फोन में Aadhaar App प्री-इंस्टॉलेशन का विरोध कर रहे स्मार्टफोन ब्रांड्स, कहा- बढ़ जाएगा खर्चा

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Aadhaar App को लेकर सरकार और स्मार्टफोन कंपनियों के बीच खींचतान शुरू हो गई है। खबर है कि Apple, Samsung और अन्य स्मार्टफोन कंपनियां अपने फोन पर आधार ऐप को प्री-इंस्टॉल करने का विरोध कर रही हैं। कंपनियों का मानना ​​है कि प्री-इंस्टॉलेशन से उनके प्रोडक्शन की लागत बढ़ जाएगी।

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Aadhaar App को लेकर सरकार और स्मार्टफोन कंपनियों के बीच खींचतान शुरू हो गई है। खबर है कि Apple, Samsung और अन्य स्मार्टफोन कंपनियां अपने फोन पर आधार ऐप को प्री-इंस्टॉल करने का विरोध कर रही हैं। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने इस साल की शुरुआत में अपने नए आधार ऐप का फुल वर्जन लॉन्च किया था। लगभग उसी समय, टेलीकॉम मिनिस्ट्री ने कथित तौर पर स्मार्टफोन कंपनियों से एक निजी अनुरोध किया था कि वे सभी नए डिवाइस पर आधार बायोमेट्रिक पहचान ऐप को प्री-इंस्टॉल कर दें। अब, एक नई रिपोर्ट से पता चलता है कि इस प्रस्ताव का विरोध मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन फॉर इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (MAIT) ने किया है। Apple और Samsung जैसी कंपनियों ने कथित तौर पर सुरक्षा संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए इस कदम पर अपनी आपत्तियां जताई हैं। हालांकि, अब UIDAI ने स्पष्ट किया है कि आधार ऐप को अनिवार्य बनाने की कोई योजना नहीं।

स्मार्टफोन निर्माताओं का कहना है कि प्री-इंस्टॉलेशन से प्रोडक्शन कॉस्ट बढ़ जाएगी

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, MAIT के 13 जनवरी के एक अंदरूनी ईमेल से पता चला है कि UIDAI ने जनवरी की शुरुआत में ही भारत के IT मंत्रालय से संपर्क किया था। इसका मकसद Google, Apple और अन्य प्रमुख स्मार्टफोन निर्माताओं को इस बात के लिए राजी करना था कि वे अपने स्मार्टफोन पर आधार ऐप का सबसे नया वर्जन पहले से ही इंस्टॉल करके दें। हालांकि यह कोई सीधा-सीधा आदेश नहीं था, फिर भी कहा जा रहा है कि इस कदम की वजह से इंडस्ट्री की तरफ से विरोध का सामना करना पड़ा।

MAIT के दस्तावेजों का हवाला देते हुए रॉयटर्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि कंपनियों का मानना ​​है कि इस तरह की प्री-इंस्टॉलेशन की शर्तें उनके प्रोडक्शन की लागत और जोखिम को बढ़ा देंगी, जिससे यूजर्स के लिए काम करने में दिक्कतें पैदा होंगी। इंडस्ट्री के सूत्रों का हवाला देते हुए रिपोर्ट में बताया गया है कि Apple और Samsung ने सुरक्षा और सिक्योरिटी को लेकर सवाल उठाए हैं। जनवरी में MAIT की ओर से अपने सदस्यों को भेजे गए एक ईमेल के मुताबिक, UIDAI ने कहा कि ऐप को प्री-इंस्टॉल करने से "बिना अलग से डाउनलोड किए, आधार की जरूरी सुविधाओं तक आसानी से पहुंचा जा सकेगा" और "इसकी पहुंच और उपलब्धता बढ़ेगी"।

MAIT की सदस्य कंपनियों ने कथित तौर पर हैंडसेट पर आधार ऐप को पहले से लोड करने की योजना से असहमति जताई। उनका कहना था कि इसे अनिवार्य रूप से प्री-इंस्टॉल करना "जनहित में ज्यादा फायदेमंद नहीं होगा" और इससे निर्माताओं को भारत और निर्यात के लिए अलग-अलग प्रोडक्शन लाइनें रखनी पड़ सकती हैं। MAIT ने आगे यह भी कहा कि दुनिया भर में ऐसी जरूरतें बहुत कम देखने को मिलती हैं; रूस उन गिने-चुने देशों में से एक है जहां सरकारी ऐप्स को प्री-इंस्टॉल करना अनिवार्य है।

हालांकि, खबरों के मुताबिक, अभी भी यह साफ नहीं है कि यह प्रस्ताव अभी भी विचाराधीन है या इसे रद्द कर दिया गया है। रॉयटर्स को दिए एक बयान में, MAIT ने कथित तौर पर कहा कि उसके इंटरनल कम्युनिकेशन गोपनीय होते हैं। कहा जा रहा है कि आधार ऐप को प्री-इंस्टॉल करने का प्रस्ताव उन छह पहलों में से एक है, जिनका MAIT ने औपचारिक रूप से विरोध किया है।

जनवरी में पूरी तरह से लॉन्च हुए आधार ऐप के जरिए यूजर्स अपने क्रेडेंशियल्स वेरिफाई कर सकते हैं और आधार से ऑथेंटिकेट कर सकते हैं। Android और iOS पर उपलब्ध यह ऐप यूजर्स को अपनी निजी जानकारी अपडेट करने, फैमिली प्रोफाइल मैनेज करने और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अपने बायोमेट्रिक डेटा को लॉक करने की सुविधा भी देता है। यह ऐप 13 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध है। आलोचकों का तर्क था कि यह प्रस्ताव स्मार्टफोन के इस्तेमाल पर सरकार के बढ़ते नियंत्रण को दिखाता है।

UIDAI ने स्पष्ट किया: आधार ऐप को अनिवार्य बनाने की कोई योजना नहीं

स्मार्टफोन में नए आधार ऐप को पहले से इंस्टॉल करने को लेकर भारत सरकार और इंडस्ट्री के बीच कथित मतभेद की खबरों के बीच, अब दोनों पक्षों ने कहा है कि यह अभी भी चर्चा का विषय है और इसे अनिवार्य बनाने की कोई योजना नहीं है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने शुक्रवार को एचटी को बताया कि मोबाइल फोन पर नया आधार ऐप पहले से इंस्टॉल करने का प्रस्ताव नवंबर 2025 में IT मंत्रालय को भेजा गया था, और इस मामले पर कंपनियों से चर्चा चल रही है।

अधिकारी ने कहा, "ऐप को पहले से इंस्टॉल करने के पीछे UIDAI का तर्क वंचित लोगों की सुविधा था, जिनके पास महंगे मोबाइल फोन नहीं हैं और जो ऐसे ऐप्स इंस्टॉल नहीं कर सकते जो उनके डिवाइस पर ज्यादा जगह घेरते हों।" यह नया ऐप इस साल की शुरुआत में लॉन्च किया गया था।

अधिकारी ने आगे स्पष्ट किया, "अगर यह पहले से इंस्टॉल आता है, तो यूजर्स को इसे इंस्टॉल करने की जरूरत नहीं होगी। फिर यह उन पर निर्भर करता है कि वे इसका इस्तेमाल करना चाहते हैं या नहीं। जैसा कि Google Maps के मामले में होता है, यह पहले से इंस्टॉल आता है, लेकिन यह हम पर निर्भर करता है कि हम इसका इस्तेमाल करना चाहते हैं या नहीं।"

Arpit Soni

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अर्पित सोनी को शुरुआत से ही नए-नए गैजेट्स को एक्सप्लोर करने और उन्हें आजमाने का शौक रहा है। अब अर्पित ने अपनी इस हॉबी को ही अपना पेशा बना लिया है। भोपाल के रहने वाले अर्पित को नए-नए गैजेट्स का रिव्यू करना और उनके बारे में लिखना काफी पसंद है। टेक्नोलॉजी, रोबोट्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इनसे जुड़ी खबरें लिखना भी इन्हें काफी भाता है। लाइव हिन्दुस्तान में अर्पित पिछले चार साल से बतौर सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर काम कर रहे हैं। मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें करीब 9 साल का अनुभव है। अर्पित ने मीडिया जगत में शुरुआत एक रीजनल चैनल से की थी। इससे बाद उन्होंने नवभारत टाइम्स और दैनिक भास्कर की गैजेट्स बीट में काम किया। अर्पित की स्कूलिंग भोपाल से हुई है। उन्होंने कंप्यूटर साइंस से इंजीनियरिंग की है। मीडिया में झुकाव के चलते उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU) से पोस्ट ग्रेजुएशन करके मीडिया जगत में एंट्री की। मीडिया में इन्हें आठ साल से ज्यादा समय हो चुके हैं और सफर अभी जारी है। गैजेट्स के अलावा, इन्हें नई-नई जगहों पर घूमना और उनके बारे में जानने का भी बहुत शौक है।

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