'AI अमीर और गरीब के बीच की खाई को और बढ़ाएगा!', जानिए Bill Gates ने क्यों दी चेतावनी

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Bill Gates ने AI को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की है। AI पर अपने विचार रखते हुए गेट्स ने कहा कि AI या तो अब तक का सबसे बड़ा बराबरी लाने वाला जरिया बनेगा, या फिर अन्याय का सबसे बड़ा कारण। आप भी जानिए आखिर बिल गेट्स को AI से किस बात का डर है।

bill gates on ai
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माइक्रोसॉफ्ट के को-फाउंडर बिल गेट्स ने एआई के भविष्य के बारे में गंभीर चेतावनी देते हुए कहा है कि वह 'एआई के नौकरियों, असमानता, सुरक्षा और यहां तक ​​कि मानवीय रिश्तों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर बेहद चिंतित हैं।' जबकि गेट्स इस बात को लेकर आशावादी हैं कि एआई क्या हासिल कर सकता है, टेक अरबपति ने 'द टर्बुलेंट एआई युग' शीर्षक वाले 6,000 शब्दों के निबंध में कहा है कि दुनिया टेक्नोलॉजी द्वारा लाए जा सकने वाले बड़े बदलावों की तैयारी के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं कर रही है।

टाइम्सनाउ की रिपोर्ट के अनुसार, AI पर अपने विचार रखते हुए गेट्स ने कहा: "AI या तो अब तक का सबसे बड़ा बराबरी लाने वाला जरिया बनेगा, या फिर अन्याय का सबसे बड़ा कारण।" उनके अनुसार, सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या AI सभी के लिए जीवन को बेहतर बनाएगा या अमीर और गरीब के बीच की खाई को और बढ़ाएगा।

गेट्स की सबसे बड़ी चिंताओं में से एक रोजगार है। माइक्रोसॉफ्ट के को-फाउंडर के अनुसार, एआई व्हाइट-कॉलर और ब्लू-कॉलर दोनों वर्करों को प्रभावित करेगा और यह व्यवधान कई पीढ़ियों के बजाय एक दशक के भीतर हो सकता है।

कई नौकरियां हमेशा के लिए गायब हो जाएंगी

"कई नौकरियां हमेशा के लिए गायब हो जाएंगी। 1933 में, महामंदी के दौरान, संयुक्त राज्य अमेरिका में बेरोजगारी लगभग 25 प्रतिशत थी। यह अगले दशक के अधिकांश समय तक दोहरे अंकों में रही। अंततः मांग, निवेश और विकास वापस आने पर इसमें सुधार हुआ। एआई इस स्तर तक नहीं पहुंच सकता है, लेकिन इसका प्रभाव आर्थिक चक्र के साथ दूर नहीं होगा। सबसे अधिक जोखिम वाली नौकरियां एंट्री और मिड-लेवल की हैं, और जो नई नौकरियां बनाई जा रही हैं उनमें ज्यादातर स्कील्स की आवश्यकता होगी जिन्हें सीखने में कई साल लगेंगे।

व्हाइट-कॉलर नौकरियों पर असर

व्हाइट-कॉलर नौकरियों पर पहले से ही मामूली असर पड़ रहा है। जब जनरेटिव AI आम हो गया, उन नौकरियों में युवा कर्मचारियों की संख्या काफी गिर गई जो AI आसानी से बदल सकता है। लेकिन उसी नौकरी वाले बड़े उम्र के लोगों पर इतना असर नहीं पड़ा।

उन्होंने एक ब्लॉग पोस्ट में कहा मुझे लगता है कि यह प्रवृत्ति जारी रहेगी, लेकिन यह मुट्ठी भर उद्योगों या व्यवसायों तक ही सीमित नहीं रहेगी। सेल्स और कस्टमर सपोर्ट (ऑनलाइन और फोन पर), सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग और पैरालीगल काम में नौकरियां सबसे पहले प्रभावित हो सकती हैं, लेकिन व्यवधान बहुत आगे तक पहुंच जाएगा क्योंकि एआई उन कामों को करता है जिनके लिए आज भी प्रशिक्षित वर्करों की आवश्यकता होती है: लोन एप्लिकेशन का आकलन करना, डेटा एनालिसिस करना और यहां तक ​​कि मरीजों का परीक्षण करना जैसी चीजें। सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग जैसे कुछ क्षेत्र लागत कम होने के कारण नई मांग पैदा करेंगे, इसलिए उन क्षेत्रों में शुद्ध नौकरी का नुकसान दूसरों की तुलना में कम होगा जब तक कि कुछ काम, जैसे डिजाइन, इंसानों द्वारा बेहतर ढंग से किए जाते हैं।"

उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि रोबोट अंततः कंट्रक्शन और हॉस्पिटैलिटी समेत फिजिकल जॉब के लिए इंसानों के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं।

गेट्स के अनुसार, एआई और रोबोट का कॉम्बीनेशन एक ऐसा चक्र बना सकता है जहां कंपनियों को प्रतिद्वंद्वियों के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए ऑटोमेट करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

गेट्स ने " ह्यूमन रिजर्व्ड" नौकरियों के विचार पर भी चर्चा की और कहा कि कुछ भूमिकाएं ऑटोमेशन से सुरक्षित रहनी चाहिए, भले ही एआई और रोबोट तकनीकी रूप से उन्हें करने में सक्षम हों।

उन्होंने कहा, "मैंने इस दायरे को 'ह्यूमन रिजर्व्ड' (इंसानों के लिए सुरक्षित) कहना शुरू कर दिया है। मुझे 'ह्यूमन रिजर्व्ड' शब्द इसलिए पसंद है क्योंकि इससे मुझे 'नेचर रिजर्व' (प्रकृति संरक्षण क्षेत्र) की याद आती है, ऐसी जगहें जहां हम इमारतें और सड़कें बना सकते थे, लेकिन हम ऐसा नहीं करते क्योंकि इससे बहुत बड़ा नुकसान होगा।"

गेट्स ने उन हेल्थ प्रोफेशनल्स का उदाहरण दिया जिन्होंने उनके पिता की देखभाल की, जिनकी छह साल पहले अल्जाइमर बीमारी से मृत्यु हो गई थी।

माइक्रोसॉफ्ट के को-फाउंडर ने AI के बुरे पहलू के बारे में भी बात की। बिल गेट्स ने लिखा, “बहुत कम स्किल वाले अपराधी भी अब आसानी से किसी को निशाना बना सकेंगे, चाहे वह व्यक्ति हो, कंपनी हो या सरकार।”

उन्हें अस्पतालों, बैंकों, पावर ग्रिड और पानी की सप्लाई सिस्टम जैसे अहम इंफ्रास्ट्रक्चर की भी चिंता है। जिस AI से कंपनियों को सुरक्षा में कमियां खोजने में मदद मिल सकती है, उसी AI का इस्तेमाल करके अपराधी उन कमियों का फायदा भी उठा सकते हैं।

उन्होंने इंसानी रिश्तों पर AI के असर के बारे में भी बात की। गेट्स के मुताबिक, AI साथी की लत लग सकती है क्योंकि वे हमेशा उपलब्ध रहते हैं और उन्हें इस तरह से डिजाइन किया जाता है कि यूजर्स उनके साथ सहज महसूस करें।

गेट्स ने कहा, "एक ऐसा AI साथी जिसे इस तरह से बनाया गया है कि वह आपको कभी परेशान न करे, एक बड़े और सुरक्षित ग्रीनहाउस जैसा है।"

इन चिंताओं के बावजूद, गेट्स नहीं मानते कि एआई को रोका जाना चाहिए। हालांकि, उनका संदेश यह है कि व्यवधान बहुत बड़ा होने से पहले सरकारों को तैयारी करने की जरूरत है।

Arpit Soni

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अर्पित सोनी को शुरुआत से ही नए-नए गैजेट्स को एक्सप्लोर करने और उन्हें आजमाने का शौक रहा है। अब अर्पित ने अपनी इस हॉबी को ही अपना पेशा बना लिया है। भोपाल के रहने वाले अर्पित को नए-नए गैजेट्स का रिव्यू करना और उनके बारे में लिखना काफी पसंद है। टेक्नोलॉजी, रोबोट्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इनसे जुड़ी खबरें लिखना भी इन्हें काफी भाता है। लाइव हिन्दुस्तान में अर्पित पिछले चार साल से बतौर सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर काम कर रहे हैं। मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें करीब 9 साल का अनुभव है। अर्पित ने मीडिया जगत में शुरुआत एक रीजनल चैनल से की थी। इससे बाद उन्होंने नवभारत टाइम्स और दैनिक भास्कर की गैजेट्स बीट में काम किया। अर्पित की स्कूलिंग भोपाल से हुई है। उन्होंने कंप्यूटर साइंस से इंजीनियरिंग की है। मीडिया में झुकाव के चलते उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU) से पोस्ट ग्रेजुएशन करके मीडिया जगत में एंट्री की। मीडिया में इन्हें आठ साल से ज्यादा समय हो चुके हैं और सफर अभी जारी है। गैजेट्स के अलावा, इन्हें नई-नई जगहों पर घूमना और उनके बारे में जानने का भी बहुत शौक है।

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