‘सिस्टम फेल’, बैन के बाद भी धड़ल्ले से FB, Insta चला रहा बच्चे, अब कंपनियों पर दोगुना जुर्माना

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ऑस्ट्रेलिया के इंटरनेट रेगुलेटर ईसेफ्टी (eSafety) के अनुसार, 10 से 15 साल की उम्र के ज्यादातर बच्चे मार्च में उतनी ही बार सोशल मीडिया का उपयोग कर रहे थे, जितनी बार वे पिछले साल 10 दिसंबर को प्रतिबंध लागू होने से पहले करते थे।

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ऑस्ट्रेलियाई सरकार द्वारा प्रतिबंध लगाए जाने के तीन महीने बाद भी 80 फीसदी से ज्यादा ऑस्ट्रेलियाई बच्चे सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर रहे हैं।

कई देश बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन कर चुके हैं, लेकिन अब 'सिस्टम फेल' होता दिख रहा है। ऐसा लगता है कि 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए इंस्टाग्राम, फेसबुक और टिकटॉक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगाना ऑस्ट्रेलियाई सरकार के लिए काम नहीं कर रहा है। एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार द्वारा प्रतिबंध लगाए जाने के तीन महीने बाद भी 80 फीसदी से ज्यादा ऑस्ट्रेलियाई बच्चे सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसा इसलिए है क्योंकि टेक कंपनियां प्रभावी रूप से एज वेरिफिकेशन चेक लागू करने में विफल रहीं।

नहीं हुआ बैन लगाने का फायदा

ऑस्ट्रेलिया के इंटरनेट रेगुलेटर ईसेफ्टी (eSafety) के अनुसार, 10 से 15 साल की उम्र के ज्यादातर बच्चे मार्च में उतनी ही बार सोशल मीडिया का उपयोग कर रहे थे, जितनी बार वे पिछले साल 10 दिसंबर को प्रतिबंध लागू होने से पहले करते थे। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, इस बीच, अपने बच्चों के सोशल मीडिया के उपयोग के बारे में माता-पिता की जागरूकता में गिरावट आई है।

रिपोर्ट में पाया गया कि भले ही कम बच्चों के पास सोशल मीडिया अकाउंट थे, फिर भी कई बच्चे इन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रहे थे। अकाउंट रखने वाले बच्चों की संख्या 52 प्रतिशत से घटकर 42 प्रतिशत हो गई, जिसमें सबसे ज्यादा गिरावट YouTube, Snapchat और TikTok पर देखी गई।

ईसेफ्टी के अनुसार, 16 साल से कम उम्र के ज्यादातर बच्चे, जिनके पास पहले से सोशल मीडिया अकाउंट थे, वे या तो उन्हें बनाए रखने में या तीन महीने बाद नए अकाउंट बनाने में कामयाब रहे। इसका मुख्य कारण सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उम्र की पुष्टि करने वाले असरदार उपाय लागू न कर पाना बताया गया है।

रिपोर्ट से यह भी पता चला कि बैन से पहले, लगभग 86 प्रतिशत बच्चों ने कम से कम एक आयु-प्रतिबंधित प्लेटफॉर्म का उपयोग करने की सूचना दी थी। तीन महीने बाद, यह आंकड़ा 81 प्रतिशत से ऊपर रहा। इसमें कहा गया है कि लगभग 58 प्रतिशत किशोरों ने रोज या उससे ज्यादा बार सोशल मीडिया का उपयोग करने की सूचना दी है, जो प्रतिबंध से पहले लगभग 60 प्रतिशत से थोड़ा ही कम है।

प्लेटफॉर्म ने उम्र वेरिफाई की ही नहीं

रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि जिन बच्चों के पास अभी भी सोशल मीडिया अकाउंट थे, उनमें से लगभग आधे बच्चों ने कहा कि इन प्लेटफॉर्म्स ने उनसे कभी अपनी उम्र वेरिफाई करने के लिए नहीं कहा। यही मुख्य कारण था कि वे इन प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल जारी रख पाए।

दूसरों ने कहा कि अकाउंट बनाते समय उन्होंने अपनी उम्र 16 या उससे ज्यादा बताई थी, या फिर प्लेटफॉर्म के उम्र चेक करने वाले सिस्टम ने उन्हें गलत तरीके से ऐप इस्तेमाल करने लायक उम्र का मान लिया था। ये निष्कर्ष मार्च के अंत में ईसेफ्टी द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के समान थे।

मार्च के अपडेट के बाद, देश के इंटरनेट रेगुलेटर ईसेफ्टी ने घोषणा की कि वह पांच प्लेटफॉर्म्स - मेटा के फेसबुक और इंस्टाग्राम, स्नैपचैट, टिकटॉक और गूगल के यूट्यूब - द्वारा नियमों का संभावित रूप से पालन न किए जाने की जांच कर रहा है। जून में, ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने कहा कि वह प्रतिबंध का पालन करने में विफल रहने वाली कंपनियों पर अधिकतम जुर्माना दोगुना कर देगी।

Arpit Soni

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अर्पित सोनी को शुरुआत से ही नए-नए गैजेट्स को एक्सप्लोर करने और उन्हें आजमाने का शौक रहा है। अब अर्पित ने अपनी इस हॉबी को ही अपना पेशा बना लिया है। भोपाल के रहने वाले अर्पित को नए-नए गैजेट्स का रिव्यू करना और उनके बारे में लिखना काफी पसंद है। टेक्नोलॉजी, रोबोट्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इनसे जुड़ी खबरें लिखना भी इन्हें काफी भाता है। लाइव हिन्दुस्तान में अर्पित पिछले चार साल से बतौर सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर काम कर रहे हैं। मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें करीब 9 साल का अनुभव है। अर्पित ने मीडिया जगत में शुरुआत एक रीजनल चैनल से की थी। इससे बाद उन्होंने नवभारत टाइम्स और दैनिक भास्कर की गैजेट्स बीट में काम किया। अर्पित की स्कूलिंग भोपाल से हुई है। उन्होंने कंप्यूटर साइंस से इंजीनियरिंग की है। मीडिया में झुकाव के चलते उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU) से पोस्ट ग्रेजुएशन करके मीडिया जगत में एंट्री की। मीडिया में इन्हें आठ साल से ज्यादा समय हो चुके हैं और सफर अभी जारी है। गैजेट्स के अलावा, इन्हें नई-नई जगहों पर घूमना और उनके बारे में जानने का भी बहुत शौक है।

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