भरोसेमंद जर्नलिज्म खुद को लगातार नहीं कर सकता फंड, बड़ी टेक कंपनियों के AI मॉडल बढ़ा रहे चिंता

Feb 17, 2026 01:01 pm ISTKumar Prashant Singh लाइव हिन्दुस्तान
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एआई मॉडल्स को ट्रेनिंग देने के लिए बड़ी टेक कंपनियां न्यूज पब्लिशर्स के ओरिजिनल कॉन्टेंट को बेझिझक यूज कर रही हैं। इससे यूजर ट्रैफिक काफी प्रभावित हो रहा है और यह सब बिना वैल्यू शेयर किए किया जा रहा है।

भरोसेमंद जर्नलिज्म खुद को लगातार नहीं कर सकता फंड, बड़ी टेक कंपनियों के AI मॉडल बढ़ा रहे चिंता

न्यूज पब्लिशर्स बड़ी टेक कंपनियों के एआई प्लैटफॉर्म्स के काम करने के तरीके को लेकर काफी समय से आवाज उठा रहे हैं। पुराने न्यूज पब्लिशर्स के साथ नए न्यूज पब्लिशर्स कुछ समय से एक स्ट्रक्चर डैमेज झेल रहे हैं। यह पिछले एक साल में साफ तौर से दिखाई दे रहा है। एआई मॉडल्स को ट्रेनिंग देने के लिए बड़ी टेक कंपनियां न्यूज पब्लिशर्स के ओरिजिनल कॉन्टेंट को बेझिझक यूज कर रही हैं। इससे यूजर ट्रैफिक काफी प्रभावित हो रहा है और यह सब बिना वैल्यू शेयर किए किया जा रहा है। इस बारे में डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन (DNPA) ने इलेक्ट्रॉनिक्स और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी मंत्रालय (MeitY) के इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 में AI and Media: Opportunities, Responsible Pathways, and the Road Ahead (एआई और मीडिया: मौके, जिम्मेदार रास्ते और आगे का रास्ता) पर एक लीडरशिप पैनल डिस्कशन किया।

साथ आए प्रभावशाली न्यूज ऑर्गनाइजेशन के सीनियर लीडर

इस सेशन में भारत के सबसे प्रभावशाली न्यूज ऑर्गनाइजेशन के सीनियर लीडर्स के साथ-साथ ग्लोबल पब्लिशिंग रिप्रेजेंटेशन भी एकसाथ आए। इसका मकसद यह देखना था कि कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पत्रकारिता को कैसे बदल रहा है और भारत को इस बदलाव को जिम्मेदारी से कैसे आकार देना चाहिए। पैनल को EY के मीडिया और एंटरटेनमेंट पार्टनर आशीष फेरवानी ने मॉडरेट किया। इसमें इंडिया टुडे ग्रुप की वाइस चेयरपर्सन और एग्जीक्यूटिव एडिटर-इन-चीफ कली पुरी, दैनिक भास्कर ग्रुप के डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर पवन अग्रवाल, अमर उजाला ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर तन्मय माहेश्वरी, बेनेट कोलमैन एंड कंपनी लिमिटेड के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर मोहित जैन, द हिंदू ग्रुप के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर नवनीत एल.वी. और इंटरनेशनल न्यूज मीडिया एसोसिएशन (INMA) के डिजिटल प्लेटफॉर्म इनिशिएटिव्स लीड रॉबर्ट वाइटहेड शामिल थे।

'AI तय कर रहा है कि इन्फर्मेशन कैसे क्रिएट किया जाए'

DNPA की सेक्रेटरी जनरल सुजाता गुप्ता ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यह फिर से तय कर रहा है कि इन्फर्मेशन कैसे क्रिएट किया जाए, कैसे डिस्ट्रीब्यूट किया जाए और कैसे उस पर भरोसा किया जाए। भारत जैसे कई और लोकतंत्र में जर्नलिज्म सिर्फ कॉटेंट नहीं, बल्कि यह एक डेमोक्रेटिक इंफ्रास्ट्रक्चर है। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे भारत अपनी AI कैपेबिलिटीज बना रहा है, अकाउंटेबिलिटी, एट्रिब्यूशन और इंस्टीट्यूशनल ट्रस्ट बुनियादी बने रहने चाहिए। चर्चा तेजी से इस बात पर आ गई कि क्या AI सिस्टम में जर्नलिज्म को दूसरे कॉटेंट से अलग ट्रीट किया जाना चाहिए। इस बात पर आम सहमति थी कि न्यूज के नतीजे एंगेजमेंट मेट्रिक्स से कहीं ज्यादा होते हैं।

यह चुनाव, बाजार, सोशल स्टेबिलिटी और नेशनल सिक्योरिटी पर असर डालता है। जर्नलिज्म कोई फ्री-फ्लोटिंग इंटरनेट इनपुट नहीं है, बल्कि इन्वेस्टमेंट, एडिटोरियल ओवरसाइट और अकाउंटेबिलिटी से बनाई गई इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी है। मोहित जैन ने कहा कि जब AI जानकारी को कमोडिटी बनाना शुरू कर देता है, तो भरोसा कम हो जाता है और यही कमी वैल्यू बनाती है। न्यूज़रूम में AI अडॉप्शन में ह्यूमन जजमेंट के रोल पर जोर दिया गया। AI मदद कर सकता है, लेकिन अकाउंटेबिलिटी का हमेशा एक नाम होना चाहिए। कली पुरी ने कहा कि अगर AI सिस्टम जर्नलिज्म को समराइज और रीडिस्ट्रिब्यूट करते हैं, तो वे पब्लिक डिस्कोर्स में हिस्सा ले रहे हैं और उन्हें ज्यादा सावधानी से रखा जाना चाहिए।

इंटरनेशनल डेवलपमेंट्स भी बातचीत का एक अहम हिस्सा

इंटरनेशनल डेवलपमेंट्स भी इस बातचीत का एक अहम हिस्सा रहा। यूरोपियन यूनियन का AI ऐक्ट AI-जेनरेटेड कॉन्टेंट के लिए लेबलिंग को इंट्रोड्यूस करता है। फ्रांस और जर्मनी ने पड़ोसी राइट्स फ्रेमवर्क को ऑपरेशनलाइज किया है, जिसके तहत टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म्स को जर्नलिस्टिक कॉन्टेंट के इस्तेमाल के लिए पब्लिशर्स के साथ कम्पेनसेशन एग्रीमेंट पर बातचीत करनी होती है। ऑस्ट्रेलिया के न्यूज मीडिया बार्गेनिंग कोड ने प्लेटफॉर्म्स और पब्लिशर्स के बीच कमर्शियल बातचीत को जरूरी बना दिया है, जिससे अच्छी-खासी रेमुनरेशन डील्स होती हैं। साउथ अफ्रीका भी ऐसे ही तरीके अपना रहा है। जबकि, नॉर्वे ने जर्नलिज्म सस्टेनेबिलिटी को सपोर्ट करने के लिए स्ट्रक्चर्ड फंडिंग मैकेनिज्म अपनाए हैं। ये ग्लोबल बदलाव यह दिखाते हैं कि प्रोफेशनल जर्नलिज्म AI सिस्टम्स के लिए एक बेसिक इनपुट है और इसे उसी हिसाब से वैल्यू दी जानी चाहिए।

पब्लिशर्स की वेबसाइटों से ट्रैफिक हटा रहीं AI-ड्रिवन समरीज

सर्च एनवायर्नरमेंट में AI-ड्रिवन समरीज पहले से ही कई मार्केट्स में पब्लिशर्स की वेबसाइटों से ट्रैफिक हटा रही हैं। इससे भरोसेमंद रिपोर्टिंग को बनाए रखने वाले रेवेन्यू मॉडल्स कमजोर हो रहे हैं। रॉबर्ट व्हाइटहेड ने कहा कि अगर जर्नलिज्म AI सिस्टम्स की एक्यूरेसी को फंड करता है, तो उस वैल्यू के लिए सही पहचान और रेमुनरेशन होना चाहिए। मेहनताने के अलावा, पैनलिस्ट ने भारत की स्ट्रक्चरल असलियत पर भी जोर दिया। विदेशी भाषा के मॉडल अक्सर भारतीय भाषाओं में अच्छा परफॉर्म नहीं करते और रीजनल बारीकियों को समझने में नाकाम रहते हैं। भारत को एक ही और एक जैसे ऑडियंस के तौर पर नहीं देखा जा सकता। पवन अग्रवाल ने कहा कि टियर-2 और टियर-3 भारत देश की डेमोग्राफिक ताकत की रीढ़ हैं और AI सिस्टम को भाषाई विविधता और कल्चरल कॉन्टेक्स्ट को दिखाना चाहिए।

यूजर्स को सही जानकारी पाने का अधिकार

यूजर्स को सही जानकारी पाने का अधिकार है। आने वाले कल को बचाने के लिए आज भारतीय डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर, रीजनल लैंग्वेज कैपेबिलिटी और ट्रेसेबिलिटी मैकेनिज्म में इन्वेस्ट करने की जरूरत है। तन्मय माहेश्वरी ने कहा कि बुनियादी इंफ्रास्ट्रक्चर के बिना सही AI सॉवरेनिटी हासिल नहीं की जा सकती। चर्चा में मौके पर भी बात हुई। AI आर्काइव्स को गहरा कर सकता है, कॉन्टेक्स्टुअल जर्नलिज्म को बढ़ा सकता है, न्यूजरूम की एफिशिएंसी में सुधार कर सकता है और सब्सक्रिप्शन मॉडल को मजबूत कर सकता है। हालांकि, भरोसा टेक्नोलॉजी से नहीं बनता। यह इंस्टीट्यूशन बनाते हैं। नवनीत एल.वी. ने कहा कि चुनौती यह पक्का करना है कि AI लंबे समय की क्रेडिबिलिटी को बढ़ाए, न कि उसे खत्म करे।

भरोसेमंद जर्नलिज्म खुद को लगातार फंड नहीं कर सकता

पूरे पैनल में एक जैसी थीम टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म और पब्लिशर्स के बीच स्ट्रक्चर्ड बातचीत की जरूरत थी। अगर AI समरी की वजह से ट्रैफिक कम हो जाता है और ओरिजिनल रिपोर्टिंग को बिना किसी एट्रिब्यूशन के एनॉनिमस आउटपुट में मिला दिया जाता है, तो भरोसेमंद जर्नलिज्म खुद को लगातार फंड नहीं कर सकता। AI के दौर में जर्नलिज्म को बनाए रखने के लिए रेसिप्रोसिटी, एट्रिब्यूशन और कमर्शियल फेयरनेस पर आधारित ट्रांसपेरेंट पार्टनरशिप जरूरी हैं। सेशन इस बात पर खत्म हुआ कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बहुत बड़े मौके और बड़ी जिम्मेदारी दोनों देता है। जैसे-जैसे भारत अपने AI के लक्ष्यों को तेजी से बढ़ा रहा है, वैसे-वैसे पत्रकारिता को एक भरोसेमंद पब्लिक गुड के तौर पर सुरक्षित रखना होगा, ताकि यह पक्का हो सके कि टेक्नोलॉजी की तरक्की डेमोक्रेटिक मजबूती के साथ हो।

Kumar Prashant Singh

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प्रशांत को पत्रकारिता से जुड़े 13 साल से ज्यादा हो गए हैं। प्रशांत ने करियर की शुरुआत टीवी न्यूज चैनल से की थी। इन्होंने टीवी चैनल के प्रोग्रामिंग, आउटपुट और प्रोमो डिपार्टमेंट में काम किया है। करीब 8 साल से यह डिजिटल मीडिया से जुड़े हैं। प्रशांत अब डिजिटल मीडिया का जाना-माना नाम बन चुके हैं। इनकी टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल में खास रुचि है। इन्हें गैजेट्स और गाड़ियों के बारे में लिखना और पढ़ना काफी पसंद है। इनकी गैजेट्स और ऑटोमोबाइल की खबरें पाठकों को काफी पसंद आती हैं। साथ ही इनके रिव्यू पाठकों को नया गैजेट लेने या नई गाड़ी खरीदने में काफी मदद करते हैं। प्रशांत ने मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी से की है। खाली समय में प्रशांत वेब सीरीज और मूवी देखते हैं। ड्राइविंग का काफी शौक है और मौका मिलते ही प्रशांत पहाड़ों की तरफ निकल जाते हैं। साथ ही फोन से अच्छे फोटो-वीडियो कैप्चर करना भी इनको काफी पसंद है। प्रशांत लाइव हिन्दुस्तान में बतौर डिप्टी चीफ कॉन्टेंट प्रोड्यूसर काम कर रहे हैं। इससे पहले प्रशांत नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में टेक सेक्शन के लिए लिखा करते थे।

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