
सरकार का बड़ा अलर्ट! ऑनलाइन डिस्काउंट के चक्कर में मत पड़ो, Hidden Charges लूट रहे आपको, जेब हो रही खाली
JagoGrahakJago ने चेतावनी दी है कि जब लगता है ‘बेहद सस्ता ऑफर’, हो सकता है उसमें छुपे हुए खर्च हों यानी ड्रिप-प्राइसिंग। जानिए क्या है यह रणनीति और कैसे ऐसे जाल से बचा जाए।
आजकल ऑनलाइन शॉपिंग करते समय कई आकर्षक ऑफर और डील नजर आती हैं। लेकिन आकर्षक प्रस्तावों के पीछे कई बार कई झांसे छुपे हुए होते हैं जैसे शुरू में कम कीमत दिखाना, लेकिन बाद में अन्य सेवाओं या चार्ज द्वारा कुल कीमत बढ़ जाना। ऐसा एक मामला सामने आया है, जहां उपभोक्ता जागरूकता प्लेटफॉर्म JagoGrahakJago ने एक पोस्ट के माध्यम से बताया कि किस तरह एक “शानदार” दिखने वाला ऑफर अंत में ग्राहक के लिए महंगा साबित हो सकता है। उनके मुताबिक यह “ड्रिप-प्राइसिंग” नामक मॉडल है, जिसमें शुरुआत में कम कीमत दिखाकर ग्राहक को आकर्षित किया जाता है, और बाद में अन्य सर्विसेज या एड-ऑप्शन जोड़कर कुल खर्च बढ़ जाता है।
यदि आप ऑनलाइन शॉपिंग करते हैं या “सुपर ऑफर” देखने के बाद तुरंत “खरीदें” बटन दबा देते हैं तो यह जानकारी आपके लिए खास अहमियत रखती है।
ड्रिप-प्राइसिंग और इसके असर
ड्रिप-प्राइसिंग (Drip-Pricing) एक मार्केटिंग ट्रिक है, जिसमें कंपनी शुरुआत में कम कीमत दिखाते हैं ताकि ग्राहक आकर्षित हो जाएं। लेकिन लेन-देन के दौरान धीरे-धीरे अन्य चार्ज, टैक्स, एड-सर्विसेज या ऑप्शनल फिचर्स जोड़े जाते हैं, जिससे वास्तविक कीमत बहुत अधिक हो जाती है। JagoGrahakJago ने ट्विटर पोस्ट में कहा है: “The deal looks great at first, but hidden charges at the end hike up the price that’s Drip Pricing, a Dark Pattern …”

किस तरह के ऑफर्स में अक्सर मिलता है यह?
बहुत कम कीमत वाला “फर्स्ट-मंथ फ्री” प्लान जिसे एक्टिवेट करते ही अन्य सर्विस कनेक्शन्स के साथ जोड़ दिया जाता है। ‘LIMITED TIME OFFER’ जैसा बैनर जहां कीमत कम दिखाई गई हो, लेकिन चेकआउट में एड-ऑप्शन्स अनचाहे रूप से चयनित हों। एड-ऑन बंडल जैसे “फ्री शिपिंग”, “रिटर्न सपोर्ट”, “सर्विस फीस” आदि जिन्हें बाद में बिल में जोड़ा जाता है।
ग्राहक को क्या होता है नुकसान?
बजट के मुताबिक खरीदारी नहीं हो पाती। पहले से नहीं सोची गयी कीमतों को चुकाना पड़ता है। वापसी या रद्दीकरण (Cancellation) के दौरान अतिरिक्त शुल्क देना पड़ सकता है। मानसिक तनाव “लगता था सस्ता मिल गया… लेकिन बाद में महंगा साबित हुआ” वाला अनुभव।
ग्राहक कैसे बच सकते हैं?
चेकआउट से पहले कुल कीमत देखें “Total Payable” या “Final Amount” सुनिश्चित करें। “AD-ONS” और “OPTIONAL SERVICES” को अवश्य देखें; यदि किसी को नहीं चाहिए तो अनचेक करें। ऑफर की वैलिडिटी, लागत व शर्तें (Terms & Conditions) ध्यान से पढ़ें।
रिटर्न या कैंसल नीति देखें छिपे शुल्क या लिंक्ड सर्विस-मोड्यूल देखें। शिकायत/फीडबैक प्लेटफॉर्म जैसे JagoGrahakJago, से जानकारी लें कि अन्य ग्राहक क्या अनुभव कर चुके हैं।
उपभोक्ता अधिकार व सरकारी कदम
भारत में उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम (Consumer Protection Act) के अंतर्गत उपभोक्ता को “पार्टिकुलर चार्ज” और “फाइनल प्राइस” की जानकारी देना अनिवार्य है। ऐसे छुपे शुल्क या गलत विज्ञापन को “डार्क पैटर्न” माना जा सकता है।JagoGrahakJago जैसी संस्थाएं उपभोक्ताओं को जागरूक कर रही हैं, ताकि वे इन ट्रिक्स से बच सकें।

लेखक के बारे में
Himani Guptaलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




