दिन-रात फोन देखते रहने की आदत से परेशान हैं आप? ये टिप्स दिलाएंगे छुटकारा

Aug 15, 2024 06:16 pm IST
Pranesh Tiwari लाइव हिन्दुस्तान

अगर आप उन लोगों में से हैं, जिन्हें दिन-रात फोन देखने की बुरी आदत लग गई है तो इसमें सुधार जरूरी है। तय करें कि फोन में मिलने वाले फीचर्स की मदद से स्क्रीन-टाइम कम किया जाए और हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाया जाए।

दिन-रात फोन देखते रहने की आदत से परेशान हैं आप? ये टिप्स दिलाएंगे छुटकारा

क्या आप अपने स्मार्टफोन के साथ बहुत अधिक समय बिताते हैं? अगर हां, तो आप अकेले नहीं हैं। आजकल, हम सभी अपने फोन पर बहुत अधिक समय बिताते हैं। खबरों से लेकर सोशल मीडिया तक, सब कुछ हमारी उंगलियों के इशारे पर उपलब्ध है। लेकिन, यह सब हमारे मानसिक स्वास्थ्य और प्रोडक्टिविटी को कम कर सकता है। इसके लिए आप डिजिटल वेलबीइंग की मदद ले सकते हैं।

डिजिटल वेलबीइंग क्या है?

डिजिटल वेलबीइंग एक ऐसा तरीका है जिसकी मदद से हम टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल को बैलेंस कर सकते हैं। यह हमें यह समझने में मदद करता है कि हम अपने फोन का उपयोग कैसे और कितना करते हैं, और हमें अपने जीवन में संतुलन बनाने में मदद करता है। सभी एंड्रॉयड यूजर्स को इस फीचर का ऐक्सेस सेटिंग्स सेक्शन में मिलता है।

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स्मार्टफोन का इस्तेमाल कम करने के तरीके

अपने फोन का यूजेस ट्रैक करें

ज्यादातर स्मार्टफोन में एक डिजिटल वेलबीइंग फीचर मिलता है, जो आपको यह देखने में मदद करता है कि आप अपने फोन को कितना यूज करते हैं। आप यह देख सकते हैं कि आप कौन से ऐप्स का सबसे ज्यादा इस्तेमाल करते हैं और आप कितने वक्त तक के लिए स्क्रीन देखते हैं।

नोटिफिकेशंस मैनेज करें

नोटिफिकेशंस हमें हर वक्त परेशान करते रहते हैं। आप उन ऐप्स के नोटिफिकेशंस को बंद कर सकते हैं जिनका उपयोग आप बहुत ज्यादा करते हैं।

स्क्रीन टाइम लिमिट्स सेट करें

आप अपने फोन पर कुछ ऐप्स के लिए स्क्रीन टाइम लिमिट्स सेट कर सकते हैं। ऐसा करने के बाद जब आप अपनी तय लिमिट तक पहुंच जाते हैं, तो आपका फोन आपको नोटिफिकेशन दिखाकर ऐप बंद करने के लिए करेगा।

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डिजिटल डिटॉक्स का दिन तय करें

सप्ताह में एक दिन अपने फोन का इस्तेमाल ना या कम से कम करने की कोशिश करें। आप किताब पढ़ सकते हैं, कहीं घूमने जा सकते हैं या फिर दोस्तों और परिवार के साथ वक्त बिता सकते हैं।

सोने से पहले फोन का उपयोग ना करें

नींद के लिए एक अच्छी आदत है कि सोने से कम से कम एक घंटे पहले अपने फोन का उपयोग ना करें। स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू रेज नींद को प्रभावित कर सकती हैं। यानी कि फोन का ज्यादा इस्तेमाल आपकी सेहत के लिए अच्छा नहीं है।

लेखक के बारे में

Pranesh Tiwari

प्राणेश वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां वे पिछले चार वर्षों से टेक्नोलॉजी सेक्शन का अहम हिस्सा हैं। खुद को दिल से लेखक और पेशे से पत्रकार मानने वाले प्राणेश के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में आठ वर्षों से अधिक का अनुभव है। उन्होंने अपने पूरे करियर में साइंस और टेक्नोलॉजी की जटिलताओं को आम पाठकों के लिए सरल, सहज और रोचक भाषा में प्रस्तुत करने पर विशेष ध्यान दिया है।

विशेषज्ञता और कार्यशैली
प्राणेश की विशेषज्ञता गैजेट्स, टेक इनसाइट्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे विषयों में है। वे तकनीकी बारीकियों और कठिन शब्दावली को इस तरह प्रस्तुत करते हैं कि एक सामान्य पाठक भी तेजी से बदलती डिजिटल दुनिया को आसानी से समझ सके। लेटेस्ट गैजेट्स का रिव्यू करना और नए मोबाइल ऐप्स के फीचर्स को आजमाना उनके काम का पसंदीदा हिस्सा है। उनकी लेखन शैली में स्पष्टता, रिसर्च और कहानी कहने का संतुलन देखने को मिलता है।

अब तक का सफर और उपलब्धियां
प्राणेश ने अपने प्रोफेशनल करियर की शुरुआत नवभारत टाइम्स ऑनलाइन से की। इसके बाद उन्होंने न्यूजबाइट्स (NewsBytes) में सीनियर टेक जर्नलिस्ट के रूप में काम किया, जहां उन्होंने तकनीकी रिपोर्टिंग में अपनी अलग पहचान बनाई। वे भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली के पूर्व छात्र हैं और अपनी प्रतिभा के लिए प्रतिष्ठित PTI अवॉर्ड से सम्मानित हो चुके हैं।

लेखन और व्यक्तिगत रुचियां
पत्रकारिता के साथ-साथ प्राणेश एक संवेदनशील और रचनात्मक लेखक भी हैं। लॉकडाउन के दौरान उन्होंने ‘सिर्फ दोस्त: नए जमाने की प्रेम कहानियां’ नामक लघुकथा संग्रह लिखा, जिसमें रिश्तों की बारीकियों को भावनात्मक रूप से प्रस्तुत किया गया है।

उन्हें स्मार्टफोन, कंज्यूमर टेक और डिजिटल इनोवेशन से जुड़े विषयों पर गहराई से रिसर्च करना और पढ़ना पसंद है। काम के अलावा, उन्हें यात्रा करना भी बेहद पसंद है। उनके लिए यात्राएं केवल सुकून का जरिया नहीं, बल्कि नए अनुभवों और कहानियों को खोजने का तरीका हैं।

चाहे वह किसी नए AI टूल की पड़ताल हो या किसी अनदेखी जगह की यात्रा.. प्राणेश का लक्ष्य हमेशा एक बेहतरीन कहानी बुनना ही होता है।

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