क्या आपका फोन ट्रैक कर सकती है सरकार? भारत में क्या हैं नियम; जानें पूरा सच

Pranesh Tiwari लाइव हिन्दुस्तान
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भारत में सरकार के पास स्मार्टफोन ट्रैक करने की क्षमता जरूर है, लेकिन इसका इस्तमाल सामान्य रूप से नहीं किया जाता। यह प्रक्रिया आमतौर पर केवल कानूनी जांच, सुरक्षा मामलों या चोरी हुए फोन को ट्रेस करने के लिए अपनाई जाती है।

क्या आपका फोन ट्रैक कर सकती है सरकार? भारत में क्या हैं नियम; जानें पूरा सच

कॉलिंग और मेसेजिंग से लेकर बैंकिंग, सोशल मीडिया, लोकेशन और पर्सनल फोटोज ऐसी बेहद जरूरी डिजिटल इन्फॉर्मेशन अब लोगों के फोन में ही रहती है। अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या सरकार किसी यूजर के स्मार्टफोन को ट्रैक कर सकती है? और अगर कर सकती है, तो भारत में इसके लिए कानूनी नियम क्या हैं? आइए आपको इसके बारे में पूरा सच बताते हैं।

भारत में फोन ट्रैक किए जाने को लेकर कई तरह की अफवाहें भी फैलती रहती हैं। सच्चाई ये है कि भारत में सरकार के पास तकनीकी रूप से फोन ट्रैक करने की क्षमता जरूर है, लेकिन इसके लिए जरूरी कानूनी प्रक्रिया और सीमाएं तय की गई हैं। आइए बताएं कि फोन कैसे ट्रैक किया जा सकता है।

IMEI नंबर की मदद से ट्रैकिंग

हर मोबाइल फोन का एक यूनीक IMEI (International Mobile Equipment Identity) नंबर होता है। यह 15 अंकों का एक पहचान नंबर होता है, जो हर डिवाइस के लिए अलग होता है। जब भी कोई फोन मोबाइल नेटवर्क से कनेक्ट होता है, तो टेलीकॉम कंपनियों के पास यह रिकॉर्ड रहता है कि कौन-सा IMEI किस SIM कार्ड के साथ और किस नेटवर्क टावर से जुड़ा हुआ है। इसी वजह से जरूरत पड़ने पर कानूनी एजेंसियां टेलीकॉम कंपनियों की मदद से फोन की लोकेशन या ऐक्टिविटीज से जुड़ी जानकारी हासिल कर सकती हैं।

सेल टावर लोकेशन डाटा

फोन ट्रैक करने का सबसे सामान्य तरीका सेल टावर लोकेशन डाटा है। जब आपका फोन कॉल करता है या इंटरनेट का इस्तेमाल करता है, तो वह नजदीकी मोबाइल टावर से कनेक्ट होता है। अगर किसी जांच के दौरान पुलिस को किसी की लोकेशन का अंदाजा लगाना हो, तो टेलीकॉम कंपनियों से यह डाटा लिया जा सकता है कि फोन किस-किस टावर से कनेक्ट हुआ था। कई बार अलग-अलग टावरों के डाटा की मदद से फोन की लोकेशन का अनुमान लगाया जाता है, जिसे टावर ट्रायएंगुलेशन कहा जाता है।

केवल इन परिस्थितियों में की जाती है ट्रैकिंग

ऐसा नहीं है कि सरकार हर समय हर यूजर के फोन को ट्रैक करती रहती है। भारत में ऐसा करना कानूनी रूप से संभव नहीं है। फोन ट्रैकिंग आमतौर पर केवल कुछ खास परिस्थितियों में ही की जाती है, जैसे किसी आपराधिक मामले की जांच, राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला, या किसी यूजर का फोन चोरी या गुम हो जाना। ऐसे मामलों में भी आम तौर पर संबंधित एजेंसियों को तय कानूनी प्रक्रिया का पालन करना पड़ता है।

खोए फोन को ट्रैक करने के लिए CEIR

भारत सरकार ने चोरी हुए या खोए मोबाइल फोन को ट्रैक करने और ब्लॉक करने के लिए CEIR (Central Equipment Identity Register) सिस्टम भी शुरू किया है। इस सिस्टम के साथ लोग अपने चोरी हुए फोन की शिकायत दर्ज कर सकते हैं, इसके बाद उस फोन के IMEI नंबर को ब्लॉक किया जा सकता है जिससे वह किसी भी नेटवर्क पर इस्तेमाल ना हो सके। कई मामलों में इसी सिस्टम की मदद से पुलिस ने चोरी हुए फोन बरामद भी किए हैं।

इन कानून के तहत हो सकती है ट्रैकिंग

लीगली देखें तो भारत में कम्युनिकेशन डाटा से जुड़ी ऐक्टिविटीज को कंट्रोल करने के लिए कई नियम लागू हैं। टेलीकॉम सेवाओं से जुड़े कानून और नियमों के चलते केवल ऑथराइज्ड सरकारी एजेंसियां ही कम्युनिकेशन डाटा तक पहुंच सकती हैं। इसके अलावा, भारत के संविधान में नागरिकों को प्राइवेसी का मौलिक अधिकार भी मिलता है। साल 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने अपने ऐतिहासिक फैसले में साफ किया था कि निजता (Privacy) संविधान के आर्टिकल 21 के तहत एक मौलिक अधिकार है। यानी बिना वैध कारण और सही प्रक्रिया के किसी नागरिक की निजी जानकारी या ऐक्टिविटीज की ट्रैकिंग नहीं की जा सकती।

आप यूज कर सकते हैं ये प्लेटफॉर्म

सरकार ने Sanchar Saathi जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म भी शुरू किए हैं, जिनकी मदद से लोग अपने नाम पर इशू किए गए SIM कार्ड्स की जानकारी देख सकते हैं, खोए हुए फोन को ब्लॉक कर सकते हैं और फ्रॉड कॉल की शिकायत कर सकते हैं। इन प्लेटफॉर्म्स का मकसद साइबर फ्रॉड और मोबाइल चोरी जैसी घटनाओं को कम करना है।

Pranesh Tiwari

लेखक के बारे में

Pranesh Tiwari

प्राणेश वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां वे पिछले चार वर्षों से टेक्नोलॉजी सेक्शन का अहम हिस्सा हैं। खुद को दिल से लेखक और पेशे से पत्रकार मानने वाले प्राणेश के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में आठ वर्षों से अधिक का अनुभव है। उन्होंने अपने पूरे करियर में साइंस और टेक्नोलॉजी की जटिलताओं को आम पाठकों के लिए सरल, सहज और रोचक भाषा में प्रस्तुत करने पर विशेष ध्यान दिया है।

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प्राणेश की विशेषज्ञता गैजेट्स, टेक इनसाइट्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे विषयों में है। वे तकनीकी बारीकियों और कठिन शब्दावली को इस तरह प्रस्तुत करते हैं कि एक सामान्य पाठक भी तेजी से बदलती डिजिटल दुनिया को आसानी से समझ सके। लेटेस्ट गैजेट्स का रिव्यू करना और नए मोबाइल ऐप्स के फीचर्स को आजमाना उनके काम का पसंदीदा हिस्सा है। उनकी लेखन शैली में स्पष्टता, रिसर्च और कहानी कहने का संतुलन देखने को मिलता है।

अब तक का सफर और उपलब्धियां
प्राणेश ने अपने प्रोफेशनल करियर की शुरुआत नवभारत टाइम्स ऑनलाइन से की। इसके बाद उन्होंने न्यूजबाइट्स (NewsBytes) में सीनियर टेक जर्नलिस्ट के रूप में काम किया, जहां उन्होंने तकनीकी रिपोर्टिंग में अपनी अलग पहचान बनाई। वे भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली के पूर्व छात्र हैं और अपनी प्रतिभा के लिए प्रतिष्ठित PTI अवॉर्ड से सम्मानित हो चुके हैं।

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पत्रकारिता के साथ-साथ प्राणेश एक संवेदनशील और रचनात्मक लेखक भी हैं। लॉकडाउन के दौरान उन्होंने ‘सिर्फ दोस्त: नए जमाने की प्रेम कहानियां’ नामक लघुकथा संग्रह लिखा, जिसमें रिश्तों की बारीकियों को भावनात्मक रूप से प्रस्तुत किया गया है।

उन्हें स्मार्टफोन, कंज्यूमर टेक और डिजिटल इनोवेशन से जुड़े विषयों पर गहराई से रिसर्च करना और पढ़ना पसंद है। काम के अलावा, उन्हें यात्रा करना भी बेहद पसंद है। उनके लिए यात्राएं केवल सुकून का जरिया नहीं, बल्कि नए अनुभवों और कहानियों को खोजने का तरीका हैं।

चाहे वह किसी नए AI टूल की पड़ताल हो या किसी अनदेखी जगह की यात्रा.. प्राणेश का लक्ष्य हमेशा एक बेहतरीन कहानी बुनना ही होता है।

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