फोन मैन्युफैक्चरिंग में बजेगा भारत का डंका, ₹62500 करोड़ की नई स्कीम लाई सरकार, 60 हजार को मिलेगी रोजगार

लाइव हिन्दुस्तान
Follow us on Google News
share

भारत सरकार 62,500 करोड़ रुपये की नई मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (MPMS) लेकर आई है। स्कीम के तहत, भारतीय हैंडसेट ब्रांड 5 प्रतिशत के ज्यादा इंसेंटिव के लिए एलिजिबल होंगे, क्योंकि सरकार उन घरेलू कंपनियों को सपोर्ट करना चाहती है जो विदेशी बाजारों में अपना विस्तार करना चाहती हैं।

mobile manufacturing scheme
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने बताया कि यह स्कीम मौजूदा फाइनेंशियल ईयर से शुरू होगी और 1 अप्रैल, 2026 से लागू होगी। यह फाइनेंशियल ईयर 2031 तक चलेगी।

सरकार ने 21 अगस्त को 62,500 करोड़ रुपये की मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (MPMS) की घोषणा की। इसके तहत पांच साल का इंसेंटिव प्रोग्राम शुरू किया गया है, जिसका मकसद हैंडसेट का प्रोडक्शन बढ़ाना और मैन्युफैक्चरर्स को ज्यादा से ज्यादा पार्ट्स और सब-असेंबली स्थानीय स्तर पर खरीदने के लिए प्रोत्साहित करना है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने बताया कि यह स्कीम मौजूदा फाइनेंशियल ईयर से शुरू होगी और 1 अप्रैल, 2026 से लागू होगी। यह फाइनेंशियल ईयर 2031 तक चलेगी।

मैन्युफैक्चरर्स को मिलेगा 5% तक इंसेंटिव

इस स्कीम के तहत, भारत में बने मोबाइल फोन की योग्य बिक्री पर मैन्युफैक्चरर्स को 2.25% से 5% तक का इंसेंटिव मिलेगा। कंपनियां खास कंपोनेंट्स और सब-असेंबली को घरेलू स्तर पर सोर्स करके 1.5% तक का अतिरिक्त इंसेंटिव भी पा सकती हैं। कैबिनेट से मंजूर इस फ्रेमवर्क में भारतीय ब्रांड बनाने के मकसद से प्रोडक्ट डिजाइन और रिसर्च एंड डेवलपमेंट के लिए योग्य बिक्री पर 3% का अतिरिक्त इंसेंटिव भी दिया जाएगा।

कृष्णन ने कहा कि भारतीय हैंडसेट ब्रांड 5 प्रतिशत के ज्यादा इंसेंटिव के लिए एलिजिबल होंगे, क्योंकि सरकार उन घरेलू कंपनियों को सपोर्ट करना चाहती है जो विदेशी बाजारों में अपना विस्तार करना चाहती हैं।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 15 जुलाई को 62,500 करोड़ रुपये के बजट वाली नई स्कीम को मंजूरी दी। सरकार ने अपने पांच साल के कार्यकाल में कुल मिलाकर लगभग 39 लाख करोड़ रुपये के मोबाइल फोन प्रोडक्शन और करीब 60,000 डायरेक्ट नौकरियों का अनुमान लगाया है।

PLI 1.0 ने प्रोडक्शन और इन्वेस्टमेंट के लक्ष्यों को पार किया

यह स्कीम 'बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम' (PLI-LSEM) की तर्ज पर है, जिसकी अवधि 31 मार्च, 2026 को खत्म हो गई थी। पहले वाले प्रोग्राम का मुख्य मकसद बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और मोबाइल फोन प्रोडक्शन को बढ़ाना था।

कृष्णन द्वारा शेयर किए गए आंकड़ों के अनुसार, PLI 1.0 के तहत मोबाइल फोन का प्रोडक्शन 8.12 लाख करोड़ रुपये के लक्ष्य के मुकाबले 11.61 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया।

उन्होंने कहा कि इस प्रोग्राम के तहत निवेश 20,500 करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया, जबकि इसका लक्ष्य 7,000 करोड़ रुपये था। पहले वाली PLI स्कीम ने सैमसंग और भारत में ऐप्पल डिवाइस बनाने वाली कंपनियों समेत दुनिया भर की हैंडसेट बनाने वाली और कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों को आकर्षित किया था। कृष्णन ने बताया कि PLI 1.0 के लॉन्च होने के बाद से भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम में लगभग 14 अरब डॉलर का निवेश हुआ है, और मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग से अब लगभग 12 लाख लोगों को रोजगार मिल रहा है।

सरकार का ध्यान अब लोकलाइजेशन पर है

अगले चरण में देश में बनने वाले कंपोनेंट्स और सब-असेंबली की हिस्सेदारी बढ़ाने पर ज्यादा जोर दिया जाएगा। कृष्णन ने बताया कि मोबाइल फोन बनाने में घरेलू स्तर पर वैल्यू एडिशन लगभग 15 प्रतिशत से बढ़कर 23 प्रतिशत हो गया है। MPMS के तहत अतिरिक्त सोर्सिंग इंसेंटिव का मकसद मैन्युफैक्चरर्स को अपनी घरेलू सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए प्रोत्साहित करना है।

सरकार का कहना है कि भारत अब मोबाइल फोन बनाने के मामले में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश है और देश में इस्तेमाल होने वाले 99.2 प्रतिशत मोबाइल फोन यहीं बनाए जाते हैं।

कृष्णन ने कहा कि 2014 और 2025 के बीच मोबाइल फोन के एक्सपोर्ट में 166 गुना बढ़ोतरी हुई, और इसकी सालाना कंपाउंड ग्रोथ रेट 59 प्रतिशत रही। उन्होंने आगे कहा कि FY26 में भारत के कुल इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सपोर्ट में मोबाइल फोन की हिस्सेदारी लगभग 61 प्रतिशत थी।

MeitY के अनुसार, 2025 में भारत से सबसे ज्यादा एक्सपोर्ट किए जाने वाले प्रोडक्ट कैटेगरी के तौर पर स्मार्टफोन के उभरने के बाद MPMS में बदलाव किया गया है।

कृष्णन ने कहा कि इस नई योजना का मकसद भारत के मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग उद्योग के दायरे और ग्लोबल कॉम्पिटिटिवनेस को बढ़ाना है, साथ ही घरेलू सप्लाई चेन को भी मजबूत करना है।

Arpit Soni

लेखक के बारे में

Arpit Soni

अर्पित सोनी को शुरुआत से ही नए-नए गैजेट्स को एक्सप्लोर करने और उन्हें आजमाने का शौक रहा है। अब अर्पित ने अपनी इस हॉबी को ही अपना पेशा बना लिया है। भोपाल के रहने वाले अर्पित को नए-नए गैजेट्स का रिव्यू करना और उनके बारे में लिखना काफी पसंद है। टेक्नोलॉजी, रोबोट्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इनसे जुड़ी खबरें लिखना भी इन्हें काफी भाता है। लाइव हिन्दुस्तान में अर्पित पिछले चार साल से बतौर सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर काम कर रहे हैं। मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें करीब 9 साल का अनुभव है। अर्पित ने मीडिया जगत में शुरुआत एक रीजनल चैनल से की थी। इससे बाद उन्होंने नवभारत टाइम्स और दैनिक भास्कर की गैजेट्स बीट में काम किया। अर्पित की स्कूलिंग भोपाल से हुई है। उन्होंने कंप्यूटर साइंस से इंजीनियरिंग की है। मीडिया में झुकाव के चलते उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU) से पोस्ट ग्रेजुएशन करके मीडिया जगत में एंट्री की। मीडिया में इन्हें आठ साल से ज्यादा समय हो चुके हैं और सफर अभी जारी है। गैजेट्स के अलावा, इन्हें नई-नई जगहों पर घूमना और उनके बारे में जानने का भी बहुत शौक है।

और पढ़ें

लेटेस्ट   Hindi News ,    बॉलीवुड न्यूज,   बिजनेस न्यूज,   टेक ,   ऑटो,   करियर , और   राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।

Hindi Newsगैजेट्स न्यूज़फोन मैन्युफैक्चरिंग में बजेगा भारत का डंका, ₹62500 करोड़ की नई स्कीम लाई सरकार