिन जैसे ही स्थिति सुधरती है, अचानक 'कंपल्सिव बाइंग' शुरू हो जाती है। फिलहाल टीवी मार्केट में डिमांड का बड़ा हिस्सा नए ग्राहकों से नहीं, बल्कि पुराने टीवी को अपग्रेड करने वाले यूजर्स से आ रहा है।
तेजी से बदल रही है कस्टमर्स की पसंद
ग्राहकों की पसंद को लेकर अवनीत ने कहा, दिलचस्प बात यह है कि ग्राहकों की पसंद भी तेजी से बदल रही है। अब लोग छोटे टीवी से बड़े स्क्रीन की तरफ शिफ्ट हो रहे हैं। 43 इंच अभी भी सबसे ज्यादा बिकने वाली कैटेगरी है, लेकिन 55 और 65 इंच की मांग तेजी से बढ़ रही है। यह बदलाव सिर्फ डिस्काउंट के चलते नहीं, बल्कि बेहतर व्यूइंग एक्सपीरियंस की चाहत का रिजल्ट है। छोटे घरों के बावजूद अब लोग बड़े स्क्रीन को प्राथमिकता दे रहे हैं।
उन्होंने कहा कि स्मार्ट टीवी की बढ़ती मांग के पीछे सस्ते इंटरनेट की बड़ी भूमिका है। Reliance Jio के आने के बाद डाटा की कीमतों में कमी आई और इंटरनेट की पहुंच छोटे शहरों और गांवों तक बढ़ी। इसके चलते OTT और YouTube जैसे प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल बढ़ा, जिससे टियर-2 और टियर-3 शहरों में भी स्मार्ट टीवी तेजी से लोकप्रिय हुए हैं।
टीवी पैनलों के लिए अब भी निर्भरता
वहीं, मैन्युफैक्चरिंग की बात करें तो भारत अभी पूरी तरह आत्मनिर्भर नहीं बन पाया है। मारवाह ने बताया कि भारत में ज्यादातर काम असेंबली का होता है, जबकि मुख्य कंपोनेंट्स अब भी बाहर से आते हैं। हालांकि सरकार की नीतियों और लोकलाइजेशन के प्रयासों से कुछ बदलाव जरूर हुए हैं, लेकिन टीवी पैनल जैसे अहम हिस्सों के लिए अभी भी चीन और ताइवान पर निर्भरता बनी हुई है। ऐसे में ‘मेक इन इंडिया’ को मजबूत करने के लिए बैकवर्ड इंटीग्रेशन पर और काम करने की जरूरत है।
उनका मानना है कि भारतीय मार्केट को लेकर कई कंपनियां गलत धारणा बना रही हैं। उनके अनुसार, भारत अभी भी एक मास-मार्केट है, जहां प्रीमियम सेगमेंट बहुत छोटा है। यही वजह है कि खासकर जो प्रीमियम ब्रैंड्स अफॉर्डेबिलिटी की रेस में उतर रहे हैं, वे अपनी पोजिशनिंग को नुकसान पहुंचा सकते हैं। उनका कहना है कि हर ब्रैंड को अपने सेगमेंट पर फोकस करना चाहिए।
मीडियम सेगमेंट पर कंपनी का फोकस
कंपनी की स्ट्रेटजी की बात करें तो SPPL ने Thomson और Kodak जैसे ब्रैंड्स के जरिए मार्केट में अपनी पकड़ बनाई है। इसका मकसद ग्राहकों के बीच भरोसा बनाना और तेजी से मार्केट शेयर हासिल करना है। उन्होंने बताया कि कंपनी का फोकस फिलहाल मिड और मिड-प्रीमियम सेगमेंट पर है, जहां डिमांड सबसे ज्यादा है।
साथ ही आने वाले महीनों में कीमतों को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है। मारवाह के मुताबिक, कंपनियां कोशिश करेंगी कि ग्राहकों पर ज्यादा बोझ ना पड़े, लेकिन अगर कच्चे माल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो प्राइस बढ़ाना उनके लिए मजबूरी हो सकता है। ऐसे में ब्रैंड्स के लिए सबसे बड़ा संतुलन यही होगा कि वे अपने मार्जिन को भी बचाएं और ग्राहकों को भी न खोएं।
लेखक के बारे में
Pranesh Tiwariप्राणेश वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां वे पिछले चार वर्षों से
टेक्नोलॉजी सेक्शन का अहम हिस्सा हैं। खुद को दिल से लेखक और पेशे से पत्रकार मानने वाले प्राणेश के पास पत्रकारिता के
क्षेत्र में आठ वर्षों से अधिक का अनुभव है। उन्होंने अपने पूरे करियर में साइंस और टेक्नोलॉजी की जटिलताओं को आम पाठकों के
लिए सरल, सहज और रोचक भाषा में प्रस्तुत करने पर विशेष ध्यान दिया है।
विशेषज्ञता और कार्यशैली
प्राणेश की विशेषज्ञता गैजेट्स, टेक इनसाइट्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे विषयों में है। वे तकनीकी बारीकियों और
कठिन शब्दावली को इस तरह प्रस्तुत करते हैं कि एक सामान्य पाठक भी तेजी से बदलती डिजिटल दुनिया को आसानी से समझ सके। लेटेस्ट
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रिसर्च और कहानी कहने का संतुलन देखने को मिलता है।
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प्राणेश ने अपने प्रोफेशनल करियर की शुरुआत नवभारत टाइम्स ऑनलाइन से की। इसके बाद उन्होंने न्यूजबाइट्स (NewsBytes) में
सीनियर टेक जर्नलिस्ट के रूप में काम किया, जहां उन्होंने तकनीकी रिपोर्टिंग में अपनी अलग पहचान बनाई। वे भारतीय जनसंचार
संस्थान (IIMC), नई दिल्ली के पूर्व छात्र हैं और अपनी प्रतिभा के लिए प्रतिष्ठित PTI अवॉर्ड से सम्मानित हो चुके हैं।
लेखन और व्यक्तिगत रुचियां
पत्रकारिता के साथ-साथ प्राणेश एक संवेदनशील और रचनात्मक लेखक भी हैं। लॉकडाउन के दौरान उन्होंने ‘सिर्फ दोस्त: नए जमाने की
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खोजने का तरीका हैं।
चाहे वह किसी नए AI टूल की पड़ताल हो या किसी अनदेखी जगह की यात्रा.. प्राणेश का लक्ष्य हमेशा एक बेहतरीन कहानी बुनना ही
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