आम आदमी की जीत, पॉपुलर ई-कॉमर्स कंपनी पर भारी पड़ा गोलमाल, अब देना होगा 1.5 लाख मुआवजा
Flipkart पर एक ग्राहकों को गलत प्रोडक्ट डिलीवर करना भारी पड़ गया। जब फ्लिपकार्ट ने नहीं सुनी तो परेशान ग्राहक कंज्यूमर कोर्ट पहुंच गया। यहां कोर्ट ने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म को दोषी पाया। अब कंपनी को 1.5 लाख रुपये का मुआवजा देना होगा।

पॉपुलर ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म Flipkart को एक ग्राहक के साथ गोलमाल करना भारी पड़ गया। गलत प्रोडक्ट डिलीवर करने के एक मामले में फैसला सुनाते हुए कोर्ट में फ्लिपकार्ट को बड़ा झटका दिया है और इस मामले में आम आदमी की जीत हुई है। दरअसल, तेलंगाना के आदिलाबाद में जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और उसके सेलर, 'कंसल्टिंग रूम्स प्राइवेट लिमिटेड' को दोषी ठहराया है, क्योंकि उन्होंने ग्राहक द्वारा ऑर्डर किए गए एयर प्यूरीफायर मॉडल के बजाय कोई दूसरा मॉडल डिलीवर किया था। इसमें मामले में फ्लिपकार्ट को अब डेढ लाख रुपये का हर्जाना देना होगा।
कंज्यूमर कोर्ट ने फ्लिपकार्ट और उसके सेलर को क्यों जिम्मेदार ठहराया?
रिपोर्ट के मुताबिक, स्वास्तिक राठौड़ नाम का एक उपभोक्ता 2 अक्टूबर, 2025 को फ्लिपकार्ट के माध्यम से Qubo Q600 एयर प्यूरीफायर लाया। प्यूरीफायर की कीमत 10,399 रुपये थी, लेकिन 2,100 रुपये की डेबिट कार्ड छूट लागू करने और 99 रुपये फ्लिपकार्ट के प्रोटेक्ट प्रॉमिस शुल्क का भुगतान करने के बाद, उपभोक्ता ने 8,398 रुपये का भुगतान किया।
खबरों के मुताबिक, एयर प्यूरीफायर का विज्ञापन 'ओमनी टेक रिटेल' सेलर के नाम से किया गया था, लेकिन इनवॉइस 'कंसल्टिंग रूम्स प्राइवेट लिमिटेड' के नाम से जारी किया गया। इसके बाद, 16 अक्टूबर को फ्लिपकार्ट के 'ओपन बॉक्स डिलीवरी' सिस्टम के तहत प्रोडक्ट की डिलीवरी की गई।
पहली बार डिलीवरी की कोशिश के समय, ग्राहक ने देखा कि जो प्रोडक्ट आया था वह Qubo Q500 था, जबकि ऑर्डर किया गया मॉडल Qubo Q600 था। जब उसने डिलीवरी एजेंट से डिलीवरी को 'फेल' मार्क करने के लिए कहा, तो कथित तौर पर उसकी बात नहीं मानी गई। इसलिए ग्राहक ने Flipkart से रिप्लेसमेंट की मांग की। पहले तो उसकी रिक्वेस्ट मंजूर हो गई थी, लेकिन बाद में यह कहकर कैंसिल कर दी गई कि प्रोडक्ट स्टॉक में नहीं है।
उपभोक्ता ने यह भी दावा किया कि फ्लिपकार्ट ने उसकी खरीदारी के बाद प्रोडक्ट लिस्ट में बदलाव कर Q600 के बजाय क्यूबो Q500 मॉडल दिखाया। मामला अनसुलझा रहने के बाद, उपभोक्ता अंततः शिकायत दर्ज करने के लिए जिला उपभोक्ता अदालत पहुंचा और सभी आवश्यक दस्तावेज और कॉल रिकॉर्डिंग पेश की।
सुनवाई में भी नहीं आई कंपनी
नोटिस मिलने के बाद भी न तो फ्लिपकार्ट और न ही कंसल्टिंग रूम्स प्राइवेट लिमिटेड आयोग के सामने पेश हुए और उन्हें 25 दिसंबर, 2025 को एकपक्षीय आदेश दिया गया। आदिलाबाद कंज्यूमर कमीशन ने कहा कि दोनों पक्ष शिकायत को सुलझाने में नाकाम रहे और कमीशन के सामने पेश भी नहीं हुए। साथ ही, गलत डिलीवरी को गलत ट्रेड प्रैक्टिस और सर्विस में कमी माना गया।
अब देना होगा डेढ लाख का मुआवजा
हालांकि कंज्यूमर ने 2 लाख रुपये के मुआवजे की मांग की थी, लेकिन कमीशन ने कहा, "मांगा गया मुआवजा बहुत ज्यादा है और इसे पूरा नहीं, बल्कि आंशिक रूप से ही दिया जा सकता है।" इसलिए, कमीशन ने फ्लिपकार्ट और उसके सेलर को 12% ब्याज के साथ 8,398 रुपये वापस करने, मुआवजे के तौर पर 1.51 लाख रुपये देने और कानूनी खर्च के लिए 7,000 रुपये देने का निर्देश दिया। इस आदेश का पालन 45 दिनों के भीतर किया जाना था।
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