घर में सोलर लगवाने वालों के पास कमाई का मौका! ऐप से खुद खरीदें और बेचें बिजली
दिल्ली में अब उपभोक्ता ऐप के जरिए सीधे बिजली खरीद और बेच सकेंगे, क्योंकि DERC ने P2P एनर्जी ट्रेडिंग पायलट को मंजूरी दे दी है। इससे रूफटॉप सोलर लगाने वाले 'प्रोस्यूमर' अपनी एक्सट्रा बिजली बेहतर कीमत पर बेचकर कमाई कर सकेंगे।

दिल्ली में इलेक्ट्रिसिटी कंज्यूमर्स के लिए बड़ा बदलाव आने वाला है। अब लोग सिर्फ बिजली इस्तेमाल करने वाले नहीं रहेंगे, बल्कि सीधे बिजली खरीदने और बेचने वाले मार्केट का हिस्सा बन सकेंगे। दिल्ली इलेक्ट्रिसिटी रेग्युलेटरी कमीशन (DERC) ने peer-to-peer (P2P) एनर्जी ट्रेडिंग के पायलट प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है। इसके साथ कंज्यूमर्स आपस में सीधे बिजली का लेन-देन कर सकेंगे। फैसले के बाद टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रिब्यूशन लिमिटेड और BSES राजधानी पावर लिमिटेड को इस पायलट को लागू करने की अनुमति मिल गई है।
नई व्यवस्था में वे कंज्यूमर जिन्हें 'प्रोस्यूमर' कहा जा रहा है, यानी जो रूफटॉप सोलर पैनल के जरिए खुद बिजली बनाते हैं, अपनी अतिरिक्त बिजली सीधे दूसरे यूजर्स को बेच सकेंगे। अभी तक ऐसी अतिरिक्त बिजली तय दर पर डिस्कॉम को वापस जाती थी, लेकिन अब कीमत खरीदार और विक्रेता आपसी सहमति से खुद तय कर पाएंगे। हालांकि बिजली की आपूर्ति की जिम्मेदारी डिस्कॉम के पास ही रहेगी लेकिन भुगतान और हिसाब-किताब डिजिटल प्लेटफॉर्म के साथ बिल में एडजस्ट किया जाएगा।
सबसे पहले यहां शुरू होगा प्रोजेक्ट
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पायलट प्रोजेक्ट उत्तर और दक्षिण दिल्ली में शुरू किया जा सकता है। हर जोन में करीब 1,000 उपभोक्ताओं को शामिल किए जाने की योजना है। खास बात यह है कि Purvanchal Vidyut Vitaran Nigam Limited की पार्टनरशिप से दिल्ली और उत्तर प्रदेश के बीच लिमिटेड लेवल पर इलेक्ट्रिसिटी ट्रेड की परमिशन भी दी जाएगी। आगे चलकर Paschimanchal Vidyut Vitran Nigam Limited के जरिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश और दिल्ली के अन्य इलाकों को भी जोड़ा जा सकता है।
ध्यान रहे, प्रोग्राम में वही उपभोक्ता हिस्सा ले सकेंगे जिनके पास स्मार्ट मीटर होगा। खरीदार के लिए स्मार्ट मीटर अनिवार्य होगा, जबकि विक्रेता के पास नेट मीटर के साथ रूफटॉप सोलर प्लांट होना जरूरी है। सभी पार्टिसिपेंट्स का वेरिफिकेशन किया जाएगा और उन्हें डिजिटल पहचान यानी ‘Verified Credential’ दिया जाएगा। ट्रेडिंग मोबाइल ऐप की मदद से होगी और लेन-देन का रिकॉर्ड India Energy Stack बेस्ड ब्लॉकचेन सिस्टम में रजिस्टर किया जाएगा, जिससे ट्रांसपैरेंसी बनी रहे।
नहीं देने होंगे कई तरह के एक्सट्रा शुल्क
पायलट प्रोजेक्ट को अट्रैक्टिव बनाने के लिए DERC ने व्हीलिंग चार्ज, क्रॉस सब्सिडी सरचार्ज और अन्य अतिरिक्त शुल्क अस्थायी तौर पर माफ कर दिए हैं। फिलहाल 42 पैसे प्रति यूनिट का ट्रांजैक्शन शुल्क तय किया गया है, जिसे खरीदार और विक्रेता बराबर-बराबर बांटेंगे। साथ ही 20 प्रतिशत क्षमता सीमा को भी हटा दिया गया है, जिससे प्रोस्यूमर अपनी पूरी एक्सट्रा बिजली मार्केट में बेच सकेंगे।

लेखक के बारे में
Pranesh Tiwariप्राणेश तिवारी पिछले चार साल से लाइव हिन्दुस्तान में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर टेक्नोलॉजी सेक्शन का हिस्सा हैं। खुद को दिल से लेखक और पेशे से पत्रकार मानने वाले प्राणेश, आठ साल से ज्यादा वक्त से साइंस और टेक्नोलॉजी की दुनिया को शब्दों में ढाल रहे हैं। गैजेट्स इनसाइट्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) उनकी एक्सपर्टीज हैं, जहां वह मुश्किल टेक्नोलॉजी को सरल और असरदार भाषा में पाठकों तक पहुंचाते हैं। लेटेस्ट गैजेट्स रिव्यू करना और नए ऐप्स पर वक्त बिताना उन्हें जॉब का पसंदीदा हिस्सा लगता है।
करियर की शुरुआत नवभारत टाइम्स ऑनलाइन से करने वाले प्राणेश ने न्यूजबाइट्स में सीनियर टेक जर्नलिस्ट के रूप में भी भूमिका निभाई। लॉकडाउन में 'सिर्फ दोस्त: नए जमाने की प्रेम कहानियां' लघुकथा संग्रह भी लिखा। IIMC, नई दिल्ली में PTI अवॉर्ड से सम्मानित प्राणेश ने स्मार्टफोन, AI, कंज्यूमर टेक और डिजिटल इनोवेशन जैसे विषयों पर गहराई से तथ्यात्मक रिपोर्टिंग की है। काम के अलावा उन्हें लिखना और सफर करना पसंद है, दोनों ही उनके लिए दुनिया को समझने और कहानियों में बदलने का जरिया हैं।
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