'हाईजैक' हो जाएगा WhatsApp, गलती से भी ऐसे मत करना लॉगइन, घात लगाकर बैठे हैकर
Hackers का एक समूह WhatsApp यूजर्स को निशाना बना रहा है। खबर है कि, रूस के तीन संदिग्ध साइबर जासूसी समूह अलग-अलग फिशिंग तकनीकों का इस्तेमाल करके लोगों को धोखा दे रहे हैं और उनके अकाउंट का एक्सेस हासिल कर रहे हैं।

गूगल ने एक नए साइबर हमले को लेकर चेतावनी जारी की है, जिसमें शक है कि रूसी हैकर्स यूजर्स के ऑनलाइन अकाउंट्स पर कब्जा करने के लिए असली लॉगिन और ऑथेंटिकेशन सिस्टम का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। ये हमले यूरोप और अमेरिका में सरकार, डिफेंस, एयरोस्पेस, एकेडेमिया और थिंक टैंक में काम करने वाले लोगों को निशाना बना रहे हैं। गूगल थ्रेट इंटेलिजेंस ग्रुप (GTIG) के अनुसार, रूस के तीन संदिग्ध साइबर जासूसी समूह अलग-अलग फिशिंग तकनीकों का इस्तेमाल करके लोगों को धोखा दे रहे हैं और उनके अकाउंट का एक्सेस हासिल कर रहे हैं।
लोगों को ऐसे फंसा रहे हैकर्स
UNC6293, UNC7005 और UNC5976 के रूप में ट्रैक किए गए समूह नकली लॉगिन पेज, OAuth ऑथेंटिकेशन, ऐप पासवर्ड और कॉम्प्रोमाइज अकाउंट्स से डिवाइस लिंकिंग का उपयोग कर रहे हैं। जो चीज इन हमलों को विशेष रूप से खतरनाक बनाती है वह यह है कि लॉगिन प्रक्रिया एकदम असली जैसी दिख सकती है।
यूजर्स से साफ तौर पर फेक वेबसाइट पर पासवर्ड डालने के लिए कहने के बजाय, हैकर्स पीड़ितों को असली ऑथेंटिकेशन पेजों पर भेजते हैं और फिर लॉगिन प्रोसेस का गलत इस्तेमाल करके एक्सेस टोकन हासिल करते हैं या अपने डिवाइस को लिंक कर लेते हैं। गूगल ने कहा है कि UNC7005 डिवाइस-कोड फिशिंग के जरिए Microsoft और WhatsApp अकाउंट्स को निशाना बना रहा है।
कुछ मामलों में, पीड़ितों को ऐसे ईमेल मिलते हैं जो जरूरी मीटिंग, कॉल या डिप्लोमैटिक इवेंट के निमंत्रण जैसे लगते हैं। इन ईमेल में दिए गए लिंक उन्हें ऐसी वेबसाइटों पर ले जाते हैं जिन्हें असली ऑर्गनाइजेशन की वेबसाइट जैसा बनाया गया होता है।
यह ग्रुप नकली WhatsApp पेजों का भी इस्तेमाल कर रहा है
रिपोर्ट के अनुसार, पीड़ितों से उनका फोन नंबर डालने के लिए कहा जाता है और फिर उन्हें WhatsApp डिवाइस-लिंकिंग का असली QR कोड या कोड दिखाया जाता है। अगर पीड़ित निर्देशों का पालन करता है, तो हमलावर अपने डिवाइस को पीड़ित के वॉट्सऐप अकाउंट से लिंक कर सकता है।
वॉट्सऐप अकाउंट लिंक होने के बाद भी खतरा खत्म नहीं होता। गूगल ने पाया कि इनमें से कुछ फिशिंग पेजों ने पीड़ितों को फेक कॉल, चैट या फाइल डाउनलोड करने के लिए उकसाने की कोशिश की।
एक मामले में, पेज पर मौजूद मैलिशियस कोड यूजर के कैमरा और माइक्रोफोन का एक्सेस ले सकता था और रिकॉर्ड किए गए ऑडियो और वीडियो को हमलावरों को भेज सकता था।
Microsoft अकाउंट्स को भी निशाना बना रहे हैकर
हैकर डिवाइस-कोड फिशिंग के जरिए माइक्रोसॉफ्ट अकाउंट्स को भी निशाना बना रहे हैं। गूगल के मुताबिक, UNC7005 ने ऐसी वेबसाइटें बनाई हैं जो अलग-अलग ऑर्गनाइजेशन और इवेंट्स की नकल करती हैं और फिर पीड़ितों से एक कथित पहचान वेरिफिकेशन प्रोसेस पूरा करने के लिए कहती हैं।
एक और ग्रुप OAuth फिशिंग ट्रिक का इस्तेमाल कर रहा है। इसमें लोगों को फेक फाइल-शेयरिंग पेज दिखाए जाते हैं और उनसे गूगल के जरिए आगे बढ़ने के लिए कहा जाता है। इसके बाद उन्हें असली गूगल लॉगिन पेज पर ले जाया जाता है। ऑथेंटिकेशन के बाद, हमलावर ऑथेंटिकेशन टोकन चुराने और उसका इस्तेमाल करके अकाउंट का एक्सेस पाने की कोशिश करते हैं।
गूगल ने कहा है कि उसे पूरा भरोसा है कि तीनों ग्रुप्स का रूस से कनेक्शन है; यह बात उनके टारगेट करने के तरीकों, फिशिंग थीम्स और टेक्निकल तरीकों के आधार पर कही गई है।
यूजर्स को सलाह दी जाती है कि वे अचानक आने वाले डिवाइस-लिंकिंग रिक्वेस्ट, वेरिफिकेशन कोड या लॉगिन प्रॉम्प्ट को स्वीकार न करें, भले ही वे असली दिखने वाली साइन-इन प्रोसेस के दौरान दिखाई दें। उन्हें यह भी सावधानीपूर्वक चेक करना चाहिए कि कोई वेबसाइट उन्हें वेरिफाई करने के लिए क्यों कह रही है और अनजान ईमेल या मैसेज के माध्यम से आए लॉगिन निर्देशों का पालन करने से बचें।


