खतरे में Mac यूजर्स, 83 घंटे तक लगातार क्रैश हो रहे सिस्टम, 'सिरदर्द' बने ये मैलवेयर

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Mac यूजर्स पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है। खबर है कि मैक यूजर्स को ClickLock Stealer और CrashStealer नाम के ये जो मैलवेयर कहर बरपा रहे हैं। यह उनके सिस्टम को तब तक क्रैश करते रहते हैं जब तक इन्हें पासवर्ड न मिल जाए। क्या है पूरा मामला, डिटेल में जानिए

mac users in danger

वैसे तो ऐप्पल के ऑपरेटिंग सिस्टम को सबसे सुरक्षित माना जाता है, लेकिन अब हैकर्स ने ऐसे मैलवेयर बना लिए हैं, जो ऐप्पल के सिक्योरिटी सिस्टम को बायपास कर सकते हैं। अब Apple के Mac यूजर्स पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है। खबर है कि मैक यूजर्स को 'ClickLock Stealer' नाम के नए macOS इन्फोस्टीलर से बड़ा खतरा है। डराने वाली बात यह है कि यह मैलवेयर उनके सभी ऐप्स को तब तक लगातार क्रैश करता रहता है, जब तक कि वे अपना लॉगिन पासवर्ड न दे दें। यह टर्मिनल में पेस्ट किए गए कमांड के तौर पर आता है, एक नकली सिस्टम डायलॉग के पीछे पासवर्ड मांगता है, और जब पीड़ित इसे कैंसिल करता है, तो यह दो LaunchAgents इंस्टॉल करके बंद हो जाता है। अगली बार जब आप लॉग इन करते हैं, तो Finder, Dock, Spotlight, Activity Monitor और Terminal जैसे सभी खास ऐप्स अगले 83 घंटों तक हर 210 मिलीसेकंड में बंद होने लगते हैं, और आपको बस एक डेड डेस्कटॉप पर पासवर्ड बॉक्स दिखाई देता है।

33 देशों को लोग प्रभावित

ग्रुपआईबी के अनुसार, मई 2026 तक यह मैलवेयर लगभग 33 देशों में कम से कम 100 टारगेट को प्रभावित कर चुका है, और इनमें से आधे यूरोप से हैं। उनके एनालिस्ट के मुताबिक, यह मैलवेयर अभी भी डेवलप किया जा रहा है। जब ग्रुपआईबी ने इसका एनालिसिस किया, तो इसका पता लगाने वाले सिस्टम में यह बिल्कुल भी डिटेक्ट नहीं हुआ। वैसे तो ऐसी घटनाएं रोज नहीं होतीं, लेकिन अगर कोई अपने सिस्टम पर चल रही चीजों को लेकर सावधान नहीं रहता, तो वह इसका शिकार बन सकता है।

क्रैशस्टीलर नाम के मैलवेयर से भी खतरा

एक और मैलवेयर भी macOS पर कहर बरपा रहा है, और इसे क्रैशस्टीलर (CrashStealer) कहा जा रहा है। जैम्फ थ्रेट लैब्स द्वारा पब्लिश एक रिपोर्ट के अनुसार, यह मैलवेयर, ऐप्पल के क्रैश रिपोर्टिंग फ्रेमवर्क की नकल करता है, और यह बहुत सारी संवेदनशील जानकारी चुराता है। क्रैशस्टीलर ब्राउजर डेटा, पासवर्ड मैनेजर डेटा, क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट एक्सटेंशन और किचेन डेटा भी इकट्ठा कर सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, इसे सबसे पहले Werkbit नाम के एक नकली ऐप्पल-नोटराइज्ड ऐप में देखा गया था। नोटराइजेशन के साथ, मैलवेयर को गेटकीपर द्वारा नहीं रोका जाता है, जो macOS सिक्योरिटी सिस्टम का एक हिस्सा है। सबसे ज्यादा परेशान करने वाली बात यह है कि यह 80 से ज्यादा क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट एक्सटेंशन और 1 पासवर्ड, डैशलेन और लास्टपास जैसे 14 पासवर्ड मैनेजरों को टारगेट करता है। यह चुराने लायक जानकारी ढूंढने के लिए दस्तावेजों और डाउनलोड फोल्डरों में जाता है।

Arpit Soni

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अर्पित सोनी को शुरुआत से ही नए-नए गैजेट्स को एक्सप्लोर करने और उन्हें आजमाने का शौक रहा है। अब अर्पित ने अपनी इस हॉबी को ही अपना पेशा बना लिया है। भोपाल के रहने वाले अर्पित को नए-नए गैजेट्स का रिव्यू करना और उनके बारे में लिखना काफी पसंद है। टेक्नोलॉजी, रोबोट्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इनसे जुड़ी खबरें लिखना भी इन्हें काफी भाता है। लाइव हिन्दुस्तान में अर्पित पिछले चार साल से बतौर सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर काम कर रहे हैं। मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें करीब 9 साल का अनुभव है। अर्पित ने मीडिया जगत में शुरुआत एक रीजनल चैनल से की थी। इससे बाद उन्होंने नवभारत टाइम्स और दैनिक भास्कर की गैजेट्स बीट में काम किया। अर्पित की स्कूलिंग भोपाल से हुई है। उन्होंने कंप्यूटर साइंस से इंजीनियरिंग की है। मीडिया में झुकाव के चलते उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU) से पोस्ट ग्रेजुएशन करके मीडिया जगत में एंट्री की। मीडिया में इन्हें आठ साल से ज्यादा समय हो चुके हैं और सफर अभी जारी है। गैजेट्स के अलावा, इन्हें नई-नई जगहों पर घूमना और उनके बारे में जानने का भी बहुत शौक है।

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