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वॉट्सऐप और टेलीग्राम चैट की सिक्योरिटी पर खतरा, बैंक अकाउंट भी खाली होने का डर

वॉट्सऐप और टेलीग्राम चैट की सिक्योरिटी पर खतरा, बैंक अकाउंट भी खाली होने का डर

संक्षेप:

यह खतरा एक मैलवेयर से जुड़ा है, जो आपकी प्रोटेक्टेड चैट्स की जासूसी के साथ बैंकिंग डीटेल्स को भी चुरा सकता है। मैलवेयर फेक ऐंड्रॉयड अपडेट स्क्रीन भी दिखाता है, जिससे यूजर्स को लगता है कि उनके फोन में सॉफ्टवेयर अपडेट चल रहा है।

Wed, 26 Nov 2025 07:58 AMKumar Prashant Singh लाइव हिन्दुस्तान
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ऐंड्रॉयड स्मार्टफोन यूज करने वाले यूजर्स के लिए नया खतरा पैदा हो गया है। यह खतरा एक मैलवेयर से जुड़ा है, जो आपकी प्रोटेक्टेड चैट्स की जासूसी के साथ बैंकिंग डीटेल्स को भी चुरा सकता है। ऐंड्रॉयड अथॉरिटी की रिपोर्ट के अनुसार MTI Security के रिसर्चर्स ने इसे Sturnus मैलवेयर बताया है। यह मेसेजेस को डिक्रिप्ट करने के बाद डिवाइस की स्क्रीन को पढ़कर एन्क्रिप्टेड ऐप्स से मेसेजेस को आसानी से ऐक्सेस कर लेता है। इस कारण वॉट्सऐप, टेलीग्राम और सिग्नल जैसे पॉप्युलर मैसेजिंग ऐप्स की सिक्योरिटी पर खतरा बढ़ गया है।

बैंकिंग ऐप्स के ऊपर बिल्कुल असली लगने वाली फेक स्क्रीन

चिंता की बात यह भी है कि यह मैलवेयर बैंकिंग ऐप्स के ऊपर बिल्कुल असली लगने वाली फेक स्क्रीन की लेयर को ओवरलैप कर देता। इस चाल को यूजर समझ नहीं पाते और अनजाने में अपनी बैंकिंग डीटेल का ऐक्सेस हैकर्स को दे देते हैं। मैलवेयर फेक ऐंड्रॉयड अपडेट स्क्रीन भी दिखाता है, जिससे यूजर्स को लगता है कि उनके फोन में सॉफ्टवेयर अपडेट चल रहा है। जबकि, हकीकत में यह मैलवेयर की ट्रिक है, जिससे यह फेक सॉफ्टवेयर अपडेट के पीछे फोन में मौजूद सेंसिटिव इन्फर्मेशन की चोरी कर रहा होता है।

हैकर बढ़ा सकते हैं मैसवेयर की पहुंच

सिक्योरिटी रिसर्चर्स ने बताया कि यह मैलवेयर डिवाइस अनलॉक और पासवर्ड को ट्रैक करके एडमिन के अधिकार ले लेता है और इससे हैकर्स यह जान जाते हैं कि कब उन्हें इस मैलवेयर को अनइंस्टॉल होने से बचाना है। ऑनलाइन फ्रॉड प्रीवेंशन एजेंसी थ्रेट फैब्रिक ने ऐंड्रॉयड अथॉरिटी को बताया कि अब तक इस मैलवेयर के शिकार साउथ और सेंट्रल यूरोप में रहने वाले यूजर हुए हैं। माना जा रहा है कि हैकर आने वाले दिनों में इस मैलवेयर को और रिफाइन करके इसकी पहुंच को बढ़ा सकते हैं।

रिसर्चर्स को नहीं पता कि कैसे फैल रहा मैलवेयर

रिसर्चर्स को अभी यह नहीं पता है कि मैलवेयर कैसे फैल रहा है, लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि यह मैलवेयर मेसेजिंग ऐप्स में भेजे जाने वाले कुछ अटैचमेंट के जरिए डिवाइसेज में एंटर कर रहा है। फोन में एंटर करने के बाद यह खुद को गूगल क्रोम या किसी दूसरे ऐप का असली जैसा दिखने वाला एक फेक वर्जन बना कर यूजर्स को नुकसान पहुंचाता है।

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गूगल ने क्या कहा?

गूगल ने इस बारे में कहा, 'हमारे करेंट डिटेक्शन के आधार पर गूगल प्ले पर इस मैलवेयर वाले कोई भी ऐप नहीं मिले हैं। ऐंड्रॉयड यूजर्स को गूगल प्ले प्रोटेक्ट से इस मैलवेयर के आइडेंटिफाइ हो चुके वर्जन से ऑटोमैटिक सिक्योरिटी दी जाती है, जो गूगल प्ले सर्विस वाले ऐंड्रॉयड डिवाइस पर बाइ डिफॉल्ट ऐक्टिव रही है। गूगल प्ले प्रोटेक्ट यूजर्स को चेतावनी दे सकता है या मलीशियस बिहेवियर दिखाने वाले ऐप्स को ब्लॉक कर सकता है, भले ही वे ऐप्स प्ले के बाहर के सोर्सेज से आते हों।'

Kumar Prashant Singh

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Kumar Prashant Singh
प्रशांत को पत्रकारिता से जुड़े 12 साल से ज्यादा हो गए हैं। प्रशांत ने करियर की शुरुआत टीवी न्यूज चैनल से की थी। करीब 6 साल से यह डिजिटल मीडिया से जुड़े हैं। इनकी टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल में खास रुचि है। इन्हें गैजेट्स और गाड़ियों के बारे में लिखना और पढ़ना काफी पसंद है। खाली समय में समय में प्रशांत वेब सीरीज और मूवी देखते हैं। पहाड़ पर घूमना और फोन से अच्छे फोटो-वीडियो कैप्चर करना इन्हें बहुत पसंद है। प्रशांत लाइव हिन्दुस्तान में बतौर डिप्टी चीफ कॉन्टेंट प्रोड्यूसर काम कर रहे हैं। और पढ़ें

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