
बड़ी मुसीबत में OnePlus, कंपनी के सीईओ के खिलाफ जारी हुआ अरेस्ट वॉरंट, गंभीर आरोप
वनप्लस के सीईओ पीट लाउ के खिलाफ अरेस्ट वॉरंट जारी हुआ है। यह अरेस्ट वॉरंट ताइवान ने जारी किया है। लाउ पर आरोप है कि उन्होंने स्थानीय कानूनों का उल्लंघन करते हुए ताइवान के वर्कर्स को अवैध रूप से नौकरी पर रखा है।
वनप्लस बड़ी परेशानी में है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार कंपनी के सीईओ पीट लाउ (OnePlus CEO Pete Lau) के खिलाफ अरेस्ट वॉरंट जारी हुआ है। यह अरेस्ट वॉरंट ताइवान ने जारी किया है। लाउ पर आरोप है कि उन्होंने स्थानीय कानूनों का उल्लंघन करते हुए ताइवान के वर्कर्स को अवैध रूप से नौकरी पर रखा है। रिपोर्ट के अनुसार शिलिन डिस्ट्रिक्ट प्रोसिक्यूटर ऑफिस ने कन्फर्म किया है कि 70 से अधिक ताइवानी इंजीनियरों की अवैध भर्ती के आरोपों की पूरी जांच के लिए वनप्लस सीईओ लाउ की तलाश की जा रही है। प्रोसिक्यूटर्स (अभियोजकों) के अनुसार भर्ती प्रक्रिया में लाउ की कथित रूप से सहायता करने वाले दो ताइवानी नागरिकों पर पहले ही आरोप तय किए जा चुके हैं।
हॉन्गकॉन्ग में शुरू की फर्जी कंपनी
मामला ताइवान के क्रॉस-स्ट्रेट एक्ट को अनदेखा करने का कथित प्रयास है, जो ताइवान और मेनलैंड चीन के बीच इकोनॉमिक और कमर्शियल संबंधों को नियंत्रित करता है। इस अधिनियम के तहत चीनी कंपनियों को स्थानीय वर्कर्स को काम पर रखने या ताइवान में कुछ व्यावसायिक गतिविधियां करने से पहले ताइवानी सरकार से जरूरी अप्रूवल लेना अनिवार्य है। अभियोजकों का दावा है कि वनप्लस ने हॉन्गकॉन्ग में एक अलग नाम से एक फर्जी कंपनी शुरू की, जिसका इस्तेमाल 2015 में ताइवान में एक अनधिकृत शाखा स्थापित करने के लिए किया गया।
सीक्रेट हायरिंग के खिलाफ कार्रवाई तेज
आरोप है कि यह इकाई बिना रेग्युलेटरी क्लियरेंस के ऑपरेट हुई और वनप्लस स्मार्टफोन के लिए रिसर्च और डिवेलपमेंट का काम करती थी। ताइवानी अधिकारियों का तर्क है कि यह तामझाम जानबूझकर कंपनी के मेनलैंड चाइना ओनरशिप को छिपाने और कानूनी जांच से बचने के लिए किया गया था। वनप्लस ने फिलहाल अरेस्ट वारंट पर सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। बीते कुछ सालों में ताइवान ने मेनलैंड चीन की कंपनियों की सीक्रेट हायरिंग के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है।
चीन के साथ औपचारिक प्रत्यर्पण समझौता नहीं
लाउ के लिए जारी अरेस्ट वारंट का मतलब सीधे-सीधे प्रत्यर्पण नहीं है। ताइवान का चीन के साथ कोई औपचारिक प्रत्यर्पण समझौता नहीं है और लाउ की गिरफ्तारी की संभावना नहीं है। अगर वे ताइवान के किसी क्षेत्र या किसी सहयोगी देश में प्रवेश करते हैं, तो उन्हें अरेस्ट किया जा सकता है।

लेखक के बारे में
Kumar Prashant Singhप्रशांत को पत्रकारिता से जुड़े 13 साल से ज्यादा हो गए हैं। प्रशांत पिछले 5 साल से HT से जुड़े हैं। यह यहां डिप्टी चीफ कॉन्टेंट प्रड्यूसर के तौर पर काम कर रहे हैं। इन्होंने मास कम्यूनिकेशन में ग्रेजुएशन किया है। करियर की शुरुआत टीवी न्यूज चैनल से की थी। HT से पहले प्रशांत नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में गैजेट्स सेक्शन के लिए लिखा करते थे। इनको डिजिटल मीडिया से जुड़े 8 साल से ज्यादा हो गए हैं। इनकी टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल में खास रुचि है। इन्हें टेक्नोलॉजी, गैजेट्स और गाड़ियों के बारे में लिखना और पढ़ना काफी पसंद है।
और पढ़ेंलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




