AI ने बजा दी बैंड! कंपनी ने 30 दिनों में फूंक डाले 4 लाख करोड़ रुपये; हो गई ये भारी गलती

लाइव हिन्दुस्तान
Follow us on Google News
share

एक बड़ी कंपनी ने बिना कोई लिमिट लगाए कर्मचारियों को Claude AI इस्तेमाल करने दिया, जिससे सिर्फ एक महीने में 500 मिलियन डॉलर का बिल बन गया। इस घटना ने दुनिया भर की कंपनियों को AI कंट्रोल को लेकर अलर्ट कर दिया है।

AI ने बजा दी बैंड! कंपनी ने 30 दिनों में फूंक डाले 4 लाख करोड़ रुपये; हो गई ये भारी गलती

दुनियाभर की हजारों कंपनियां इस वक्त आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को भविष्य का सबसे बड़ा और जरूरी टूल मान रही हैं। हालांकि, AI से जुड़ा बदलाव सिर्फ सकारात्मक नहीं रहा है और इसके कुछ पहलुओं को अनदेखा नहीं किया जा सकता। हाल ही में सामने आया एक मामला टेक इंडस्ट्री में हड़कंप मचाने वाला है। एक बड़ी एंटरप्राइज कंपनी ने Anthropic के Claude AI प्लेटफॉर्म पर सिर्फ एक महीने में लगभग 500 मिलियन डॉलर यानी करीब 4 लाख करोड़ रुपये खर्च कर दिए। वजह सिर्फ इतनी थी कि कंपनी ने अपने कर्मचारियों के लिए कोई लिमिट या यूजेस कंट्रोल फिक्स नहीं किए थे।

मामला अब इतिहास के सबसे बड़े IT गवर्नेंस फेलियर्स में से एक माना जा रहा है। Axios की रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी ने कर्मचारियों को Claude AI का ओपेन एक्सेस दे दिया था। उनके लिए ना कोई बजट कैप था, ना रियल टाइम मॉनिटरिंग और ना ही कोई अलर्ट सिस्टम। इसके बाद हजारों कर्मचारियों ने हैवी कंप्यूटिंग वाले AI टूल्स का इस्तेमाल शुरू कर दिया। इनमें AI कोडिंग एजेंट्स, ऑटोमेटेड एजेंटिक पाइपलाइन्स और लंबे टेक्स्ट प्रोसेस करने वाले हाई-कॉस्ट मॉडल शामिल थे।

इसलिए लाखों-करोड़ों रुपये का आया बिल

दिक्कत यह थी कि AI मॉडल जितना बड़ा और मुश्किल काम करते हैं, उतनी ही तेजी से 'टोकन' खर्च होते हैं। इस तरह सिंगल पेमेंट के बजाय इस प्लेटफॉर्म पर हर सवाल, हर कोड और हर प्रोसेसिंग का पैसा लगता है। जब हजारों कर्मचारी बिना रोकटोक लगातार AI यूज कर रहे हों, तो बिल कुछ ही दिनों में सारे रिकॉर्ड तोड़ सकता है और यही इस कंपनी के साथ हुआ।

बता दें, यह मामला सिर्फ एक कंपनी तक सीमित नहीं रह गया है। बड़ी टेक कंपनियां भी AI खर्च को लेकर दबाव महसूस कर रही हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार Microsoft ने अपने कई कर्मचारियों के Claude Code लाइसेंस रद्द कर दिए, क्योंकि प्रति इंजीनियर हर महीने 500 से 2000 डॉलर तक खर्च कर रहा था। वहीं Uber के COO ने माना कि कंपनी अप्रैल तक ही अपना पूरा 2026 AI बजट खत्म कर चुकी थी। इसकी वजह कंपनी में बड़े स्तर पर AI कोडिंग टूल्स का इस्तेमाल था।

केवल रैंकिंग बढ़ाने के लिए AI का इस्तेमाल

Amazon में तो स्थिति और अजीब हो गई। कंपनी ने Kirorank नाम का एक इंटरनल AI लीडरबोर्ड शुरू किया था, जिसमें कर्मचारियों की AI एक्टिविटी को ट्रैक किया जाता था लेकिन कई कर्मचारी सिर्फ रैंकिंग बढ़ाने के लिए AI एजेंट्स से फालतू के काम करवाने लगे। इससे कंप्यूटिंग पर आने वाली लागत तेजी से बढ़ने लगी और आखिरकार Amazon को यह सिस्टम बंद करना पड़ा।

टेक वर्ल्ड में इस ट्रेंड को अब “Tokenmaxxing” कहा जा रहा है, जहां कर्मचारी जरूरत से ज्यादा AI टोकन खर्च करते हैं जिससे वे ज्यादा ऐक्टिव दिख सकें।

कंपनियां कर रही हैं AI से जुड़ी गलतियां

AI इंडस्ट्री के कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि कंपनियां अभी भी AI को लेकर बड़ी गलतियां कर रही हैं। Limestone Digital के फाउंडर मार्क अजेनस्टैड ने कहा कि 'कंपनियां अब AI बिल चुकाने के लिए लोगों की नौकरियां खत्म कर रही हैं। AI ने सिर्फ काम नहीं छीना बल्कि AI का बिल कई लोगों की नौकरी खा गया।'

पूर्व Microsoft AI एग्जक्यूटिव सोफिया वेलास्टेगुई कहती हैं कि अधिकांश कर्मचारी AI का इस्तेमाल उन कामों में कर रहे हैं जो उन्हें पसंद नहीं हैं, जबकि कंपनियों को AI का इस्तेमाल उन क्षेत्रों में करना चाहिए जहां सीधे रेवन्यू बढ़े। उन्होंने कहा कि कई कंपनियों में कर्मचारी मौसम देखने जैसे सिंपल कामों के लिए भी महंगे एंटरप्राइज AI मॉडल इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे लाखों डॉलर का अतिरिक्त खर्च जुड़ रहा है। इस समस्या का हल निकालना ही होगा और इसपर काम करने की जरूरत महसूस हो रही है।

Pranesh Tiwari

लेखक के बारे में

Pranesh Tiwari

प्राणेश वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां वे पिछले चार वर्षों से टेक्नोलॉजी सेक्शन का अहम हिस्सा हैं। खुद को दिल से लेखक और पेशे से पत्रकार मानने वाले प्राणेश के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में आठ वर्षों से अधिक का अनुभव है। उन्होंने अपने पूरे करियर में साइंस और टेक्नोलॉजी की जटिलताओं को आम पाठकों के लिए सरल, सहज और रोचक भाषा में प्रस्तुत करने पर विशेष ध्यान दिया है।

विशेषज्ञता और कार्यशैली
प्राणेश की विशेषज्ञता गैजेट्स, टेक इनसाइट्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे विषयों में है। वे तकनीकी बारीकियों और कठिन शब्दावली को इस तरह प्रस्तुत करते हैं कि एक सामान्य पाठक भी तेजी से बदलती डिजिटल दुनिया को आसानी से समझ सके। लेटेस्ट गैजेट्स का रिव्यू करना और नए मोबाइल ऐप्स के फीचर्स को आजमाना उनके काम का पसंदीदा हिस्सा है। उनकी लेखन शैली में स्पष्टता, रिसर्च और कहानी कहने का संतुलन देखने को मिलता है।

अब तक का सफर और उपलब्धियां
प्राणेश ने अपने प्रोफेशनल करियर की शुरुआत नवभारत टाइम्स ऑनलाइन से की। इसके बाद उन्होंने न्यूजबाइट्स (NewsBytes) में सीनियर टेक जर्नलिस्ट के रूप में काम किया, जहां उन्होंने तकनीकी रिपोर्टिंग में अपनी अलग पहचान बनाई। वे भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली के पूर्व छात्र हैं और अपनी प्रतिभा के लिए प्रतिष्ठित PTI अवॉर्ड से सम्मानित हो चुके हैं।

लेखन और व्यक्तिगत रुचियां
पत्रकारिता के साथ-साथ प्राणेश एक संवेदनशील और रचनात्मक लेखक भी हैं। लॉकडाउन के दौरान उन्होंने ‘सिर्फ दोस्त: नए जमाने की प्रेम कहानियां’ नामक लघुकथा संग्रह लिखा, जिसमें रिश्तों की बारीकियों को भावनात्मक रूप से प्रस्तुत किया गया है।

उन्हें स्मार्टफोन, कंज्यूमर टेक और डिजिटल इनोवेशन से जुड़े विषयों पर गहराई से रिसर्च करना और पढ़ना पसंद है। काम के अलावा, उन्हें यात्रा करना भी बेहद पसंद है। उनके लिए यात्राएं केवल सुकून का जरिया नहीं, बल्कि नए अनुभवों और कहानियों को खोजने का तरीका हैं।

चाहे वह किसी नए AI टूल की पड़ताल हो या किसी अनदेखी जगह की यात्रा.. प्राणेश का लक्ष्य हमेशा एक बेहतरीन कहानी बुनना ही होता है।

और पढ़ें

लेटेस्ट   Hindi News ,    बॉलीवुड न्यूज,   बिजनेस न्यूज,   टेक ,   ऑटो,   करियर , और   राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।