ChatGPT की ट्रेनिंग के लिए कॉपीराइटेड कंटेंट यूज कर सकता है OpenAI? दिल्ली हाई कोर्ट का फैसला
दिल्ली हाई कोर्ट ने OpenAI और ANI के बीच कॉपीराइट विवाद में ChatGPT की AI ट्रेनिंग को लेकर अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट के फैसले से OpenAI को बड़ी राहत मिली है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया में कॉपीराइट को लेकर चल रही बहस के बीच दिल्ली हाई कोर्ट का एक बड़ा फैसला सामने आया है। कोर्ट ने OpenAI और समाचार एजेंसी ANI के बीच चल रहे विवाद में OpenAI को राहत देते हुए कहा है कि मौजूदा मामले में ChatGPT की ट्रेनिंग के लिए ANI के कॉपीराइटेड कंटेंट के इस्तेमाल को कॉपीराइट उल्लंघन नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने इस इस्तेमाल को भारतीय कॉपीराइट कानून में मौजूद रिसर्च से जुड़े ‘फेयर डीलिंग’ के दायरे में माना है।
मामला नवंबर, 2024 में उस समय सामने आया था, जब समाचार एजेंसी Asian News International (ANI) ने OpenAI के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया। ANI का आरोप था कि OpenAI ने उसकी प्रकाशित खबरों और अन्य कॉपीराइटेड कंटेंट का इस्तेमाल ChatGPT को ट्रेन करने के लिए बिना अनुमति किया।
समाचार एजेंसी ने यह भी दावा किया था कि ChatGPT कई बार ANI के नाम से ऐसी खबरें या जानकारी पेश करता है, जो वास्तव में एजेंसी ने प्रकाशित नहीं की थीं। यानी AI मॉडल की ओर से गलत या मनगढ़ंत जानकारी को ANI से जोड़ने का भी आरोप लगाया गया था।
कोर्ट ने क्या कहा?
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत के सामने यह सवाल था कि क्या AI मॉडल को ट्रेन करने के लिए कॉपीराइटेड कंटेंट का इस्तेमाल भारतीय कॉपीराइट कानून का उल्लंघन है। अदालत ने मौजूदा मामले के तथ्यों को देखते हुए OpenAI के पक्ष में फैसला दिया।
कोर्ट के मुताबिक, ANI यह साबित नहीं कर सकी कि ChatGPT ने उसके लेखों को इस तरह से याद रखा या दोहराया, जिससे कॉपीराइट का उल्लंघन साबित हो। अदालत ने AI ट्रेनिंग में कंटेंट के इस्तेमाल को रिसर्च से जुड़े 'फेयर डीलिंग' अपवाद के संदर्भ में भी देखा। इसका मतलब यह है कि इस विशेष मामले में OpenAI को ChatGPT की ट्रेनिंग के लिए ANI के कंटेंट के इस्तेमाल को लेकर कॉपीराइट उल्लंघन का दोषी नहीं माना गया है।
क्या अब कॉपीराइटेड कंटेंट से ट्रेन किया जा सकता है AI?
फैसले का सबसे अहम पहलू यही है कि इसे AI कंपनियों के लिए कॉपीराइटेड कंटेंट के इस्तेमाल की खुली छूट के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। दिल्ली हाई कोर्ट का फैसला ANI और OpenAI के बीच सामने आए विवाद और उससे जुड़े फैक्ट्स पर आधारित है। इसका मतलब यह नहीं है कि हर AI कंपनी किसी भी लेखक, पत्रकार, प्रकाशक या वेबसाइट के कॉपीराइटेड कंटेंट को बिना अनुमति AI मॉडल की ट्रेनिंग में इस्तेमाल कर सकती है और उसे हर मामले में 'फेयर डीलिंग' का संरक्षण मिल जाएगा।
AI कंपनियों और मीडिया इंडस्ट्री के लिए अहम है फैसला
AI मॉडल को ट्रेन करने के लिए बड़ी मात्रा में डाटा की जरूरत होती है। इसमें इंटरनेट पर उपलब्ध टेक्स्ट, आर्टिकल, किताबें और अन्य कंटेंट शामिल हो सकता है। ऐसे में यह सवाल दुनियाभर में बहस का विषय बना हुआ है कि कॉपीराइट वाले कंटेंट का इस्तेमाल AI ट्रेनिंग के लिए बिना लाइसेंस और बिना किसी तरह के पेमेंट के किया जा सकता है या नहीं।
लेखक, पत्रकार और मीडिया कंपनियां लंबे समय से AI कंपनियों के खिलाफ यह सवाल उठाती रही हैं कि उनके काम का इस्तेमाल AI मॉडल को बेहतर बनाने के लिए किया जा रहा है, लेकिन उन्हें इसके लिए कोई भुगतान या परमिशन की व्यवस्था नहीं दी गई है।
दूसरी तरफ AI कंपनियों का तर्क रहा है कि मॉडल की ट्रेनिंग और किसी कंटेंट को सीधे कॉपी करके दोबारा पब्लिश करने में अंतर है। AI मॉडल किसी लेख को सामान्य तौर पर स्टोर करके उसी रूप में प्रकाशित करने के बजाय उससे पैटर्न और भाषा को समझकर जवाब तैयार करता है।
बता दें, दिल्ली हाई कोर्ट का यह फैसला भारत में AI और कॉपीराइट कानून के बीच संबंध को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले समय में जैसे-जैसे AI का इस्तेमाल बढ़ेगा, वैसे-वैसे AI मॉडल की ट्रेनिंग के लिए डेटा के इस्तेमाल को लेकर कानूनी सवाल भी बढ़ेंगे।


