'बेकार' हो जाएगा चोरी का iPhone, बेच नहीं पाएंगे चोर, ऐप्पल लाया काम का फीचर
चोरी का iPhone बेचना अब चोरों के लिए लगभग नामुमकिन हो जाएगा। ऐप्पल एक काम का फीचर लेकर आ गया है। यह फीचर चोरों को आईफोन रीसेट नहीं करने देगा, जिससे वह उसे किसी को बेच नहीं पाएंगे। कैसे काम करेगा नया फीचर, चलिए बताते हैं…

iPhone खरीदना हर किसी का सपना है और चोरों की भी अच्छी तरह पता है कि लोग आईफोन के लिए क्रेजी है। शायद इसलिए चोरों के निशान पर आईफोन सबसे ज्यादा रहता है क्योंकि उन्हें पता हैं कि औने-पौने दाम में बचेंगे तो कोई भी आसानी से खरीद लेगा। लेकिन ऐप्पल अब एक ऐसे फीचर पर काम कर रही है, जो चोरी के आईफोन को बेकार कर देगा, खासकर चोरों के लिए। लंदन की मेट्रोपॉलिटन पुलिस का कहना है कि हाल ही में किए गए सिक्योरिटी इम्प्रूवमेंट्स की वजह से अपराधियों के लिए चोरी के आईफोन से फायदा उठाना मुश्किल हो गया है। पुलिस ने BBC को बताया कि उसने ऐप्पल के साथ डेटा शेयर करना शुरू कर दिया है, ताकि यह बेहतर ढंग से समझा जा सके कि चोरी होने के बाद उन डिवाइस का क्या होता है। इस सहयोग का मकसद यह पता लगाना है कि क्या चोरी हुए फोन दोबारा चालू किए जा रहे हैं और उनकी रीसेल वैल्यू को और कम करने के तरीके खोजना है। चलिए डिटेल में बताते हैं...
दोबारा चालू नहीं हो पा रहे चारो के आईफोन
मेट्रोपॉलिटन पुलिस कमिश्नर सर मार्क राउली के अनुसार, शुरुआती डेटा से पता चलता है कि कुछ महीने पहले की तुलना में अब चोरी हुए बहुत कम आईफोन ही सफलतापूर्वक दोबारा चालू (रीएक्टिवेट) हो पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐप्पल का मानना है कि उसने एक अहम समस्या का समाधान कर लिया है, जिसकी वजह से पहले चोर चोरी किए गए डिवाइस को फैक्ट्री रीसेट करके उन्हें वर्किंग कंडीशन फोन के तौर पर बेच देते थे, और अक्सर उन्हें विदेशी बाजारों में बेचा जाता था।
रॉली ने कहा, "अगर चोरी हुए फोन दोबारा चालू नहीं किए जा सकें, तो उनकी कीमत खत्म हो जाएगी और उन्हें चुराने का लालच भी नहीं रहेगा।"
दुनिया भर के कई शहरों में फोन चोरी एक बड़ी समस्या बन गई है क्योंकि चोरी हुए स्मार्टफोन अंतरराष्ट्रीय बाजार में अच्छी कीमत पर बिक सकते हैं। पुलिस का मानना है कि चोरी हुए कई डिवाइस को रीसेट करने के बाद दूसरे देशों में भेज दिया जाता है और फिर से बेच दिया जाता है। रीएक्टिवेशन को मुश्किल बनाकर, ऐप्पल असल में इन अपराधों के पीछे के आर्थिक फायदे को कम कर रहा है।
मेट्रोपॉलिटन पुलिस का कहना है कि इसका असर पहले से ही दिख रहा है। खबरों के मुताबिक, पिछले साल की तुलना में जून 2025 और मई 2026 के बीच मोबाइल फोन चोरी की घटनाओं में 18 प्रतिशत की कमी आई है।
ऐसे काम करता है Apple का 'Stolen Device Protection' फीचर
इस बदलाव के पीछे एक मुख्य कारण ऐप्पल का 'Stolen Device Protection' फीचर है, जिसे कंपनी ने हाल ही में iOS 26.4 के साथ डिफॉल्ट रूप से इनेबल किया है।
यह फीचर इसलिए बनाया गया है ताकि चोर आईफोन चुराने के तुरंत बाद उस पर अपना कंट्रोल न कर सकें। जब डिवाइस मालिक के घर या काम की जगह जैसी जानी-पहचानी जगहों से दूर होता है, तो ऐप्पल जरूरी काम करने से पहले अतिरिक्त सुरक्षा जांच करता है।
इन कामों में ऐप्पल अकाउंट का पासवर्ड बदलना, फेस ID या टच ID हटाना, 'Find My' बंद करना, डिवाइस का डेटा मिटाना या जरूरी सिक्योरिटी सेटिंग्स में बदलाव करना शामिल है। कई मामलों में, सिस्टम इन बदलावों को करने की अनुमति देने से पहले देरी करता है और अतिरिक्त ऑथेंटिकेशन की मांग करता है।
इससे असली मालिक को दूसरा डिवाइस इस्तेमाल करने, आईफोन को 'खोया हुआ' (lost) मार्क करने और अपना अकाउंट सुरक्षित करने के लिए जरूरी समय मिल जाता है, ताकि चोर फोन का डेटा मिटा न सके या उसे दोबारा बेच न सके। अगर चोरी हुए डिवाइस को रीसेट और रीएक्टिवेट करना मुश्किल हो जाए, तो फोन चोरी करने का बिजनेस मॉडल कम फायदेमंद हो जाता है। जिस फोन का दोबारा इस्तेमाल नहीं किया जा सकता, उसकी कीमत अपराधियों के लिए बहुत कम होती है, जिससे उसे चोरी करने का लालच भी कम हो जाता है।
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Arpit Soniअर्पित सोनी को शुरुआत से ही नए-नए गैजेट्स को एक्सप्लोर करने और उन्हें आजमाने का शौक रहा है। अब अर्पित ने अपनी इस हॉबी को ही अपना पेशा बना लिया है। भोपाल के रहने वाले अर्पित को नए-नए गैजेट्स का रिव्यू करना और उनके बारे में लिखना काफी पसंद है। टेक्नोलॉजी, रोबोट्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इनसे जुड़ी खबरें लिखना भी इन्हें काफी भाता है। लाइव हिन्दुस्तान में अर्पित पिछले चार साल से बतौर सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर काम कर रहे हैं। मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें करीब 9 साल का अनुभव है। अर्पित ने मीडिया जगत में शुरुआत एक रीजनल चैनल से की थी। इससे बाद उन्होंने नवभारत टाइम्स और दैनिक भास्कर की गैजेट्स बीट में काम किया। अर्पित की स्कूलिंग भोपाल से हुई है। उन्होंने कंप्यूटर साइंस से इंजीनियरिंग की है। मीडिया में झुकाव के चलते उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU) से पोस्ट ग्रेजुएशन करके मीडिया जगत में एंट्री की। मीडिया में इन्हें आठ साल से ज्यादा समय हो चुके हैं और सफर अभी जारी है। गैजेट्स के अलावा, इन्हें नई-नई जगहों पर घूमना और उनके बारे में जानने का भी बहुत शौक है।
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