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ALERT: खतरे में Google Chrome के करोड़ों यूजर्स, हैक हो सकता है सिस्टम, तुरंत करें ये काम

ALERT: खतरे में Google Chrome के करोड़ों यूजर्स, हैक हो सकता है सिस्टम, तुरंत करें ये काम

संक्षेप:

अगर आप भी ब्राउजिंग के लिए Google Chrome का इस्तेमाल करते हैं, तो सावधान हो जाइए, क्योंकि गूगल क्रोम के करोड़ों यूजर्स पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है। CERT-In ने अलग-अलग ऑपरेटिंग सिस्टम पर Google Chrome को प्रभावित करने वाली कई कमजोरियों के बारे में एक एडवाइजरी जारी की है।

Nov 21, 2025 04:17 pm ISTArpit Soni लाइव हिन्दुस्तान
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अगर आप भी ब्राउजिंग के लिए Google Chrome का इस्तेमाल करते हैं, तो सावधान हो जाइए, क्योंकि गूगल क्रोम के करोड़ों यूजर्स पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है। भारत सरकार की साइबर सिक्योरिटी एजेंसी CERT-In (इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम) ने अलग-अलग ऑपरेटिंग सिस्टम पर Google Chrome को प्रभावित करने वाली कई कमजोरियों के बारे में एक एडवाइजरी जारी की है। शुक्रवार को पब्लिश हुए लेटेस्ट बुलेटिन में, खोजी गई कमजोरियों को हाई रिस्क बताया गया है। साइबर सिक्योरिटी फर्म के अनुसार, इन कमजोरियों का फायदा उठाकर हैकर्स प्रभावित सिस्टम पर दूर से ही कोई भी कोड चला सकते हैं। सुरक्षित रहने के लिए Windows, macOS और Linux पर गूगल क्रोम का इस्तेमाल करने वाले सभी यूजर्स और ऑर्गनाइजेशन्स को वेब ब्राउजर के लेटेस्ट वर्जन में अपडेट करने की सलाह दी गई है।

CERT-In ने गूगल क्रोम यूजर्स के लिए चेतावनी जारी की

गैजेट्स360 की रिपोर्ट के अनुसार, एडवाइजरी नोट, CIVN-2025-0330 में, साइबर सिक्योरिटी एजेंसी ने विंडोज, मैकओएस और लिनक्स के लिए गूगल क्रोम में दो अलग-अलग कमजोरियों को हाइलाइट किया है। इन्हें CVE-2025-13223 और CVE-2025-13224 आइडेंटिफायर दिए गए हैं, और इनकी गंभीरता को 'हाई' बताया गया है। दावा किया गया है कि इन कमजोरियों से सिस्टम को कॉम्प्रोमाइज करने और सर्विसेज में रुकावट आने की संभावना है।

साइबर सिक्योरिटी एजेंसी के अनुसार, इन कमियों की वजह से कोई रिमोट अटैकर बिना सुरक्षा वाले कंप्यूटर पर कोई भी कोड चला सकता है। यह टाइप कन्फ्यूजन की वजह से होता है, यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें कोड का एक हिस्सा ऐसे डेटा टाइप का इस्तेमाल करके किसी रिसोर्स को एक्सेस करने की कोशिश करता है जो ऑब्जेक्ट के असली टाइप से मेल नहीं खाता।

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एजेंसी ने कहा कि टाइप कन्फ्यूजन V8 में हुआ, जो क्रोम में जावास्क्रिप्ट और वेबअसेंबली कोड को चलाने के लिए जिम्मेदार इंजन है। यह रिमोट अटैकर को एक बनाए गए HTML पेज के जरिए हीप करप्शन का फायदा उठाने की इजाजत देगा।

एक बयान में, गूगल ने साफ किया कि उसे पता था कि CVE-2025-13223 के लिए एक एक्सप्लॉइट मौजूद है। विंडोज के लिए 142.0.7444.175/.176 से पहले के गूगल क्रोम वर्जन, मैक के लिए 142.0.7444.176, और लिनक्स के लिए 142.0.7444.175 पर इन कमजोरियों का असर पड़ा है।

कंपनी ने कहा कि उसने सभी ऑपरेटिंग सिस्टम के लिए स्टेबल चैनल को अपडेट कर दिया है, और आने वाले दिनों और हफ्तों में जरूरी फिक्स के साथ अपडेट जारी किए जाएंगे।

रिस्क कम करने के लिए, CERT-In गूगल क्रोम को वर्जन 142.0.7444.175/.176 पर अपडेट करने की सलाह देता है। यूजर्स ब्राउजर के मेनू में जाकर और हेल्प पर टैप करके, अबाउट गूगल क्रोम चुनकर अपडेट्स को वेरिफाई और इंस्टॉल कर सकते हैं। अपडेट प्रोसेस अपने आप लेटेस्ट पैच डाउनलोड और अप्लाई कर देगा।

Arpit Soni

लेखक के बारे में

Arpit Soni
अर्पित सोनी ने माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की डिग्री प्राप्त की है। इन्हें करीब 8 साल का एक्सपीरियंस है। अर्पित ने अपना करियर स्वराज एक्सप्रेस न्यूज चैनल से शुरू किया। उसके बाद दैनिक भास्कर (डिजिटल) में अपनी सेवाएं दीं, यहां टेक और ऑटो बीट में करीब 4 साल काम किया। साल 2021 से अर्पित लाइव हिंदुस्तान में सेवाएं दे रहे हैं। टेक और गैजेट्स में इनका इंटरेस्ट है। और पढ़ें

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