सोशल मीडिया चलाने के लिए उम्र तय करने वाली है भारत सरकार, मिले बड़े संकेत

Feb 17, 2026 06:06 pm ISTPranesh Tiwari लाइव हिन्दुस्तान
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भारत सरकार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ नाबालिगों के लिए एज बेस्ड रिस्ट्रिक्शन और एज वेरिफिकेशन सिस्टम लागू करने पर चर्चा कर रही है। संभव है कि यूजर्स के लिए एक न्यूनतम उम्र तय की जाए। 

सोशल मीडिया चलाने के लिए उम्र तय करने वाली है भारत सरकार, मिले बड़े संकेत

भारत में सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव और बच्चों पर उसके असर को लेकर अब सरकार गंभीर होती दिख रही है। हाल ही में भारत सरकार ने संकेत दिया है कि वह मुख्य सोशल मीडिया कंपनियों के साथ उम्र पर आधारित प्रतिबंध (Age Restrictions) को लेकर बात कर रही है। ऐसा करने के पीछे नाबालिगों को ऑनलाइन खतरों, सोशल मीडिया की लत और भ्रामक कंटेंट से बचाना वजह बताए जा रहे हैं।

IT मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हाल ही में अपने बयान में कहा कि सरकार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ इस बात पर चर्चा कर रही है कि किस उम्र के बच्चों को इन प्लेटफॉर्म्स तक ऐक्सेस मिलना चाहिए और किस तरह की सुरक्षा व्यवस्था लागू की जानी चाहिए। हालांकि अभी तक कोई फाइनल कानून या नियम घोषित नहीं किया गया है, लेकिन सरकार इस दिशा में मजबूत नीति बनाने की तैयारी में है।

इसलिए उम्र तय करना चाहती है सरकार

सरकार की चिंता की मुख्य वजह यह है कि कम उम्र के बच्चे बिना किसी ठोस वेरिफिकेशन के सोशल मीडिया पर अकाउंट बना लेते हैं। इससे वे साइबर बुलिंग, फेक न्यूज, डीपफेक वीडियो और अवैध कंटेंट के संपर्क में आ सकते हैं। भारत का यह कदम ग्लोबल ट्रेंड्स से भी जुड़ा है। हाल ही में ऑस्ट्रेलिया ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया यूजेस पर कड़े नियम लागू करने का प्रस्ताव रखा है। वहां प्लेटफॉर्म्स को एज वेरिफिकेशन करना होगा और ऐसा ना करने पर भारी जुर्माना भरना पड़ सकता है।

इसी तरह UK समेत कई यूरोपीय देश भी बच्चों की ऑनलाइन सेफ्टी को लेकर कड़े कानूनों पर विचार कर रहे हैं। इन देशों में एल्गोरिदमिक कंटेंट, सोशल मीडिया की लत पैदा करने वाले फीचर्स और डाटा प्राइवेसी को लेकर बहस तेज हो गई है।

कितनी हो सकती है यूजर्स की न्यूनतम उम्र?

फिलहाल सरकार और सोशल मीडिया कंपनियों के बीच बातचीत जारी है। यह साफ नहीं है कि न्यूनतम आयु सीमा 13, 16 या इससे ज्यादा तय की जाएगी। लेकिन इतना पक्का है कि आने वाले समय में भारत में सोशल मीडिया यूजेस को लेकर बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। नई पॉलिसी लागू होने पर डिजिटल कल्चर और ऑनलाइन बिहेवियर पर असर देखने को मिल सकता है और डिजिटल फ्रीडम को लेकर बहस भी छिड़ सकती है।

बता दें, एक्सपर्ट्स का मानना है कि सिर्फ एज लिमिट तय करना ही काफी नहीं होगा। इसके साथ मजबूत वेरिफिकेशन सिस्टम, पैरेंटल कंट्रोल, और प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही तय करना भी जरूरी होगा। साथ ही यह भी तय करना होगा कि एज वेरिफिकेशन का प्रोसेस यूजर्स की प्राइवेसी का उल्लंघन ना करे।

Pranesh Tiwari

लेखक के बारे में

Pranesh Tiwari

प्राणेश तिवारी पिछले चार साल से लाइव हिन्दुस्तान में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर टेक्नोलॉजी सेक्शन का हिस्सा हैं। खुद को दिल से लेखक और पेशे से पत्रकार मानने वाले प्राणेश, आठ साल से ज्यादा वक्त से साइंस और टेक्नोलॉजी की दुनिया को शब्दों में ढाल रहे हैं। गैजेट्स इनसाइट्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) उनकी एक्सपर्टीज हैं, जहां वह मुश्किल टेक्नोलॉजी को सरल और असरदार भाषा में पाठकों तक पहुंचाते हैं। लेटेस्ट गैजेट्स रिव्यू करना और नए ऐप्स पर वक्त बिताना उन्हें जॉब का पसंदीदा हिस्सा लगता है।
करियर की शुरुआत नवभारत टाइम्स ऑनलाइन से करने वाले प्राणेश ने न्यूजबाइट्स में सीनियर टेक जर्नलिस्ट के रूप में भी भूमिका निभाई। लॉकडाउन में 'सिर्फ दोस्त: नए जमाने की प्रेम कहानियां' लघुकथा संग्रह भी लिखा। IIMC, नई दिल्ली में PTI अवॉर्ड से सम्मानित प्राणेश ने स्मार्टफोन, AI, कंज्यूमर टेक और डिजिटल इनोवेशन जैसे विषयों पर गहराई से तथ्यात्मक रिपोर्टिंग की है। काम के अलावा उन्हें लिखना और सफर करना पसंद है, दोनों ही उनके लिए दुनिया को समझने और कहानियों में बदलने का जरिया हैं।

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