ग्राहकों को झटका, ऐप्पल ने चुपचाप बंद की सबसे सस्ते Mac mini की बिक्री, अब 20 हजार ज्यादा खर्च करने होंगे

Arpit Soni लाइव हिन्दुस्तान
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अगर आप भी किफायती Mac mini खरीदने का प्लान कर रहे हैं, तो आपके लिए बुरी खबर है। ऐप्पल ने चुपचाप अपने ऑनलाइन स्टोर से 256GB स्टोरेज वाले Mac mini को हटा दिया है। अब ग्राहकों को 20 हजार रुपये ज्यादा देकर 512GB मॉडल खरीदना होगा।

ग्राहकों को झटका, ऐप्पल ने चुपचाप बंद की सबसे सस्ते Mac mini की बिक्री, अब 20 हजार ज्यादा खर्च करने होंगे

ऐप्पल ने चुपचाप अपने सबसे सस्ते Mac mini के पॉपुलर वेरिएंट की बिक्री बंद कर दी है, और अब किफायती डेस्कटॉप मैक की तलाश कर रहे खरीदारों के पास एक विकल्प कम हो गया है। दरअसल, ऐप्पल ने अपने ऑनलाइन स्टोर से 256GB स्टोरेज वाले Mac mini को हटा दिया है, जिससे यह हिंट मिलता है कि सप्लाई का दबाव और कंपोनेंट्स की कमी अब सीधे तौर पर रिटेल में उपलब्धता को प्रभावित कर रही है। इस मॉडल की लिस्टिंग ऐप्पल इंडिया वेबसाइट पर भी दिखाई नहीं दे रही है। अब ग्राहकों को 20 हजार रुपये ज्यादा देकर 512GB मॉडल खरीदना होगा।

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आउट ऑफ स्टॉक हो गया था डिवाइस

इंडियाटूडे की रिपोर्ट के अनुसार, यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब पिछले हफ्ते एंट्री-लेवल मैक मिनी पहली बार आउट ऑफ स्टॉक हो गया था, इस बात पर सबसे पहले मैकरूमर्स का ध्यान गया था। उस समय, ऐप्पल ने शिपिंग में काफी देरी दिखाई थी, जिसके बाद उसने स्टेटस बदलकर "अभी उपलब्ध है" कर दिया था। अब, यह मॉडल ऐप्पल की वेबसाइट से पूरी तरह से गायब हो गया है, जिससे यह हिंट मिलता है कि 256GB वाला वर्जन शायद जल्द ही वापस न आए।

अब खर्च करने होंगे 20 हजार रुपये ज्यादा

उस वेरिएंट के हटाए जाने के बाद, मैक मिनी लाइनअप की कीमत अब यूएस में 799 डॉलर और भारत में 79,900 रुपये से शुरू होती है। इसमें खरीदारों को M4 चिप, 16GB रैम और 512GB स्टोरेज मिलता है। हालांकि ऐप्पल ने 512GB मॉडल की कीमत में कोई बढ़ोतरी नहीं की है, लेकिन अब एक नया मैक मिनी खरीदने के लिए किसी को भी कम से कम यूएस में 200 डॉलर और भारत में 20,000 रुपये ज्यादा खर्च करने होंगे।

महंगे वर्जन के लिए भी लंबा इंतजार

लेकिन, सप्लाई से जुड़ी दिक्कतें सिर्फ सबसे सस्ते मॉडल तक ही सीमित नहीं हैं। खबरों के मुताबिक, यूएस में 512GB मैक मिनी की बुकिंग जून तक के लिए पूरी हो चुकी है, जबकि कई महंगे वर्जन के लिए या तो लंबा इंतजार करना पड़ रहा है या फिर उन पर "अभी उपलब्ध नहीं" का टैग लगा है। अगर आप महंगे मॉडल ऑर्डर करने का सोच रहे हैं, तो भारत में भी यही हाल है, क्योंकि 512GB वाला बेसिक मॉडल मई के आखिर तक ही डिलीवर हो पाएगा। 32GB मेमोरी वाले कॉन्फिगरेशन मिलना सबसे मुश्किल है। कहा जा रहा है कि Amazon पर भी मैक मिनी के कई वर्जन का स्टॉक कम पड़ रहा है।

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मैक मिनी और मैक स्टूडियो की हैवी डिमांड

ऐप्पल के सीईओ टिम कुक ने हाल ही में कंपनी की तिमाही कमाई कॉल के दौरान इस मुद्दे पर बात की। उन्होंने कहा कि मैक मिनी और मैक स्टूडियो की मांग उम्मीद से कहीं ज्यादा है, खासकर उन यूजर्स की तरफ से जो AI वर्कलोड में दिलचस्पी रखते हैं। मैक मिनी और मैक स्टूडियो, ये दोनों ही AI और एजेंटिक टूल्स के लिए बेहतरीन प्लेटफॉर्म हैं। ग्राहक इसे हमारी उम्मीद से कहीं ज्यादा तेजी से पहचान रहे हैं, और इसी वजह से हमें उम्मीद से कहीं ज्यादा डिमांड देखने को मिली है।

कुक ने "एडवांस्ड नोड्स" से जुड़े दबाव की ओर भी इशारा किया, उनका मतलब ऐप्पल सिलिकॉन के लिए इस्तेमाल होने वाली अत्याधुनिक चिप बनाने की प्रक्रियाओं से था। इससे यह हिंट मिलता है कि ऐप्पल को एक ही समय पर जबर्दस्त मांग और सप्लाई से जुड़ी सीमाओं, दोनों का सामना करना पड़ सकता है।

उन्होंने आगे कहा कि सप्लाई और डिमांड के फिर से संतुलित होने में "कई महीने" लग सकते हैं। खरीदारों के लिए इसका मतलब है कि अगले कुछ महीनों तक कमी बनी रह सकती है।

दुनियाभर में मेमोरी चिप की कमी भी इसकी बड़ी वजह है। बड़ी टेक कंपनियों द्वारा AI सर्वर के विस्तार से रैम और स्टोरेज कंपोनेंट्स की मांग बढ़ गई है, जिससे वे ज्यादा महंगे हो गए हैं और उन्हें हासिल करना भी मुश्किल हो गया है। खुद कुक ने कहा कि ऐप्पल को इस तिमाही में "मेमोरी की लागत में काफी बढ़ोतरी" की उम्मीद है।

इससे शायद यह बात समझ में आती है कि ऐप्पल ज्यादा कीमत वाले मैक कॉन्फिगरेशन को, जिनमें ज्यादा स्टोरेज और मेमोरी के ऑप्शन होते हैं, प्राथमिकता क्यों दे रहा है; जबकि सबसे कम कीमत वाले मॉडल को चुपचाप हटा रहा है।

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अर्पित सोनी को शुरुआत से ही नए-नए गैजेट्स को एक्सप्लोर करने और उन्हें आजमाने का शौक रहा है। अब अर्पित ने अपनी इस हॉबी को ही अपना पेशा बना लिया है। भोपाल के रहने वाले अर्पित को नए-नए गैजेट्स का रिव्यू करना और उनके बारे में लिखना काफी पसंद है। टेक्नोलॉजी, रोबोट्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इनसे जुड़ी खबरें लिखना भी इन्हें काफी भाता है। लाइव हिन्दुस्तान में अर्पित पिछले चार साल से बतौर सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर काम कर रहे हैं। मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें करीब 9 साल का अनुभव है। अर्पित ने मीडिया जगत में शुरुआत एक रीजनल चैनल से की थी। इससे बाद उन्होंने नवभारत टाइम्स और दैनिक भास्कर की गैजेट्स बीट में काम किया। अर्पित की स्कूलिंग भोपाल से हुई है। उन्होंने कंप्यूटर साइंस से इंजीनियरिंग की है। मीडिया में झुकाव के चलते उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU) से पोस्ट ग्रेजुएशन करके मीडिया जगत में एंट्री की। मीडिया में इन्हें आठ साल से ज्यादा समय हो चुके हैं और सफर अभी जारी है। गैजेट्स के अलावा, इन्हें नई-नई जगहों पर घूमना और उनके बारे में जानने का भी बहुत शौक है।

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