अजब-गजब: पहली बार ऑपरेशन थिएटर में 'ह्यूमनॉइड रोबोट', कर दी गॉल ब्लैडर की सर्जरी, डॉक्टर्स भी हैरान

लाइव हिन्दुस्तान
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आप Humanoid Robots को फैक्ट्री में काम करते, होटल में खाना परोसते देखा या सुना होगा। लेकिन अब वो दिन दूर नहीं जब रोबोट आपको ऑपरेशन थिएटर में बड़े स्तर पर दिखेंगे। हाल ही में रोबोट्स ने एक पैशेंट की गॉल ब्लैडर की सफल सर्जरी की है।

humanoid robots perform surgery in ot

इंसानों जैसे चलने-फिरने वाले ह्यूमनॉइड रोबोट अब ऑपरेशन थिरटर तक पहुंच गए हैं और लोगों की सर्जरी तक करने लग गए हैं। हाल के सालों में, ह्यूमनॉइड रोबोट बाजार में काफी लोकप्रिय हो गए हैं। लेकिन क्या आपने कभी किसी ह्यूमनॉइड रोबोट के मेडिकल सर्जरी करने के बारे में सुना है? सुनने यह अजीब लग सकता है लेकिन यह सच है। पहली बार, डॉक्टरों ने दूर से कंट्रोल किए जाने वाले ह्यूमनॉइड रोबोट की मदद से दो सर्जरी पूरी की हैं। 'नेचर' में छपी स्टडी "इन विवो फीजिबिलिटी स्टडी ऑफ ह्यूमनॉइड रोबोट्स इन सर्जरी" से पता चला है कि यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया सैन डिएगो के इंजीनियरों और सर्जनों की एक टीम ने दिखाया है कि टेली-ऑपरेटेड ह्यूमनॉइड रोबोट प्री-क्लिनिकल ट्रायल के दौरान सफलतापूर्वक लाइव मिनिमली इनवेसिव सर्जरी कर सकते हैं।

रोबोट ने की गॉल ब्लैडर की सफल सर्जरी

एक सर्जरी में, एक ह्यूमनॉइड रोबोट और असिस्टेंट के तौर पर काम कर रहे एक इंसानी सर्जन की टीम ने सफलतापूर्वक गॉल ब्लैडर निकालने का ऑपरेशन किया। दूसरी सफल सर्जरी दो ह्यूमनॉइड रोबोट की टीम ने साथ मिलकर की, जिन्हें सर्जन दूर से कंट्रोल कर रहे थे। ये दोनों ऑपरेशन बड़े नॉन-प्राइमेट स्तनधारी जानवरों पर किए गए।

5 फीट ऊंचे और 24Kg वजनी हैं रोबोट

पता चला है कि इस स्टडी में इस्तेमाल किए गए रोबोट, जिन्हें 'सर्जी' (Surgie) नाम दिया गया है, 5 फीट ऊंचे हैं और उनका वजन 60 पाउंड (यानी करीब 27 किलोग्राम) है। इन रोबोट्स को खास तौर पर बनाए गए सर्जिकल हार्डवेयर के बजाय आम लैप्रोस्कोपिक इंस्ट्रूमेंट्स के साथ काम करने के लिए डिजाइन किया गया था। यह नई कामयाबी ह्यूमनॉइड रोबोट्स को लैब में होने वाले डेमो और नकली सर्जिकल एक्सरसाइज से आगे ले जाती है। रिसर्च टीम ने यह पता लगाया कि मौजूदा ह्यूमनॉइड सिस्टम असल सर्जिकल माहौल में जरूरी स्टैंडर्ड्स के कितने करीब हैं।

यह देखा गया कि ह्यूमनॉइड रोबोट मौजूदा ऑपरेशन रूम के माहौल में काम कर सकते थे। हालांकि, शोधकर्ताओं को 'सर्जी' (Surgie) से पारंपरिक सर्जिकल टूल्स पकड़वाने के लिए अडैप्टर बनाने पड़े, फिर भी ह्यूमनॉइड रोबोट को कंट्रोल करना उन्हें ज्यादा स्वाभाविक लगा।

ग्रामीण इलाकों और युद्ध के मैदान में मिलेगा फायदा

UC सैन डिएगो स्कूल ऑफ मेडिसिन में सर्जरी के एक असिस्टेंट प्रोफेसर ने कहा, "इसकी लागत बहुत कम है और यह ऑपरेशन रूम में बहुत कम जगह लेता है। इसलिए इसे कहीं भी इस्तेमाल करना आसान है - चाहे वह ग्रामीण इलाका हो, युद्ध का मैदान हो या फिर अंतरिक्ष ही क्यों न हो।"

कई देशों में हेल्थकेयर सिस्टम सर्जनों की कमी से जूझ रहे हैं, इससे मरीजों के इलाज में देरी होती है, असमानताएं बढ़ती हैं और बहुत सरी समस्याएं होती हैं। ह्यूमनॉइड रोबोट के इस्तेमाल से इस समस्या से निपटा जा सकता है और ज्यादा से ज्यादा रोगियों और स्थानों तक हेल्थकेयर सर्विसेज का विस्तार किया जा सकता है।

OT में यह काम भी कर सकते हैं रोबोट

इस बड़ी कामयाबी के अलावा, रिसर्चर्स को कुछ बदलाव भी करने पड़े; जैसे सर्जरी के दौरान रोबोट को कई बार री-कैलिब्रेट करना पड़ा और लेटेंसी (काम में लगने वाले समय) को भी बेहतर किया जा रहा है। रिसर्चर्स ने 'सर्जी' (surgie) के लिए एक अलग भूमिका भी खोजी - यह सर्जन्स के लिए टूल्स ला सकता है और ऑपरेशन के बाद ऑपरेटिंग रूम की सफाई भी कर सकता है।

Arpit Soni

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Arpit Soni

अर्पित सोनी को शुरुआत से ही नए-नए गैजेट्स को एक्सप्लोर करने और उन्हें आजमाने का शौक रहा है। अब अर्पित ने अपनी इस हॉबी को ही अपना पेशा बना लिया है। भोपाल के रहने वाले अर्पित को नए-नए गैजेट्स का रिव्यू करना और उनके बारे में लिखना काफी पसंद है। टेक्नोलॉजी, रोबोट्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इनसे जुड़ी खबरें लिखना भी इन्हें काफी भाता है। लाइव हिन्दुस्तान में अर्पित पिछले चार साल से बतौर सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर काम कर रहे हैं। मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें करीब 9 साल का अनुभव है। अर्पित ने मीडिया जगत में शुरुआत एक रीजनल चैनल से की थी। इससे बाद उन्होंने नवभारत टाइम्स और दैनिक भास्कर की गैजेट्स बीट में काम किया। अर्पित की स्कूलिंग भोपाल से हुई है। उन्होंने कंप्यूटर साइंस से इंजीनियरिंग की है। मीडिया में झुकाव के चलते उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU) से पोस्ट ग्रेजुएशन करके मीडिया जगत में एंट्री की। मीडिया में इन्हें आठ साल से ज्यादा समय हो चुके हैं और सफर अभी जारी है। गैजेट्स के अलावा, इन्हें नई-नई जगहों पर घूमना और उनके बारे में जानने का भी बहुत शौक है।

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